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Talented View : बेशर्मी का दूसरा नाम पाकिस्तान

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यूएनजीए अर्थात ‘यूनाइटेड नेशंस जनरल असेम्बली’ में भारत के प्रधानमंत्री का बहुप्रतीक्षित उद्बोधन सम्पन्न हुआ। उम्मीद के मुताबिक और संयुक्त राष्ट्र की परंपरा के अनुसार भारत ने इस मंच से शांति, अहिंसा और वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश सुनाया। अपने सारगर्भित और तथ्यपरक भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सोच, भारत की संस्कृति और भारत के इतिहास का दर्शन कराने के साथ ही आतंकवाद पर आक्रोश भी व्यक्त किया। तमिल के संत से लेकर भगवान बुद्ध तक का जिक्र मोदीजी ने किया।

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“गागर में सागर” समेटे हुए तय सीमा में एक बेहतरीन और उम्दा भाषण संयुक्त राष्ट्र में हमने दर्ज किया। लेकिन इसके बाद हमारे प्रतिद्वंद्वी देश पाकिस्तान का भाषण का सभी को इंतज़ार था। इंतज़ार ये जानने के लिए नही था कि इमरान खान ‘नियाज़ी’ क्या कहने वाले है, क्योंकि ये तो हर कोई जानता था कि कश्मीर के अलावा कोई राग अलापना पाक को आता नही, इंतज़ार सिर्फ ये जानने के लिए था कि इमरान संयुक्त राष्ट्र के स्थापित मानकों से कितना नीचे गिरकर अपनी बात रखतें है?

इमरान नियाज़ी ने जहर उगलने के साथ अपना भाषण शुरू किया और आखिर तक वो यही करते रहे। भारत के खिलाफ ‘विषवमन’ में उन्हें समयसीमा की फिक्र भी नही रही। 15 मिनट के तय समय की जगह इमरान ने लगभग 50 मिनट तक भाषण जारी रखा। उसमे भी करीब 26मिनट वो कश्मीर पर ही रोना रोते रहे। इमरान ने जो कहा उसे दरअसल ‘भाषण’ कहना भी गलत होगा क्योंकि ये सिर्फ हताशा, क्रोध, ग्लानि, घृणा और मजहब की बुनियाद पर दी गयी मजहबी तक़रीर ज्यादा दिखाई दे रही थी।

पाकिस्तान की अंदरूनी समस्याओं और वैश्विक समस्याओं के समाधान की चर्चा की जगह इमरान ने अपने भाषण को भारत पर ही केंद्रित किये रखा। इमरान के हर शब्द में दुनिया से अलग-थलग किये जाने का दर्द साफ झलक रहा था। भारत ने जहां अपने उद्बोधन में पाकिस्तान का जिक्र तक नही किया वहीं पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने का कोई मौका नही छोड़ा। युद्ध की स्थिति में अपनी संभावित पराजय की आशंका से घबराए इमरान ने संयुक्त राष्ट्र में भी वही परमाणु बम वाली गीदड़ भभकी दुनिया को सुनाई।

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भारत के उद्बोधन में जहां प्रेम, सद्भाव और सामंजस्यता की बातें प्रमुख थी वहीं पाकिस्तान के भाषण में युद्ध, जिहाद, परमाणु बम, नफरत और मजहब की बातें सुनाई दी। एक पल को भी लगा नही की इमरान संयुक्त राष्ट्र में बोल रहे है। ऐसा लगा मानो वो पेशावर में किसी चुनावी सभा को सम्बोधित करने आये है। दुनिया के सामने खुद अपनी पोल इमरान ने कल यूएनजीए में खोलकर रख दी। अपने प्रधानमंत्री का गली-नुक्कड़ छाप संबोधन सुनकर पाकिस्तान के बुद्धिजीवी भी शर्म से पानी-पानी हो रहे है।

किसी मुल्क का प्रधानमंत्री खुद जब जाहिलों और आतंकवादियों की भाषा बोलने लगे तो समझना चाहिए कि उस मुल्क का कोई भला नही कर सकता। इमरान नियाज़ी ने भी अपने सड़कछाप भाषण द्वारा ये सिद्ध कर दिया है कि उनके प्रधानमंत्री रहते पाक की दुर्गति अवश्यम्भावी है। उनके हर आरोप का भारत ने ‘राइट तो रिप्लाई’ के तहत करारा जवाब देकर भी ये सिद्ध कर दिया कि झूठ के सर-पैर नही होते। संयुक्त राष्ट्र से बेगैरत होकर वतन लौटने वाले इमरान के लिए बस यही कहा जा सकता है कि-

“बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान मग़र फिर भी कम निकले…!”

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– सचिन पौराणिक

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