Talented View : ट्रम्प के अच्छे दिन जल्द ही जाने वाले हैं

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जिस तरह के विरोधी भारत में नरेंद्र मोदी के हैं, ठीक उसी तरह के विरोधी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के हैं मतलब यह विरोध सिर्फ विरोध के स्तर तक सीमित न होकर घृणा में तब्दील हो चुका है। चूंकि अमेरिका में भी लोकतंत्र है और भारत में भी इसलिए वहां जनता ही तय करती है कि देश का मुखिया कौन होगा इसलिए मोदी भारत के तो ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्र प्रमुख बने हैं क्योंकि जितनी संख्या इनसे घृणा करने वालों की है, उससे ज्यादा संख्या में इनके चाहने वाले हैं।  इसके अलावा ट्रम्प और मोदी दोनों ही राष्ट्रवाद के बड़े हिमायती हैं।

जनता जानती है किस मुद्दे के समाधान के लिए किसके पास जाना है

मोदी के लिए भारत पहले हैं तो ट्रम्प के लिए अमेरिका। एक तरह से सोचा जाए तो ट्रंप अमेरिका में दक्षिणपंथी नेता है। इसके अलावा आतंकवाद पर उनके कड़े बयान भी हमें बहुत आकर्षित करते हैं। ऐसी ही कई वजहों से भारत में ट्रंप बेहद लोकप्रिय रहे हैं। हिलेरी क्लिंटन और ट्रम्प के बीच चुनाव में भारतीयों की यही कामना थी कि ट्रम्प जीतें। ट्रम्प और मोदी में बुनियादी फर्क यह है कि मोदी ज़मीन से चलकर प्रधानमंत्री तक पहुंचे हैं इसलिए उनमें ‘विवेक’ बहुत ज्यादा है जबकि ट्रम्प अमीर व्यवसायी होने के नाते कुछ बड़बोले हैं।

ट्रम्प ने कल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ चर्चा में अपना यही बड़बोलापन प्रदर्शित कर दिया। जोश में आकर वे कह बैठे कि मोदी ने उनसे भारत-पाक के बीच कश्मीर मामले को लेकर मध्यस्थता करने को कहा है जबकि सच्चाई यह है कि भारत की कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से सिर्फ बाइलेटरल टॉक अर्थात द्विपक्षीय वार्ता का स्टैंड दशकों पुराना है।

Talented View : जनता पर बोझ लादना बंद करो, हैप्पीनेस इंडेक्स बढ़ेगा

अमेरिका सहित दुनिया के किसी भी देश का हस्तक्षेप भारत कश्मीर के मामले में नहीं चाहता। भारत की नीति यही है कि हमारे झगड़े सुलझाने के लिए हम पूरी तरह से मजबूत हैं। किसी तीसरे पक्ष की दखल की हमें कोई ज़रूरत नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प के इस बयान पर तत्काल विरोध जताया और ऐसी किसी चर्चा से साफ इनकार कर दिया। अमेरिका भी भारत का रुख देखकर सावधान हुआ और उनकी आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में कश्मीर सहित इस बात का जिक्र तक नहीं हुआ ।

मोदी को क़रीब से जानने वाले आश्वस्त हैं कि मोदी ऐसा कह ही नहीं सकते। शशि थरूर जैसे कांग्रेसी नेता ने भी खुलकर कहा कि मोदी से ऐसी बात की कोई संभावना नहीं है। ट्रंप अपने झूठे बयान के चलते इस बार अमेरिका के साथ ही भारत की मीडिया के भी निशाने पर आ चुके हैं। असल में ट्रंप ने अपनी अहमियत दिखाने के उद्देश्य से इमरान के सामने यह बात कह दी। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भारत इसका कड़ा विरोध करेगा, लेकिन वे भूल गए कि नया भारत अमेरिका के झूठ का विरोध खुलकर करेगा क्योंकि हमें कोई अमेरिका से ‘भीख’ नहीं चाहिए।

मोदीजी को इस तरफ गौर ज़रूर करना चाहिए

ट्रम्प को समझ जाना चाहिए कि पाकिस्तान एक भिखमंगा मुल्क है, जो बर्बाद होने के मुहाने पर खड़ा है। दूसरी तरफ भारत है, जो तरक्की की राह पर चल पड़ा है और वह ऐसे किसी झूठ को बर्दाश्त नहीं करेगा। नरेंद्र मोदी की छवि भी ऐसी नहीं है, जो वह कोई हल्की बात कह सके। ट्रम्प को सोचना चाहिए था कि पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने वाला भारत क्या उनके सफेद झूठ पर चुप बैठ सकता है? ट्रम्प अपने बड़बोलेपन और झूठ की वजह से खुद की जगहंसाई करवा रहे हैं । भारत में बैठे उनके समर्थक भी इस बार उनसे खासे खफा हैं।

ट्रम्प को मोदी और भारत से सीखना चाहिए कि दुनिया में इज़्ज़त कैसे कमाई जाती है? नरेंद्र मोदी जहां अपने विरोधियों को भी अपना समर्थक बना रहे हैं वहीं ट्रंप अपने चाहने वालों को भी अपना दुश्मन बनाने पर तुले हुए हैं। पाकिस्तान जैसे भिखारी को खुश करने के लिए भारत जैसे सच्चे दोस्त पर झूठ कहना ट्रम्प को भारी पड़ सकता है। “अबकी बार ट्रम्प सरकार” का नारा लगाकर राष्ट्रपति बनने वाले ट्रम्प को यदि इमरान ज्यादा पसंद आ रहे हैं तो यह संकेत है कि ट्रम्प के अच्छे दिन जल्दी ही जाने वाले हैं।

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