website counter widget

Talented View : मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए ऐसा न करें

0

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) की तारीखों की घोषणा के साथ ही देशभर में आचार संहिता लागू हो गई है। रुपयों के परिवहन से लेकर देर रात तक लाऊड स्पीकर के प्रयोग पर रोक के अलावा और भी कई तरह की पाबंदियां अब अगले कुछ महीनों में देखने को मिलेंगी। मतदान की तारीखों के ऐलान के साथ ही एक नई तरह की चर्चा इस समय देश में चल पड़ी है कि रमज़ान के दौरान चुनाव होना चाहिए या नहीं क्योंकि कई राजनीतिक पार्टियां और मुस्लिम संगठन रमज़ान में चुनाव का विरोध करने पर उतारू हो गए हैं। रमज़ान मुस्लिमों का पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें वे रोज़े रखते हैं।

Talented View : बच्चों के मन में जहर भरने की कोशिश क्यों ?

कई मुस्लिम संस्थाओं का कहना है कि रमज़ान में मतदान से मुस्लिम वोट प्रतिशत कम होगा, जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा, लेकिन असद्दुदीन औवेसी जैसे कुछ नेता इन बातों के बिल्कुल खिलाफ हैं। उनका स्पष्ट मत है कि रमज़ान में चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मुस्लिम रमज़ान के दौरान बाकी काम भी करते ही हैं तो मतदान करने में भी क्या नुकसान है? वैसे औवेसी की बात इस बार सही लगती भी है क्योंकि रमज़ान के दौरान रोज़े रखने के दौरान भी मुस्लिम भाई अपने दैनिक कार्य तो करते ही हैं। रमज़ान के दौरान सभी मुस्लिम अपनी दुकान चलाते हैं, कारखाने जाते हैं, नौकरी करते हैं, उद्योग चलाते हैं, पंचर बनाते हैं, व्यापार चलाते हैं तो ऐसे ही मतदान भी कर देंगे, इसमें समस्या कहां है?

मुस्लिम यदि अपने दैनिक कार्य कर सकते हैं तो मतदान क्यों नहीं कर सकते हैं ? क्या लोकतंत्र की कीमत दैनिक कार्यों से भी कम है ? आम मुस्लिम इन बातों से बिल्कुल सहमत नहीं है। मुस्लिम इतना कमजोर नहीं है कि रोज़े रखने के दौरान मतदान न कर सके। यह सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक के नाम राजनीति करने वाले कुछ तत्वों की खुराफात है कि कुछ भी करके मुस्लिमों को भड़काया जाए। सभी समझ रहे हैं कि भाजपा इस बार बाकी दलों पर बहुत भारी है। भाजपा की आंधी में बाकी दलों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

Talented View : समझ लें कि बेटियां हैं तभी जीवन है

यह मुहिम दरअसल मुस्लिमों का नकली शुभचिंतक बनकर रमज़ान के नाम पर उन्हें भड़काने और उनका वोट हथियाने की बड़ी साजिश नज़र आ रही है। एक पक्ष यह भी है कि रमज़ान में चुनाव के विरोध से एक नई वैचारिक लड़ाई भी प्रारम्भ हो सकती है। कल को हिन्दू कह सकते हैं कि सावन के महीने या नवरात्र के दिनों में चुनाव न करवाया जाए| जैन कह सकते हैं कि पर्वाधिराज पर्युषण माह में चुनाव न करवाए जाएं, ईसाई कह सकते हैं कि क्रिसमस के आसपास चुनाव न करवाए जाएं, सिख कह सकते हैं कि बैसाखी के समय चुनाव न हो, तब ऐसे हालातों में क्या होगा? ऐसे कैसे चलेगा देश में लोकतंत्र ?

अब चुनाव की तारीखें भी क्या मज़हब के चश्मे से देखना पड़ेगी जबकि चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन मतदान नहीं रखा गया है तो इस विवाद को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं बचता, लेकिन कुछ राजनीतिक दल या मुस्लिम संगठन अब भी यदि चुनाव का विरोध करते हैं तो यह देश को समझना होगा कि इनके असली मंसूबे क्या हैं? किसी भी धर्म, मजहब, सम्प्रदाय से बढ़कर देश है, लोकतंत्र है और हमारी देशभक्ति है, यह हमें समझना पड़ेगा। मुस्लिम भाइयों को इस षडयंत्र को समझकर खुद इसका विरोध करने आगे आना होगा। ऐसा नहीं होता है तो ये फिरकापरस्त ताकतें मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए ऐसी हरकतें लगातार करेंगे और चुनाव को बेवजह विवादों में घसीटेंगे।

Talented View : जिधर दिखा जनाधार, टपकाने लगे लार

-सचिन पौराणिक

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.