Talented View : स्वार्थी पीएम, खुदगर्ज़ सेना

0

पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसकी सरकार और सेना दोनो का ही कोई भरोसा नही है। ऐसा कहते हैं कि पाकिस्तान पर तीन ताकतें प्रत्यक्ष और दों ताकतें अप्रत्यक्ष तौर पर राज़ करती है। सेना, आईएसआई और सरकार प्रत्यक्ष तो आतंकवादी और अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को चलाते है। इतने सत्ता केंद्र होने की वजह से ही हमारी पाक के साथ किसी चर्चा का कोई सार नही निकल पाता। क्योंकि वहां की सरकार की हालत इतनी बेचारगी भरी होती है कि उन्हें अपनी सलामती के लिए भी सेना के रहमोकरम पर निर्भर रहना पड़ता है।

Talented View : विश्व फोटोग्राफी दिवस के मायने

पाकिस्तान में सेना चाहे जब चुनी हुई सरकार को बाहर का रास्ता दिखाकर सैन्य शासन लागू कर सकती है। 1958, 1969, 1977 और 1999 के साल पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट के गवाह रहे हैं। अपने विरोधी नवाज़ शरीफ़ का तख्तापलट जनरल परवेज़ मुशर्रफ द्वारा होते देख इमरान खान देख चुके हैं। अब यही डर उन्हें खुद के लिए भी सताने लगा हैं। सत्ता संभाले एक साल के समय मे ही इमरान मोदी की कुटिनीतिक चालों के सामने कई बार शिकस्त खा चुके हैं।

Talented View : भारत की ललकार, परमाणु युद्ध को तैयार

बालाकोट एयर स्ट्राइक और अब कश्मीर में 370 हटने का दुष्प्रभाव भी पाकिस्तान की राजनीति में दिखना शूरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेइज़्ज़ती झेल रहे इमरान खान अब घरेलू मोर्चे पर भी पस्त हो चले हैं। बढ़ती महंगाई और भुखमरी से त्रस्त पाक जनता अब इमरान के हवाई वादों को सच समझ चुकी है। जनता में अपने खिलाफ बढ़ते गुस्से को लेकर इमरान चिंतित है। वो समझ चुके है कि हालात उनके ‘अनुकूल’ नही है।

ऐसे हालातों में खुद को सुरक्षित करने का इमरान को यही रास्ता दिखाई दिया की सेनाध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष बढ़ा दिया जाए, जिससे उनकी सरकार भी अगले 3 साल के लिए सुरक्षित हो जाये। इमरान ने यही कदम उठाते हुए पाक सेनाध्यक्ष जावेद कमर बाजवा का कार्यकाल 3 साल के लिये आगे बढ़ा दिया हैं। विगत कुछ दिनों से इमरान खान काफी बौखलाए नज़र आ रहे हैं। पाकिस्तान में कोई उनकी सुन नही रहा, चीन को छोड़ विश्व का कोई देश उनका साथ नही दे रहा और ऐसे में तख्तापलट हो जाये तो इमरान के लिए ‘मुफलिसी मे आटा गीला’ वाली बन जाती।

बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का आधार क्षेत्रीय सुरक्षा को बताया गया है। लेकिन ये असल में इमरान और बाज़वा का साझा लिया फैसला है, जिसकी बुनियाद निजी स्वार्थ पर टिकी है। बाज़वा सेनाध्यक्ष बने रहेंगे तो इमरान से अपनी मनमर्जी आगे भी करवाते रहेंगे। इधर इमरान को भी तख्तापलट का डर नही सतायेगा। मुश्किल दौर से गुज़र रहे देश के दो सबसे बड़े पदों पर बैठे व्यक्ति अपने निजी हित से ऊपर सोच ही नही पा रहे हैं। धारा 370 के मुद्दें पर भड़की पाकिस्तानी जनता से निपटने के लिए ये दांव इमरान ने खेला है।

Talented View :   मोदी सर्वमान्य वैश्विक नेता

पाकिस्तान का आने वाले सालों में क्या होगा ये किसी को नही पता, वहां की जनता का क्या होगा ये भी पता नही, लेकिन इमरान और बाज़वा ने जरूर एक दूसरे की राहें आसान करने की कोशिश की है। धारा 370 और कश्मीर की उथलपुथल के बीच बाज़वा और इमरान ने बड़ा खेल खेल लिया है। पाक जनता चाहे त्राहिमाम करती रहे, लेकिन धारा 370 इमरान और बाज़वा के लिये तो खुशखबर लेकर आयी है। इन दोनों ने अपने कार्यकाल को आगामी सालो के लिए सुरक्षित कर लिया है। इमरान खान और बाज़वा पाकिस्तान का कुछ भला चाहे न कर पाएं लेकिन खुद का भला करने में दोनों ने मास्टरी हासिल कर ली है।

Share.