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Talented View :  पढ़े लिखे गंवार

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देश में बैंकों और फाइनेंस कंपनियों की कोई कमी नही है। बात पैसे जमा करने, एफडी बनवाने या फिर लोन लेने की हो तो कई विकल्प ग्राहक के सामने तैयार रहतें है। इसके अलावा निवेश के नज़रिए से देखा जाए तो सरकारी बैंक, निजी बैंक, म्युचुअल फंड और एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी) कई बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प ग्राहकों को उपलब्ध करवाती है। लेकिन आज के दौर में ग्राहक राजा होता है। और ऐसा कोई नियम-कानून नही है कि राजा ‘मूर्ख’ नही हो सकता।

 Talented View : चित भी मेरी – पट भी मेरी

दुःख के साथ कहना पड़ता है की ज्यादातर जनता पैसे निवेश करने के मामले में अनपढ़ जैसा ही व्यवहार करती है। सुरक्षित निवेश के हज़ार विकल्प होने के बाद भी ग्राहक को चिट फंड, मनी सर्क्युलेशन स्किम और कॉपरेटिव बैंकों में ही पैसा लगाना पसंद आता है। इसे लालच कहें या जानकारी का अभाव या फिर मूर्खता, लेकिन अपनी गाढ़ी कमाई लुटवाने में हमारा कोई तोड़ नही है। हम छाँट-छाँटकर ऐसी फ़र्ज़ी कंपनियां ढूंढ लेतें है जो रिटर्न के आसमानी वादें करती है और फिर मार्केट से पैसा बटोरकर गायब हो जाती है।

Talented View : तुम जियो हज़ारो साल

इसके बाद हमारा रोना शुरू होता है। हम सरकार को दोष देतें है, व्यवस्था को दोष देतें है लेकिन हमारी मूर्खता हमें कभी दिखाई नही देती। रोज़ ही देश मे कहीं कोई फ़र्ज़ी कंपनी पकड़ाती है, निवेशकों के रोने की तस्वीरे भी सामने आती है लेकिन हम समझने को तैयार नही है। कोई आकर स्किम समझाता है, सब्जबाग दिखलाता है, चंद दिनों में करोड़पति बनाने का वायदा करता है और हम  फिर झांसे में आ जाते है।

मुझे समझ नही आता कि सरकारी और निजी क्षेत्र कि शानदार बैंकों को छोड़कर आखिर क्यों लौग कॉपरेटिव बैंकों में पैसा जमा करतें है? थोड़े सी ज्यादा ब्याज दर के चलते हम अपनी अक्ल क्यों गिरवी रख आतें है? हालिया पीएमसी बैंक (पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक) घोटाला (PMC Bank Case) सामने आया है। इस बैंक के खाताधारक हर जगह प्रदर्शन कर रहे है। घोटाले में बैंक का नाम आने के बाद से निवेशकों के पैसे निकालने पर रोक लगाई हुई है। ईसलिये अब निवेशक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है।

आज इसी बैंक के एक खाताधारक संजय गुलाटी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। गुलाटी जेट में काम करते थे। लेकिन जेट के बंद होने के बाद से वो बेरोज़गार थे। उनके करीब 90 लाख रुपये बैंक में जमा थे और बताया जा रहा है कि इसी चिंता में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। ये घटना दुखद है। लेकिन सवाल वही है। बैंकों की रेग्युलेटरी बॉडी केंद्र या राज्य सरकारें नही होती। आरबीआई इन बैंकों पर कंट्रोल रखता है। लेकिन विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ किये जा रहे है।

Talented View :  हत्या से सत्ता का दांव

कॉपरेटिव बैंकों में घोटाले (PMC Bank Case) और निवेशकों का पैसा डूबने की खबरे कोई नई नही है। नई बात ये है कि इतना सब देखने-सुनने के बाद भी हमारी आंखे नही खुलती है। हम इसके बाद भी कॉपरेटिव बैंकों में पैसा रखना बंद नही करेंगे और रोते-चिल्लाते रहेंगे। आपका पैसा सही जगह निवेश करना आपकी जिम्मेदारी है सरकार की नही। आप मूर्खता करने से बाज़ नही आएंगे तो कोई सरकार इसमें क्या कर लेगी? लालच और मूर्खता आप करें और दोष सरकार पर मड़े, ये सही नही है। हमारी हरकतें नही सुधरती तो हमारी स्थिति “आंख के अंधे नाम नयनसुख” वाली ही कहलाएगी।

    – सचिन पौराणिक

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