Talented View : हिंदुस्तानी की पहचान

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पूरा विश्व इस समय शरणार्थी संकट से जूझ रहा है। इराक, सीरिया, यमन, म्यांमार जैसे देशों से शरणार्थी दूसरे देशों में शरण लेने के लिए आतुर हो रहे है। कहने कि जरूरत नही की इन शरणार्थियों में ज्यादातर मुस्लिम ही है। भारत भी इसी संकट से जूझ रहा है।शरणार्थियों और घुसपैठियों की समस्या से हम पहले ही दुखी है। अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या यहां करोड़ो की संख्या में है। ये लोग हमारे देश के संसाधनों का बेजा दोहन कर रहे है और कई तरह की नई समस्याओं को पैदा कर रहे है।

Talented View : सरकारी अधिकारी या अपराधी

इस विकट समस्या से निपटना देशहित में जरूरी हो गया है। लेकिन वोटबैंक की गंदी राजनीति कर चलते कोई सरकार इन अवैध घुसपैठियों पर लगाम लगाने को लेकर कोई ठोस कदम नही उठा पाती थी। किन्तु वर्तमान केंद्र सरकार ने इस समस्या का, आगे आकर सामना करने की ठानी है। इसी क्रम में केंद्र सीएबी अर्थात सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल (नागरिकता संसोधन बिल) लेकर आने वाली है। इस बिल का संसद पटल पर आने से पहले ही विरोध भी शुरू हो गया है।

Talented View : राजनीति में नहीं चलती ईमानदारी

इस बिल के अनुसार केंद्र नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करेगा। इसके बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत आस पास के देशों से भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी धर्म वाले लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इस बिल का विरोध सिर्फ इस बात पर हो रहा है कि इस बिल के पास होने के बाद मुस्लिमो को छोड़कर सभी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता आसानी से मिल जाएगी। मुस्लिम वोट की चाह में राजनीतिक दल इस बिल का पुरजोर विरोध कर रहे है।

लेकिन गहराई से सोचें तो ऐसा करना अत्यावश्यक था। पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे इस्लामिक देशो में धर्म के नाम पर अत्याचार सिर्फ हिन्दू, सिख, पारसी और बौद्धो पर ही किये जातें है। इन देशों में मुस्लिमो के अलावा हर धर्म का नागरिक प्रताड़ित किया जाता है। बहन-बेटियों के साथ बलात्कार किये जातें है और उन्हें जबरन मुस्लिम बनाया जाता है। इस बात को ध्यान में रखकर ही सरकार ने इस बिल में ये बातें रखी है। गृहमंत्री साफ कर चुके है की मुस्लिमो के साथ ईन देशो में धार्मिक भेदभाव नही हो सकता इसलिए उन्हें इस आधार पर भारत की नागरिकता नही दी जा सकती।

बात सही भी है। मुस्लिम शरणार्थियों को आखिर क्यों भारत मे आना है? भारत अगर उनके साथ सही नही कर रहा है तो उन्हें दुनिया के बाकी मुस्लिम देशों में जाकर शरण लेना चाहिए। भारत ने मानवता और देश को धर्मशाला बनाने का कोई ठेका थोड़ी ले रखा है। आज ये शरणार्थी है कल को ये भारत के मालिक बनने की कोशिश करेंगे। भारत के कुछ बेशर्म नेता इन्हें अपना वोटबैंक बनाएंगे और इस पर राजनीति शुरू कर देंगे। लेकिन राजनीतिक नफे-नुकसान में देश को दांव पर नही लगाया जा सकता।

नागरिकता संसोधन बिल में अगर कुछ खामी है तो इस पर चर्चा हो सकती है। लेकिन सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के लिए बिल का विरोध सही नही। विपक्ष केंद्र को आर्थिक मुद्दों पर घेर सकता है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर राजनीति शोभा नही देती। नागरिकता संसोधन बिल पारित हो हर देशभक्त यही चाहेगा। लेकिन राष्ट्रहित से ऊपर पार्टीहित या स्वहित रखने वालों को ये बिल रास नही आएगा। देश से घुसपैठियों को बाहर करने से पहले ये पक्का करना जरूरी है कि नए घुसपैठिये देश में न पहुंच पाये। देशहित में ये बिल पास होना बहुत जरूरी है।

Talented View : बिन पेंदे का नेता

                – सचिन पौराणिक

 

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