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Talented View :  अमन के दुश्मन

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जब तक अयोध्या मामला कोर्ट में चल रहा था तब तक दोनों पक्ष यही कहते थे कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य होगा। कोर्ट का निर्णय आने के एन पहले तक भी यही बात चल रही थी कि कोर्ट के निर्णय पर कोई उंगली नही उठाई जायेगी। लेकिन जब से राममंदिर के पक्ष में निर्णय आया है, कुछ लोगों को ये हज़म नही हो रहा है। ओवेसी जैसे नफरत फैलाने वाले नेता जहर फैलाते घूम रहे है तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी निर्णय को चुनौती देने का मन बना लिया है।

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हिन्दू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमनी संस्कृति की जो बातें देश की जाती है, मुस्लिम लॉ बोर्ड का ये कदम इसकी हवा निकाल देगा। ये कैसा भाईचारा और सौहार्द है जो मुस्लिम नेता अपने स्वार्थ के चलते पूरी कौम को बदनाम करने में लगे हुए है? भारत का आम मुस्लिम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट है। मामले के मुख्य मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी भी कह चुकें है की मुस्लिमों को बाबरी भूलकर आगे बढ़ जाना चाहिए। लेकिन आखिर ये कौन लौ

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लोग है जो इस मामले को ठंडा होने ही नही देना चाहते?

सब जानतें है कि अयोध्या मामले ने इस केस से जुड़े सभी लोगो एक को स्थायी रोज़गार दे रखा था। दशकों से ये लोग इस विवाद की आड़ में ‘मोटा माल’ बना रहे थे। इन लोगों की कमाई का जरिया ये विवाद बन गया था। किंतु अब कोर्ट का निर्णय होने के बाद इनकी दुकानदारी बंद हो जाएगी इसलिए ये लोग कुछ भी करके इस मामले को ज़िंदा रखना चाह रहे है। निजी स्वार्थ में ये लोग हिन्दू-मुस्लिम के बीच आग लगाने में भी पीछे नही हट रहे हैं।

ऐसा मानने के पीछे ठोस तर्क है। सब जानतें है कि अयोध्या मामले में लगायी जाने वाली पुनर्विचार याचिका का कोई भविष्य नही है। आज नही तो कल ये याचिका खारिज होना ही है। लेकिन सब जानते-समझते भी ये कदम सिर्फ बहुसंख्यक वर्ग की भावनाएं आहत करने को तो नही उठाया जा रहा है? कौन हैं ये लोग जो नही चाहते कि हिन्दू-मुस्लिम में भाईचारा कायम हो? इस कदम से एक आम मुस्लिम को हिकारत भरी नजरों से नही देखा जायेगा? आखिर क्या औचित्य बनता है ऐसा विघटनकारी कदम उठाने का?

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हिन्दू-मुस्लिम के बीच अमन मुस्लिम बोर्ड को रास नही आ रहा है? उन्हें ये हज़म नही हो रहा है कि उनकी रोज़ी रोटी चलाने वाला मुद्दा अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है। देश के मुस्लिमों को पर्सनल लॉ बोर्ड के इस कदम का पुरज़ोर विरोध करना होगा। क्योंकि आम मुस्लिम अपने नेताओं की उस साजिश का शिकार होंगे जिससे उनका कोई लेनादेना नही है। बल्कि आम मुस्लिम तो इसलिए खुश है कि अब आपसी विवाद की जड़ ही खत्म हो जायेगी। लेकिन पर्दे के पीछे नफरत फैलाने वाली इस साजिश को बेनकाब करना जरूरी हो गया है। समाज़ में नफरत फैलाने वालों के की साज़िश कामयाब नही होने दी जा सकती।

 – सचिन पौराणिक

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