Talented View : आगे आप सभी समझदार हैं…

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आज साल का आखिरी दिन है। सभी के मन में एक अलग ही उत्साह है, उमंग है। बीते साल में सीखे कुछ सबक हैं तो नए साल (Talented View On Happy New Year 2019) के लिए कुछ उम्मीदें भी हैं। कहते हैं कि वक्त कभी रुकता नहीं। बात सच है क्योंकि ज़िंदगी में चाहे जो हो जाए, लेकिन वक्त कहां किसी के लिए रुकता है। नया साल सभी के लिए आ रहा है चाहे साल आपके लिए अच्छा बीता हो या बुरा। मतलब वक्त उनका भी बीत गया, जो खुशियां मना रहे थे और उनका भी जो ग़म में डूबे हुए थे। समय का प्रवाह रोकना किसी के बस में नहीं है।

समय हमेशा अपनी गति से निर्बाध चलता रहेगा। यह बात अलग है कि हमें महसूस होता है कि खुशी में बिताए लम्हे जल्दी गुज़र जाते हैं और दुःखों का समय लंबा खींचता हुआ लगता है। खैर, समय को छोड़ मुद्दे पर आते हैं। आज साल का आखिरी दिन है और कल नए साल (Talented View On Happy New Year 2019) पर जश्न की खबरों के बीच अखबारों में कुछ ऐसी खबरें होंगी, जिन पर अमूमन ध्यान नहीं जाता है। आधी रात को सड़कों पर जश्न मनाते कितने ही युवा शराब के नशे में धुत होकर गाड़ियां चलाएंगे और हादसों का शिकार बनेंगे। इन हादसों में वे भी मारे जाएंगे, जो नशे में डूबे हैं और वो भी मारे जाएंगे, जिन्होंने कोई नशा नहीं किया हुआ है।

बेशक, गलती नशा करने वालों की ही होगी, लेकिन उसमें गेहूं की तरह घुन भी पिस जाएंगे। आजकल नए साल में जिस प्रकार जश्न मनाया जाने लगा है, उससे हर साल सैकड़ों युवा हादसों का शिकार बनकर काल के गाल में समा जाते हैं। इन हादसों में जो बच जाते हैं, उन्हें भी कई बार जिंदगी भर के घाव मिल जाते हैं। आखिर क्या वजह है कि हमारी युवा पीढ़ी मौज-मस्ती में इतनी अंधी हो जाती है कि उसे अपनी जान की भी परवाह नहीं रहती हैं? शराब पीकर सड़कों पर हुड़दंग मचाकर हम नए साल का कैसा स्वागत करना चाहते हैं?

इस बारे में कभी सोचा है कि अपने परिवार को और अपने चाहने वालों को अपनी खून भरी लाश घर पहुंचाकर कैसा तोहफा हम देना चाहते हैं? हमें परिवारजन की कोई फिक्र है या नहीं? हर बार नए साल (Talented View On Happy New Year 2019) के जश्न के नाम पर सड़कों पर हादसे होते हैं और किसी के पास फुरसत नहीं होती है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाए। एम्बुलेंस फोन लगाने पर भी नहीं आती और कई निजी अस्पताल किसी मरीज को भर्ती करने से ही साफ इनकार कर देते हैं। पुलिस जान लगाकर अपनी ड्यूटी करती है, लेकिन संख्या में कमी की वजह से कुछ खास फर्क नहीं डाल पाती। शराब के नशे में लोग तेज़ गति से गाड़ियां भगाते हैं और हादसों को न्योता देते हैं। इस तरह हर नया साल शुरू होते ही देशभर में हजारों युवाओं की सांसें छीन लेता है।

प्रशासन और सरकारें भली-भांति समझती हैं कि शराब इन हादसों के मूल में है, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। राष्ट्रीय त्योहारों की तर्ज़ पर क्या 31 दिसंबर भी “ड्राई डे” नहीं घोषित किया जाना चाहिए? दुकानों पर शराब खुलेआम मिलती रहेगी और चौराहों पर पुलिस शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के चालान काटेगी, इससे परिस्थिति क्या कभी संभल सकेगी? युवाओं की अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी है कि वह शराब न पीएं, लेकिन प्रशासन, सरकारों की भी तो कुछ जिम्मेदारी है। प्रशासन यदि सख्ती दिखाए तो क्या हालात नहीं संभाले जा सकते?

नए साल के जश्न को आप ज़रूर मनाएं, लेकिन यदि इस जश्न से किसी के घर का चिराग बुझ जाए तो फिर ऐसा जश्न किस काम का? शराब पीने वालों को अपने साथ एक ऐसा मित्र या ड्राइवर जरूर रखना चाहिए जो शराब न पीएं और उन्हें सकुशल घर पहुंचा सके। नया साल सभी के जीवन में खुशियां, समृद्धि और सफलता लाए, इसके लिए जीवित रहना पहली शर्त है। ज्यादा कहने की ज़रूरत नहीं, आगे आप सभी समझदार हैं। नया साल आप सभी के लिए सुख-समृध्दि लाए, ऐसी हमारी शुभकामनाएं..!

-सचिन पौराणिक

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