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 Talented View : चित भी मेरी – पट भी मेरी

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पुरानी कहावत है- “सौ सुनार की, एक लोहार की” कल प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस को खुली चुनौती दे डाली। मोदी ने कहा कि धारा 370 और तीन तलाक पर सरकार के फैसले का विरोध करने वालों में अगर हिम्मत है तो वे अपना रुख साफ करें। उनके शब्दो में  “कान खोलकर हमारे विरोधी सुन लें, अगर आपमें हिम्मत है तो इस चुनाव में और आने वाले चुनावों में भी घोषणा-पत्र में ऐलान करें कि हम जीते तो धारा 370 वापस लाएंगे।”

Talented View : तुम जियो हज़ारो साल

यही बात उन्होंने तीन तलाक को लेकर भी कही। विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने ये बातें कही। गौरतलब है कि कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद से कांग्रेस इसका विरोध कर रही थी। लेकिन कांग्रेस के ही एक धड़े ने इस विरोध को गलत बताते हुए सरकार का साथ देने की बात कही थी। देश की आम जनता भी धारा 370 हटाने के ही पक्ष में थी। लेकिन तुष्टिकरण अथवा अन्य कारणों से कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपना विरोध जारी रखा।

Talented View :  हत्या से सत्ता का दांव

तीन तलाक के मुद्दे पर भी कांग्रेस इसी असमंजस में नज़र आयी। राममंदिर के मामले में भी कांग्रेस पसोपेश में है। हर मुद्दे पर कांग्रेस के लिए सांप-छछूंदर वाली स्थिति बन जाती है। न वो खुलकर विरोध कर पातें है न ही खुलकर समर्थन। न उनसे निगलते बनता है न उगलते। उनकी इस लाचारी भरी परिस्थिति का भरपूर फायदा भाजपा उठाना सीख गई है। आज कांग्रेस के पास न नेतृत्व है, न सोच है और न ही कोई विचारधारा। समुंदर में खाली बह रही नाव की तरह कांग्रेस डांवाडोल और दिशाहीन हो चुकी है।

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र से धारा 370 वापस लगाने की चुनौती देकर कांग्रेस के कमजोर अस्थिपंजर पर एक जोरदार आघात किया है। कांग्रेस की मुश्किल ये है कि वो इस चुनौती को हरगिज़ स्वीकार नही कर सकती। अगर कांग्रेस ये कहे कि हम धारा 370 पुनर्स्थापित करने को घोषणापत्र में शामिल करेंगे तो वो खत्म हो जाएंगे और अगर वो घोषणापत्र में शामिल नही करना चाहते तो विरोध किस बात का हो रहा है? घड़ियाली आंसू फिर क्यों बहाये जा रहे है?

पहले भी कई बार ये हम कह चुके हैं कि कांग्रेस ये समझ ही नही पा रही है कि किन मुद्दों को उसे उठाना है और किस पर चुप रहना है? जबकि भाजपा वाले बखूबी समझतें है कि उन्हें कब क्या बोलना है, कहाँ चुप रहना है? जैसे बंगाल में हिंदुओं की हत्या पर भाजपा खुलकर विरोध करती है जबकि यूपी में हो रही वारदातों पर शातिराना ढंग से चुप्पी साध लेती है। जबकि कांग्रेस वाले रफाल की पूजा जैसे बेवजह के मुद्दे उठा लेतें है और अपने नेताओं के अपमान पर विरोध तक नही जता पाते।

Talented View : जीत की रणनीति

कल ही हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने सोनिया गांधी की तुलना मरी हुई चुहिया से कर दी, लेकिन कांग्रेस वाले खामोश है। लगता है मानो आज की कांग्रेस जैसे विरोध करना ही भुल चुकी है। कहने को हरियाणा,महाराष्ट्र में कांग्रेस चुनाव लड़ रही है लेकिन कार्यकर्ताओं में उत्साह नदारद है। इधर भाजपा वाले प्रधानमंत्री की छवि और राष्ट्रवाद के माहौल में अपनी विजय तय मान चुकें है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा किये गए जोरदार प्रहार से कांग्रेस खेमा एक बार फिर चित हो गया है। इसके साथ ही दोनों राज्यो में सत्ता वापसी की कांग्रेसी उम्मीदें भी लगता है ‘चित’ हो गयी है।

 – सचिन पौराणिक

 

 

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