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Talented View : दिग्गी के अत्याचार-प्रज्ञा का प्रचार..

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कांग्रेस की अगुवाई में चल रही यूपीए-2 की सरकार ने एक बहुत घिनौनी साजिश रची थी। मालेगांव, मक्का मस्जिद विस्फोट के बहाने हिंदुओं पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाने का कुकर्म कांग्रेस सरकार द्वारा रचा गया था। इस साजिश को अंजाम देने के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया। हिन्दू साध्वी और संतों के नाम बेवजह इस केस में जोड़े गए और उनकी गिरफ्तारियां की गई। साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित सहित कई बेगुनाह इस साजिश का शिकार बने। जेल में इन लोगों को अनंत यातनाएं सहनी पड़ी। पुलिस के अलावा एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) और एटीएस (एन्टी टेररिज्म स्क्वाड) के कई अधिकारियों ने भी सत्ता के इशारे पर इन्हें प्रताड़ित किया। “हिन्दू आतंकवाद” जैसे काल्पनिक, वीभत्स शब्द गढ़कर हिंदुओं पर आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने का झूठा इल्ज़ाम लगाने की पूरी कोशिश की गई। संघ के नेताओं को फंसाने के लिए साध्वी प्रज्ञा पर अमानवीय जुल्म ढाए गए, लेकिन प्रज्ञा ने सब जुल्म सहकर भी किसी का नाम नहीं लिया। मामला कोर्ट में कछुए की चाल से चलता रहा और आखिरकार कोर्ट ने भी इन लोगों को जमानत दे दी।

Talented View : आज देश में “गैर भाजपावाद” की बुनियाद खड़ी होने लगी

Talented View : नेताओं का पक्का इलाज़ सिर्फ जनता के पास

‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसा घृणित शब्द रचने वालों में तत्कालीन सरकार के तीन बड़े नामों का जिक्र आता है। चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे और दिग्विजयसिंह। इन लोगों ने हिन्दूओं और भगवा को कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये लोग अपने इरादों में कामयाब हो भी जाते यदि साध्वी प्रज्ञा यातनाओं से टूटकर वह बयान दे देती, जो ये लोग कहलाना चाहते थे, लेकिन साध्वी ने सब जुल्म सहकर भी हिंदुत्व के माथे पर यह कलंक लगने से बचा लिया। कहते हैं न कि दुनिया गोल है। जैसा सलूक हम दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही हमारे साथ भी होता है। भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने दिग्विजयसिंह को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन भाजपा ने कांग्रेस के नहले पर दहला फेंकते हुए साध्वी प्रज्ञा को ही दिग्गी के खिलाफ उम्मीदवार बना दिया है। साध्वी ने भी अपने जख्मों को याद करते हुए कहा कि दिग्गी उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। दिग्गी राजा को वे आसानी से हरा देंगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस साध्वी को मजबूत दावेदार नहीं बल्कि दावेदार भी नहीं समझती, लेकिन अंदरखाने कांग्रेस में भी यही चर्चा है कि दिग्गी राजा की पुरानी करतूतें अब उनके गले की हड्डी बनने वाली है।  एक हिन्दू साध्वी के साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ, उसे हिन्दू समाज भूला नहीं है। दिग्विजयसिंह का पाकिस्तान प्रेम भी जनता को याद है। 26/11 हमलों के पीछे संघ का हाथ बताना और आतंकवादियों के आगे उनका ‘जी’ लगाने वाले बयान भी ताज़ा ही है। दिग्गी राजा के प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते प्रदेश का पिछड़ापन भी मानो कल की ही बात है।

Talented View : जनता है कि समझने को तैयार ही नहीं है

भोपाल भाजपा की पारंपरिक सीट है। यहां से भाजपा लगातार जीतती आई है। ऐसे में दिग्गी राजा का भोपाल हारना लगभग तय माना जा रहा है। साध्वी प्रज्ञा के प्रति जनता की सहानुभूति भी है और देश में मोदी सरकार दोबारा बनाने की जिद भी। ऐसे में भोपाल की जनता का रुख स्पष्ट तौर पर देश के साथ रहने वाला है। साध्वी के मैदान में कूदने के बाद प्रश्न अब सिर्फ इतना बचा है कि दिग्गी राजा कितने लाख वोटों से हारने वाले हैं ? दुनिया गोल है। दिग्गी ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस प्रज्ञा को उन्होंने जेल में डलवाया, वे ही उनके सामने चुनाव लड़ेंगी। साध्वी के साथ भोपाल की जनता की संवेदनाएं हैं तो दिग्गी के खिलाफ गुस्सा। चुनाव जीतना तो दूर दिग्गी यदि भोपाल से अपनी जमानत बचा पाते हैं तो उनके लिए यह बड़ी बात होगी।

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