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Talented View : शस्त्र का वंदन शास्त्र से

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दशहरा पर्व है पराक्रम और विजय का। राम ने रावण का वध इसी दिन किया था। इसलिए इसे विजयोत्सव भी कहा जाता है। असत्य पर सत्य की जीत के उत्सव को मनाने के लिए इस दिन परंपरानुसार शस्त्र पूजन किया जाता है। क्योंकि राम ने रावण का वध धनुष-तीर अर्थात शस्त्र से ही किया था। तब से दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्र का पूजन करने की परम्परा चली आ रही है। लेकिन कालचक्र के प्रवाह में षड्यंत्रपूर्वक देश के बहुसंख्यक वर्ग को शस्त्रों से दूर करने की अनेक कोशिशें की गयी।

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इस मुद्दें पर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे लेकिन फिलहाल मामला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा रफाल की पूजा करने से जुड़ा है। दशहरे के मौके पर पहले रफाल विमान की डिलीवरी लेने फ्रांस पहुंचे रक्षामंत्री ने रफाल की पूजा-अर्चना की। राजनाथ सिंग ने रफाल पर ॐ बनाया, कलेवा बांधा और पुष्प अर्पित कर पूजा की। रफाल के पहियों के नीचे निम्बू भी रखे गए थे। किसी नए वाहन की इस तरह पूजा करना भारत मे आम है। भारत में कोई भी इलेक्ट्रॉनिक या इलेक्ट्रिकल उपकरण खरीदने के बाद उपयोग से पहले इस तरह पूजा किया जाना बिल्कुल सामान्य है।

दशहरे के दिन ऐसा विमान लेना जिसकी भारत की सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व जरूरत है उसकी पूजा करना भी एक सामान्य घटना थी। लेकिन मुद्दों की कमी से जूझ रहे विपक्ष ने रफाल की पूजा पर भी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी। इस पूजन का नेताओं द्वारा मज़ाक उड़ाने वाली कई प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखी गयी। नेताओं के अलावा कुछ लोगों ने भी इसे देश ने इस पूजा को देश की धर्म निरपेक्षता के खिलाफ बताया। आचार्य प्रमोद जैसे तथाकथित हिन्दू संत और कांग्रेस नेता ने भी इस पूजा पर ऐतराज जताया।

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समझ नही आता कि दशहरे के दिन रफाल के पूजन (Rafale) पर आपत्ति आखिर क्यों आ रही है? धर्म निरपेक्षता के नाम पर क्या हम अपनी परंपराएं छोड़ दें? देश का अत्याधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इसरो भी रॉकेट और सेटेलाइट प्रत्यारोपित करने से पूर्व उनकी बाकायदा पूजा करता है, कोई भी नया अधिकारी पदोन्नति लेकर दफ्तर पहुंचता है तो उससे पहले हवन, पूजन करता है। मकान हो चाहे दुकान उसकी शुरुआत नारियल फोड़कर ही कि जाती है। ये सब परम्पराएं हमारी धरोहर है। धर्म निरपेक्षता के नाम पर इन रीतियों पर आघात क्यों किया जा रहा है?

हर शुभ अवसर पर गणेश वंदना, माँ सरस्वती के आगे दीप प्रज्ज्वलन, नारीयल फोड़ना, पुष्प अर्पित करना, तिलक लगाना ये कोई आज की रीत नही है। ये एक सनातनी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। किसी धर्म से जोड़कर इसका विरोध करना सिर्फ बौद्धिक दिवालियापन दर्शाता है। विपक्ष इन मुद्दों पर राजनीति करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। इन्हें ये समझ ही नही है कि किन मुद्दों को लपकना है और किन पर मुह बंद रखना है?

दशहरे के अवसर पर अपने घरों में वाहनों, शस्त्रों की पूजा करते जनसामान्य का राजनाथ सिंग को रफाल पूजन करते देख अपनापन प्रतीत हो रहा था। लेकिन विपक्ष द्वारा इसका मज़ाक उड़ाना जनता को बिल्कुल रास नही आ रहा है। बल्कि भारतीय परम्पराओं का मज़ाक उड़ाने पर जनता गुस्से में है। भारत मे रहकर भारत की ही परंपराओं का इस तरह अपमान करना विपक्षी नेताओं को भारी पड़ सकता है। हरियाणा, महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे विपक्ष के हिसाब से नही आतें तो उन्हें समझना होगा कि हर बार ईवीएम हैक नही होती, कुछ गलतियां खुद की भी होती है।

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        – सचिन पौराणिक

 

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