Talented View : सच्चे मित्र राष्ट्रों की अब होगी पहचान

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मानस के अरण्य कांड में एक चौपाई है – “धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी, आपदकाल परखिये चारि” अर्थात यूं सामान्य जीवन में किसी की असली परीक्षा नहीं ली जा सकती। सच्ची परीक्षा तभी हो सकती है, जब परिस्थितियां प्रतिकूल हो। ऐसे ही धीरज, धर्म, दोस्त और पत्नी की असली परीक्षा कठिन दौर में ही की जा सकती है। विपरीत हालातों में जो साथ डटा रहे वही रिश्ता सच्चा है बाकी सुख के समय चाहने वालों की कभी कमी नहीं रहती है।

मज़ाक में अंग्रेजी में कहा जाता है कि “सक्सेस इज़ अ रिलेटिव टर्म बिकॉज़ इट ब्रिंग सो मैनी रिलेटिव्स विद इट” कहने का कुल अभिप्राय इतना ही है कि बुरे वक्त में जो साथ दे वही रिश्ता सच्चा है बाकी सब मोहमाया है। 2014 के बाद भारत की छवि अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से उभरी, यह बात सच है। विदेशों में हमारा मान बढ़ा, सम्मान बढ़ा, हमारे पासपोर्ट की इज्ज़त में इजाफा हुआ, यह भी सच है। मजबूत नेतृत्व के कारण हर देश हमसे संबंध सुधारने को इच्छुक दिखाई दिया, लेकिन अब जब आतंकवाद के खिलाफ भारत आखिरी जंग की तैयारी कर रहा है तो इनमें से कुछ ही देश खुलकर हमारे साथ खड़े हैं।

पाकिस्तान दौरे पर आए सऊदी प्रिंस सलमान ने पाकिस्तान के साथ 20 अरब डॉलर के आठ समझौते किए। इन समझौतों के बाद पाकिस्तान की मृतप्राय अर्थव्यवस्था पुनर्जीवित हो उठी है। दीर्घकालिक तौर पर भले ही इन समझौतों से ज्यादा लाभ पाक को न मिले, लेकिन वर्तमान हालातों में यह निवेश उसके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। दाने-दाने और पाई-पाई को मोहताज़ हो चुके पाक को इस समय विदेशी मुद्रा की सख्त आवश्यकता थी, जो एक हद तक पूरी होती भी दिखाई दे रही है। सऊदी क्राउन प्रिंस का यह पाकिस्तान दौरा ऐसे समय हुआ है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है।

गौरतलब है कि प्रिंस सलमान के संबंध भारत से भी बीते सालों में काफ़ी बेहतर हुए हैं। पाकिस्तान यात्रा के बाद प्रिंस भारत आने वाले हैं और उम्मीद है कि भारत से वे पाक से भी ज्यादा बड़ी डील करने वाले हैं, लेकिन सवाल यह है कि आतंक (पाकिस्तान) के खिलाफ हमारी निर्णायक जंग में कौन हमारे साथ है?

अमरीका, रूस, इज़राइल, फ्रांस, सऊदी या फिर दुनिया का कोई भी देश सिर्फ खुद के फायदों को देखकर किसी के साथ होता है, यह एक सच्चाई है। जिनसे भारत का व्यापार अधिक है या जिनसे हम भारी मात्रा में हथियार खरीदते है सिर्फ वही देश हमारा साथ देंगे, लेकिन वह भी खुलकर नहीं। भारत को खुद के दम पर इस लड़ाई को न सिर्फ लड़ना है बल्कि जीतना भी है। हमारी थोड़ी सी कमजोरी चीन जैसे छद्मशत्रु को हम पर भारी पड़ने की छूट दे सकती है। यह जंग हम कैसे जीतेंगे, इस पर सवालिया निशान लगे हुए हैं।

कल तीन आतंकियों को मारने में हमारे 5 जवान शहीद हो गए और इसके बाद भी हम इसे बदले की पहली किश्त बताने में फूले नहीं समा रहे। 3 के बदले 5, ये किस तरह का बदला है, यह समझ नहीं आ रहा है। एक के बदले 10 सिर लाने की बात करने वालों को इस तरफ ध्यान देने की ज़रूरत है। 44 जवानों की शहादत पर देश गुस्से की आग में जल रहा है और हम पांच जवान फिर गंवाकर इसे बदला बता रहे हैं? पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जंग हम ऐसे जीतेंगे भला? हमारी मीडिया भी सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाने के बजाय बेवजह की बातों को तूल देने में लगी है।

कई चैनल सुबह-शाम ‘मोदी चालीसा’ गाने को ही राष्ट्रभक्ति मान बैठे हैं। पाकिस्तान को माकूल जवाब दिए बिना हम कैसे किसी छोटी-मोटी कार्रवाई को बदला मान सकते हैं ? 44 के बदले कम से कम 440 आतंकी या पाकिस्तानी जब तक नहीं मरेंगे, हम इस मुद्दे को छोड़ेंगे नहीं। पाकिस्तान (आतंक) के खिलाफ इस जंग में अब जीत से कम कुछ मंज़ूर नहीं है। ये वक्त थोड़ा नाज़ुक ज़रूर है, लेकिन कौन मुल्क हमारे साथ है, कौन हमारा सच्चा मित्र है, यह अब हमें पता चल ही जाएगा।

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-सचिन पौराणिक

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