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Talented View : राहुल पर पड़ी लेज़र से विपक्ष में फिकर

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फिल्मों में आपने अक्सर देखा होगा की किसी बिल्डिंग या ऊंची जगह पर बैठे ‘स्नाइपर’ दूर किसी आदमी पर निशाना साधकर गोली से उनकी हत्या करतें हैं। अमूमन हत्याएं करवाने के लिए ‘प्रोफेशनल किलर’ की सहायता ली जाती है, जो पैसे लेकर लोगों को मारते हैं। आजकल ऐसी बंदूकें भी उपलब्ध हैं, जिन पर दूरबीन लगी होती है। इनके द्वारा कई किलोमीटर दूर तक सटीक निशाना लगाया जा सकता है। निशाने पर जो व्यक्ति होता है उसे इस हमले की कुछ भनक तक नहीं लगती और अचानक से गोली उसको लग जाती है। स्नाइपर हमले द्वारा हत्या करने वाले को पकड़ना बहुत मुश्किल होता है। क्यूंकि एक तो वो उस जगह होता ही नहीं जहां हमला हुआ, दूसरा ये उसे ढूंढना बेहद मुश्किल होता है।

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इसके अलावा उसे भागने का भी भरपूर मौका मिलता है। ये शार्प शूटर बेहद खतरनाक होतें हैं। जनता के बीच इन्हें पहचाना भी नही जा सकता। आज ये शार्प शूटर और स्नाइपर की चर्चा इसलिए करना पड़ रही है, क्योंकि अमेठी में राहुल गांधी के नामांकन के दौरान चेहरे पर लेज़र की रोशनी देखी गई। इस घटना को कांग्रेस ने राहुल गांधी पर हमले की साजिश बताते हुए ग्रह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में इंदिरा और राजीव गांधी की हत्या का हवाला देकर राहुल की जान को खतरा बताया गया था।

ये बातें मीडिया में आने के बाद गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस विषय में कांग्रेस की कोई चिट्टी नही मिली है। इसके बाद कांग्रेस ने भी गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखने की खबरों से इनकार कर दिया। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एसपीजी ने उस वीडियो की जांच की और पाया की राहुल के चेहरे पर लेज़र की रोशनी दरअसल कैमरे की रोशनी थी और जिस कैमरामैन की रोशनी राहुल के चेहरे पर पड़ रही थी वो रोशनी कांग्रेस के ही केमरामैन के कैमरे से निकल रही थी।

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यहां गौरतलब है कि, राहुल गांधी को एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की सुरक्षा मिली हुई है, जो कि देश की सर्वोच्च सुरक्षा है। एसपीजी की सुरक्षा इतनी मजबूत होती है की उसे भेद पाना किसी हमलावर या स्नाइपर के लिए आसान नहीं होती है। राहुल गांधी की सुरक्षा दुरुस्त है और उनकी सुरक्षा में कोई चूक नही हुई है। सोचने वाली बात ये भी है की राहुल गांधी की सुरक्षा में कोताही आखिर क्यों बरती जाएगी? सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही कम से कम इस मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते।

राहुल गांधी जब से कांग्रेस अध्यक्ष बने है तब से वो लगातार असफल होते आए हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कांग्रेस देश मे तेज़ी से सिमटी है। उनकी पार्टी उन्हें पूजनीय मानती है तो विरोधी भी उन्हें धरोहर से कम नहीं मानते। भाजपा देश में तेज़ी से फैली है तो उसकी एक बड़ी वजह राहुल गांधी भी हैं। ऐसे हालातों में उन्हें भला कोई क्यों मारना चाहेगा? उनसे किसी को खतरा ही नही है। बल्कि चुनावों के मौसम में किसी नेता की हत्या की साजिश की बात ही जनता में सहानुभूति पैदा करने के लिए काफी होती है। इसलिए ऐसी गलती सत्तासीन भी शायद ही कर पाएं।

राहुल गांधी एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें गद्दी जरूर विरासत में मिली है, लेकिन उन्हें अपनी काबिलियत अभी सिद्ध करना शेष है। सियासी तौर पर उनमें परिपक्वता आना भी अभी बाकी है। खुद कांग्रेस के सहयोगी भी उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे हालातों में राहुल गांधी को कांग्रेस के साथ ही भाजपा वाले भी अपने लिए ‘लकी’ मानते हैं। राहुल की सुरक्षा की जितनी फिक्र कांग्रेस वालों को है, उससे ज्यादा भाजपा वालों को है और एसपीजी की सुरक्षा किसी स्नाइपर के हमले को भी रोक पाने में सक्षम होती है। राहुल गांधी सुरक्षित रहें ये भाव भाजपा, कांग्रेस और सभी देशवासियों का है। इसलिए फिलहाल उनकी सुरक्षा को लेकर फिक्र करने की जरूरत नही है।

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