Talented View : नाम में क्या रखा है

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नीलगाय (Cartoon On NPR And NRC) फसलों और किसानों के लिए काल बनकर आती है। इनके झुंड जिस खेत मे घुस जातें है उस किसान की मेहनत की फसल को ये कुछ घंटों में तहस-नहस कर डालते हैं। नीलगाय से परेशान किसान को इनका कोई इलाज़ नही सूझता। नाम के आगे ‘गाय’ लगा होने से इस पशु को मारना भी गैर-कानूनी था। इसलिए किसान बेबस थे। लेकिन जब नीलगायों का आतंक हद से ज्यादा बढ़ने लगा तब सरकार ने इसका एक उपाय खोजा।

2015 के अंत मे केंद्र सरकार ने नीलगाय (Cartoon On NPR And NRC) को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 3 से हटाकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों की अनुसूची 5 में शामिल कर दिया। अनुसूची 5 में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी, चूहे जैसे जीव शामिल होतें हैं इस सूची में नीलगाय को डालते ही उन्हें मारने का रास्ता साफ हो गया। इसके तुरंत बाद यानी कि 2016 की शुरुआत में मध्यप्रदेश की सरकार ने नीलगाय का आधिकारिक नाम “रोजड़” रख दिया और किसानों को इसे मारने की इजाज़त दे दी।

अब नीलगाय (Cartoon On NPR And NRC) न गाय थी और न ही संरक्षित जीव। इसलिए किसानों ने इसे बड़े पैमाने पर मारना शुरू कर दिया। समस्या का ये समाधान बहुत ही आसान था लेकिन इसके लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में बदलाव के अलावा इसका नाम तक बदलना पड़ा। नाम बदलने के बाद लोगों की भावनाएं भी आहत होना बंद हो गयी और किसानो को भी उनकी समस्या का समाधान मिल गया। कहने का मतलब है कि महज़ नाम बदलने से भी कई बार बड़ी से बड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती है।

नाम बदलकर समाधान निकालने का एक ऐसा ही एक प्रयास केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) के नाम पर हंगामा बढ़ते देख केंद्र ने एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) के काम को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। कहा जा रहा है कि हर दशक में होने वाली जनगणना के ये काम परम्परागत है और इसमें कुछ नया नही है। जनता के लिए योजनाएं बनाने के लिए डेटा की जरूरत होती है और एनपीआर यही काम करने वाला है। (Cartoon On NPR And NRC)

विरोध की आशंका के चलते गृहमंत्री अमित शाह ने कल ये स्पष्ट किया कि एनआरसी और एनपीआर दो अलग चीज़ें और जिनमें आपस मे कोई जुड़ाव नही है। लेकिन विपक्षी नेता कह रहे है कि सरकार की प्लानिंग वही है सिर्फ नाम बदला गया हैं। 2024 तक देश से घुसपैठियों को बाहर करने में एनपीआर का भी बड़ा योगदान होगा। सरकार विशेषकर अमित शाह की किसी सफाई पर विपक्ष ऐतबार करने को तैयार नही है। उनका कहना है कि ये कवायद सिर्फ नीलगाय का नाम रोजड़ रखने भर की है बाकी मसौदे में कोई अंतर नही है।

इस मुहिम से सरकार के इरादे स्पष्ट पता चलते है कि वो जनता से किये वादे पूरे करने के लिए कितने प्रतिबद्ध है। भाजपा की यही आक्रामकता उसे बाकी दलों से अलग रखती है। इस कदम से ये पता चलता है कि एक साल में 5 राज्य गंवाने के बाद भी भाजपा अपने घोषणापत्र पर अडिग है और वादे पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। अब ये जनता को देखना है कि उन्हें वादे पूरे करने वाली सरकार पसन्द आती है या दबाव में कदम पीछे लेने वाली?

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– सचिन पौराणिक

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