Talented View : और जनता भी मोदी-मोदी चिल्लाने में व्यस्त

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मोहल्ले में एक बच्चे के पास क्रिकेट का पूरा सामान था, गेंद, बल्ला, स्टंप आदि सभी सामग्री। बाकी बच्चों के पास यह सब नहीं थे| स्वाभाविक था कि यदि बच्चों को क्रिकेट खेलना है तो जिस बच्चे के पास खेल का सामान है, उसे खिलाना सबसे ज़रूरी था। इसी कारण सभी बच्चे उसकी खुशामद करते थे। उस बच्चे के ठाट भी सबसे अलग थे।

वह बच्चा दोनों टीमों की तरफ से बल्लेबाजी करता था, उसे तेज़ गेंद नहीं फेंकी जा सकती थी, उसे सिर्फ फुलटॉस या फिर धीमी गेंदें ही फेंकी जाती थी। उसके कैच पकड़ने की इजाजत भी किसी को नहीं थी। उसे रनआउट भी नहीं किया जा सकता था। जब तक उसका मन होता, वह बल्लेबाज़ी करता और फिर बैठ जाता था। आजकल प्रधानमंत्री मोदी हर चैनल को अपना इंटरव्यू दे रहे हैं, लेकिन जिस तरह के प्रश्न उनसे पूछे जा रहे हैं, उससे प्रश्न पूछने वालों की गुणवत्ता पर ही प्रश्न उठने लगे हैं।

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मसलन, मोदीजी यदि कह रहे हैं कि आने वाले सालों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी कर देंगे तो पत्रकार की इतनी हिम्मत नहीं होती यह प्रतिप्रश्न पूछने की कि इससे हासिल क्या होगा? जेट बंद हो गया, एयर इंडिया के हालात पहले ही खराब हैं, हवाई किराया भी आसमान छूने लगा है। आज ही एयर इंडिया का सर्वर ठप हो गया, जिससे उड़ानें घंटों विलम्ब से चली। पूरे एविएशन सेक्टर की हालत पतली है। ऐसे में हवाई अड्डे दोगुने करके उनमें क्या सब्जी मंडी लगाई जाएगी?

अपने इंटरव्यू में कठिन सवालों से नेताओं के छक्के छुड़ाने वाले धाकड़ पत्रकार भी मोदीजी के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं। सवाल पूछेंगे भी तो इस तरह से कि उसका जवाब भी सवाल में ही छिपा होगा। जैसे नोटबन्दी पर सवाल पूछना पड़ेगा तो पूछेंगे की नोटबन्दी से पत्थरबाजी में कमी आई, काले धन पर लगाम लगी, इस पर क्या कहना है आपका? सिर्फ 60 महीनों में आपने यह सब कैसे कर लिया, जो सरकारें 60 साल में भी नहीं कर पाईं ? विपक्ष के बचकाने आरोपों पर आपका क्या कहना है?

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इसके बाद सदाबहार प्रश्न पूछ लिए जाते हैं, जैसे नींद और कार्यक्षमता वाले। ये सवाल मोदीजी से इंटरव्यू करने में रामबाण की तरह है। कुछ समझ नहीं आए तो नींद पर आ जाओ। आज नरेंद्र मोदी ब्रांड इतना बड़ा हो गया है कि पत्रकार इस ब्रांड के सामने एक ढंग का सवाल पूछने में झिझकता है। किसी पत्रकार ने यह नहीं पूछा कि आज तक की आपने सरकार की हर सफलता पर सेहरा खुद के सिर बांधा है, लेकिन जो काम नहीं हो पाए, उसके लिए पूर्व की सरकारें जिम्मेदार कैसे हो गईं ? नेहरू और कांग्रेस ने जो गलतियां की सो की, लेकिन आपने इन्हें सुधारने के लिए क्या किया?

यह बात सच है कि पुरानी सरकारों ने अनेक गलतियां की होंगी, लेकिन यदि पुरानी सरकारें ही सब कर लेती तो जनता मोदी को जिताती ही क्यों?  हर दल के दागदार नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं। भाजपा क्या गंगा है, जो इसमें शामिल होते ही नेताओं के सारे दाग धुल जाते हैं? भाजपा में दूसरे दल के नेताओं को शामिल कराने का क्या मानदंड है? ऐसे प्रश्न आपने कभी टीवी पर सुने ही नहीं होंगे। स्थितियां ऐसी हो गई है कि एक इंटरव्यू में पत्रकार मोदीजी से हल्के सवाल पूछ लेता है तो अगले इंटरव्यू में दूसरा पत्रकार इससे भी हल्के सवाल पूछने की प्रतियोगिता में लग जाता है। कुछ नहीं मिलता तो निजी जीवन की घटनाओं के बहाने ही व्यक्तिगत छवि को निखारने की कोशिशें की जाने लगती है।

मोहल्ले के उस बच्चे, जिसके पास क्रिकेट का सब समान है, यहां मोदीजी की भी पत्रकार ठीक उसी तरह से खुशामद करते हैं इंटरव्यू देने के लिए। यहां मोदीजी के पास सरकार है, महकमे हैं, शक्ति है इसलिए यदि उनका इंटरव्यू करना है तो उनकी शर्तें भी माननी ही पड़ती हैं। बेशक, ये शर्तें मोदीजी ने नहीं रखी होगी, लेकिन प्रतियोगिता के ज़माने में कोई कैसे पीछे रह सकता है? उनसे भी न कठिन प्रश्न पूछे जा सकते हैं, न उलझाने वाले और न ही सरकार की नाकामी वाले। एक पत्रकार मोदीजी को हल्की गेंद फेंकता है तो दूसरा सिर्फ फुलटॉस के वादे के साथ चला आता है तो कोई सिर्फ “फ्री हिट” वाली गेंद ही फेंकने की बात करता है। मोदीजी भी ऐसी हर गेंद पर दनादन चौके-छक्के लगा रहे हैं और जनता भी मोदी-मोदी चिल्लाने में व्यस्त हो गई है।

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