Talented View : जैसी करनी, वैसी भरनी

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शास्त्र कहतें है कि कर्म लगातार गति करतें है। और एक दिन घूम-फिरकर वो हमें ही मिल जातें है। मतलब हमने किसी की मदद की, भला किया, अच्छा व्यवहार किया तो वैसा ही घूम-फिरकर हमारे साथ भी होगा। इसके विपरीत हमने किसी के साथ धोखा किया, किसी का अपमान किया या फिर रूखा व्यवहार किया तो वो भी लौटकर हमें वापस मिलता है। इसी को अंग्रेजी में “वाट गोज़ अराउंड, कम्स अराउंड” कहतें है।

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भारत की राजनीति में इस परिस्थिति का ताज़ा-तरीन उदाहरण पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम है। यूपीए सरकार के दौरान चिदम्बरम देश के गृहमंत्री थे और उसी वक्त गुजरात का चर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला भी सुर्खियों में था। इसी मामले में गृह मंत्रालय ने अमित शाह पर कार्यवाही की थी। अमित शाह 9 महीने जैल में रहे और इसके बाद उन्हें 2 साल तक गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया गया। इस गिरफ्तारी से भाजपा भड़क गयी थी। लेकिन केंद्र सरकार के कान पर जूं तक न रेंगी।

इसी तरह इशरत जहां एनकाउंटर मामले को लेकर भी केंद्र सरकार ने हमेशा गुजरात सरकार को कटघरे में खड़ा किया। अमित शाह और नरेंद्र मोदी को तोड़ने के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने एजेंसियों का भरपुर इस्तेमाल किया। तब इसे राजनीतिक कार्यवाही कहने पर कांग्रेस के नेता बड़े भोलेपन से कहते थे कि अगर दोनों निर्दोष है तो गिरफ्तारी से घबरा क्यों रहे है? कानून सबके लिए बराबर है। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुकें है।

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अब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री और अमित शाह गृहमंत्री है। पी चिदम्बरम और उनका बेटा भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी है। चिदम्बरम जानते थे कि ऐसे नाज़ुक हालातों में क्या कुछ नही हो सकता? इसलिए जैसे ही उन पर केस दर्ज हुए उन्होंने वकीलों की टीम लगाकर हर बार अग्रिम जमानत लेकर रखी। लेकिन इस बार कोर्ट के हाथ कुछ ऐसे सबूत लग गए जिससे साफ हो गया कि चिदंबरम का दामन पाक-साफ नही है। इसलिए कोर्ट ने इस बार चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

एजेंसियां इसी मौके की तलाश में थी। इसलिए रातोंरात सीबीआई की टीमें चिदंबरम के घर पहुंच गई। हालांकि वो गिरफ्तारी की आहट मात्र से ही गायब हो गए। देश का पूर्व गृहमंत्री इस वक्त कहाँ छुपा है ये किसी को नही पता। लेकिन बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी? इसे केंद्र सरकार की बदले की कार्यवाही बतलाने वाले कांग्रेस नेताओं को अपने पुराने बयान याद करने चाहिये जो उन्होंने अमित शाह के लिए दिए थे। दलील वही होना चाहिए कि अगर कोई ईमानदार है तो गिरफ्तारी से डर किस बात का? कोर्ट चिदम्बरम को भी किसी दिन जमानत दे ही देगी।

लेकिन मामला इतना सीधा नही है। अमित शाह को फर्जी एनकाउंटर में फंसाने की कोशिश की गई थी जबकि चिदम्बरम और उनके बेटे ने सच में घोटाले किये है। हजारो करोड़ की संपत्ति बनाने वाले बाप-बेटे पर कार्यवाही होना ही चाहिये। सिर्फ ईन पर ही नही बल्कि हर घोटालेबाज़ पर कार्यवाही होना चाहिए। जनता के पैसे से ऐश करने वाले एक भृष्टाचारी को भी नही छोड़ा जाना चाहिये। वक्त का पहिया ये कैसा घुमा की चिदम्बरम फरार है तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी, रोबर्ट वाड्रा जमानत पर बाहर है।

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ईमानदारी निखरकर, महककर सामने आती है जबकि बेईमानी परतें उघाड़कर सड़ाँध मारती बाहर निकलती है। ये बात सबको समझ जानी चाहिये कि वक्त की अदालत में आज नही तो कल सभी का इंसाफ होना है। वक्त किसी का सगा नही होता ये भी सामने है। कल के महाराज आज जमानत के लिए तरस रहे है। कानून को अपने जूते में रखने वाले आज उसी कानून के आगे हाथ बांधे खड़े है। चिदम्बरम मामला हर भ्रष्टाचारी के लिए संदेश है। हर भ्रष्टाचारी को ये याद रखना चाहिए कि-

“शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पर बैठे हो वो टूट भी सकती है..!”

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