Talented View : सस्ता रोये बार-बार, महंगा रोये एक बार

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एक कहावत है- “सस्ता रोए बार-बार और महंगा रोए एक बार” इस कहावत के जीवंत उदाहरण आपने असल जीवन मे कई बार देखे होंगे। जैसे कई बार इंसान लालच में आकर सस्ती वस्तुएं खरीद लेता है, लेकिन उनकी क्वालिटी दोयम दर्जे की होती है। इसलिए थोड़े दिन बाद दोबारा वही समान खरीदना पड़ता है। एक ही वस्तु के लिए फिर से पैसे खर्च करना इंसान को रुला देता है। इसलिए कहा जाने लगा कि सस्ता लेने वाला बार-बार रोता है जबकि महंगा, क्वालिटी समान लेने वाला सिर्फ एक बार रोता है। इस कहावत का एक राजनीतिक उदाहरण भी देश को कल देखने को मिला।

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सुप्रीम कोर्ट के हवाले से बार-बार “चौकीदार चोर है” कहना राहुल गांधी को महंगा पड़ गया। लिखित हलफनामे में राहुल गांधी द्वारा कोर्ट से माफी मांग ली गई। इसके पहले भी राहुल गांधी अपने बयान पर अदालत में ‘खेद’ जता चुके थे, लेकिन इस बार कोर्ट “माफी” से कम पर तैयार नहीं था। इसलिए एक ही मामले पर राहुल गांधी को दो बार कोर्ट में जाकर माफी मांगनी पड़ गई है। चुनाव के मौसम में जब नेता की एक छोटी सी गलती भी लाखों वोट काट देती है तो ऐसे दौर में राहुल गांधी का दो बार कोर्ट में माफी मांगने से मतदाताओं में बहुत गलत संदेश गया है। पता नही क्यों राहुल के वकीलों को लगा कि ‘खेद’ जताना ‘माफी’ मांगने से कम अपमानजनक है, लेकिन उन्हें इसका खामियाजा उठाना पड़ा, माफी भी मांगी और खेद भी जताया।

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इस प्रकरण से मुझे एक पुराना किस्सा याद आता है जो पहले भी एक बार साझा किया था। एक राजा ने अपराधी को सज़ा सुनाई थी की या तो सौ कोड़े खा लो या फिर सौ प्याज़ खा लो। लेकिन कैदी का दिमाग भी राहुल गांधी की तरह था। 10 कोड़े खाने के बाद कैदी को लगता कि  इससे प्याज़ खाना बेहतर है और फिर 10 प्याज़ खाने के बाद उसे लगता कि कोड़े ही ठीक है। ऐसा करते-करते आखिर उस कैदी ने 100 प्याज़ भी खा लिए और 100 कोड़े भी। इधर राहुल गांधी को लपेटने के लिए अब उनकी नागरिकता पर सवाल उठा दिए गए है। कहा जा रहा है की राहुल के पास इंग्लैंड की भी नागरिकता है।

आरोप ये भी है की उनका असली नाम ‘राउल विंसी’ है। इंग्लैंड की एक कंपनी के डाइरेक्टर के तौर पर राहुल गांधी ने अपनी नागरिकता ‘ब्रिटिश’ बताई है। गृह मंत्रालय ने इस सिलसिले में उनसे जवाब तलब कर लिया है। अब कांग्रेस इसे सरकार की साजिश बता रही है, लेकिन उससे कुछ हल नही होने वाला। कोर्ट में खेद जताने और माफी मांगने के बाद अब ये नया मुद्दा उनका इंतजार कर रहा है। हर बार की तरह इस मुद्दे से निपटने के लिए भी कांग्रेस के पास कोई नीति नही है। नागरिकता के आरोप फ़र्ज़ी होंगे तो भी कांग्रेस ये कभी सिद्ध नही कर पायेगी। क्योंकि बचाव की मुद्रा उन्हें पहले ही उन्हें कटघरे में खड़ा कर देती है। जनता की नज़रों में राहुल की छवि गैर-जिम्मेदार नेता की बन चुकी है। इधर प्रियंका वाड्रा भी बच्चों से नारे लगवाकर ही खुश हो रही है। समझ नही आता की इन गाली भरे नारों को बच्चों के मुह से सुनकर कांग्रेस के कितने वोट बढ़ जाएंगे?

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प्रियंका वाड्रा को अपने हावभाव काबू में रखना अभी आये नही है। राजनीति उनके लिए भी ‘पार्ट टाइम जॉब’ की तरह है। ये उनकी हरकतों से दिखाई दे रहा है। ऐसे समय मे जब मतदान अपने उत्तरार्द्ध में पहुँच चुका है तब भाई-बहन की ऐसी हरकतें समझ से परे है। कोर्ट-कचहरी के मामले नेताओं के लिए आम होतें है। ये बात भी पक्की है की इससे उनकी छवि पर कोई विशेष फर्क नही पड़ता। लेकिन एक ही मामले में बार-बार कोर्ट जाकर माफी मांगने से जरूर छवि पर असर पड़ता है। राहुल गांधी की ऐसी हरकतें उन्हें ‘बचकाना’ साबित कर रही है। लगता है कांग्रेस की आईटी सेल और लीगल टीम सिर्फ मुफ्त का वेतन ले रही है। राहुल की ऐसी हरकतें देखकर जनता यही सोच रही है की- “सस्ता रोये बार-बार, महंगा रोये एक बार।”

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