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Talented View : भ्रष्टाचार पर मोदी का वार

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प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे कई वीडियो है जिनमे वो कहते दिखाई दे रहे है कि देश का पैसा खाने वालों से पाई-पाई निकलवाई जाएगी। एक भी भ्रष्टाचारी बचेगा नही। एक वीडियो में वो तो वो साफ कहते दिखाई दे रहे है कि 2019 तक बड़े भ्रष्टाचारियो को जेल के दरवाज़े तक ले आया हूँ। 2019 के बाद इन्हें अंदर भी कर दिया जायेगा। लगता है चिदम्बरम की गिरफ्तारी के साथ इस लंबी कड़ी की शुरुवात हो चुकी है।

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भ्रष्टाचारियों पर प्रहार हो ये जनभावना है। और बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से जनता को संतोष ही मिलता है। लेकिन काँग्रेस की हालत पर तरस आता है जब वो कहतें है कि ये लोकतंत्र की हत्या है। उनसे पूछना चाहिये कि वर्षो से चल रही अदालती कार्यवाही के साये में एक भ्रष्टाचारी की गिरफ्तारी लोकतंत्र की हत्या कैसे हो गयी? क्या अदालतें खुद लोकतंत्र की हत्या कर रही है? या कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार करना ही लोकतंत्र के खिलाफ है? चिदम्बरम पाकसाफ होते तो इतनी साधारण सी गिरफ्तारी में इतनी नौटंकी क्यों करते?

खुद के सर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी, तो संविधान, कोर्ट, कानून सब खराब हो गए और लोकतंत्र की हत्या हो गयी? आखिर क्यों? तब लोकतंत्र की हत्या क्यों नही हुई जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में अमित शाह को गुजरात से तड़ीपार कर दिया गया? आज भी कांग्रेस के नेता इस बात पर शाह का मज़ाक बनातें है। तब भी लोकतंत्र की हत्या क्यों नही हुई जब एक राज्य के मुख्यमंत्री को घंटो एजेंसियों ने बैठाकर पूछताछ की और एसआईटी जांच के नाम पर प्रताड़ित किया? समय का पहिया थोड़ा सा क्या घुमा की कानून के अनुसार की जा रही कार्यवाही भी लोकतंत्र की हत्या मानी जाने लगी?

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24 घंटे से गायब अचानक चिदंबरम का कांग्रेस दफ्तर पहुंचकर प्रेस कान्फ्रेंस करना और कहना कि जांच में सहयोग के लिए तैयार हूं। और इसके बाद घर पहुंचकर सीबीआई, ईडी अधिकारियों के लिए दरवाजे ही न खोलना किस तरह का सहयोग है? चिदंबरम अगर निर्दोष है तो एजेंसियों से इतना डर क्यों रहे है? अमित शाह, नरेन्द्र मोदी को इन्ही एजेंसियों से घंटो पूछताछ करवाने वाले चिदम्बरम खुद इनसे क्यों भागे-भागे फिर रहे है? या उन्हें समझ आ गया है कि जो दांव उन्होंने कभी विरोधियों के खिलाफ चले थे वही बाज़ी आज उनके लिए बिछाई जा चुकी है?

वक़्त कितना बेरहम होता है इससे ही जान लीजिए कि चिदंबरम के गृहमंत्री रहते यही अधिकारी उन्हें सलाम करते थे जो आज उन्हें गिरफ्तार करने पहुंचे है। जिस अमित शाह को ‘लोकल नेता’ समझकर चिदम्बरम उन्हें हरसंभव यातना देते थे अब वही लोकल नेता देश का गृहमंत्री है। जो सोनिया, राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को कुछ नही समझते थे आज उसी के प्रधानमंत्री रहते माँ-बेटे दोनों जमानत पर बाहर है। ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय’ की तर्ज़ पर सोचा जाए तो आने वाले दिन कांग्रेस नेताओं के लिए बेहद कष्टप्रद होने वाले है।

कांग्रेस को समझना चाहिये कि जनता में इनके नेताओ की गिरफ्तारी को लेकर कोई रोष नही है। जनता बल्कि खुश है कि चलो भ्रष्टाचारी जेल तो जा रहे है। जिस दिन राहुल गांधी या रॉबर्ट वाड्रा जेल जाएंगे जनता उस दिन भी खुश ही होगी। जनता को भ्रष्टाचारियो से कोई सहानुभूति नही है चाहे वो किसी भी दल के हो। जनता तो चाहती है कि बड़े लेवल के बाद हर छोटे-मोटे भ्रष्ट अधिकारीयों पर भी कार्यवाही हो। ठेकेदारों से कमीशन लेने वाले हर अधिकारी, कर्मचारी को नापा जाना चाहिये।

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जितने भ्रष्ट नेता, अधिकारी, मंत्री, कर्मचारी जेल भेजे जाएंगे जनता का प्रधानमंत्री के शब्दों पर भरोसा उतना ही बढ़ता जायेगा। ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ महज़ जुमला नही बल्कि धरातल पर चरितार्थ होने वाली ठोस युक्ति है। चिदम्बरम को जेल में सोचना चाहिये कि क्या वो वाकई यहां पहुंचने के हकदार नही है? उनके कर्म (कांड) ही क्या उन्हें यहां तक नही लाये है? उन्हें आईना देखकर सोचना चाहिये कि जो चालें वो विरोधियों के लिए चलते थे उनमें क्या वो खुद ही नही फंस गए है? वैसे उन्हें अपनी गलतियों का इल्म शायद ही हो क्योंकि

“चेहरा मन का ना दिखे तो कह दो आईना खराब हैं ,
अपनी कमियां छुपाने का सबका अपना हिसाब हैं..!”

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