Talented View : मुलायम ने बेटे को दिया बड़ा झटका

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कई बार ऐसा होता है कि फुरसत में समय काटे नहीं कटता। समय की रफ्तार बेहद सुस्त दिखाई देती है, लेकिन समय की गति को सही से समझना हो तो अतीत में देखा जा सकता है। यादों के झरोखे से जब समय को देखा जाता है, तब समझ आता है कि समय की गति वास्तव में कितनी तेज़ है। कल जब संसद के आखिरी सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने अपना उद्बोधन दिया तो पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ कि यह इस संसद का आखिरी सत्र है। अब संसद 2019 के चुनाव के बाद एक नए ही रूप में दिखेगी। 2014 के चुनाव बीते तकरीबन 5 वर्ष बीतने को आए हैं। अतीत में झांकने पर लगता है कि 2014 मानो कल ही की बात हो। देखते ही देखते ये पांच साल बीतने को आए और फिर चुनाव की तैयारी हो गई है।

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खैर, कल संसद में एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। कई वक्ताओं ने सदन में अपनी बात रखी, लेकिन महफ़िल लूट ले गए मुलायम यादव। सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठकर मुलायम ने जो कहा, उससे देश की राजनीति हिल गई। मुलायम ने मोदी के प्रति मुलायम रुख अपनाते हुए उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनाएं दे दी। विपक्षी एकता के दावों के बीच मुलायम ने जो कहा, उससे सत्ता पक्ष के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता यह समझ नहीं पाए कि अब इन बातों का क्या अर्थ निकाला जाए? बेचारे सदन की गरिमा, नैतिकता और एक अभिभावक के रूप में मुलायम की बातों को डिफेंड कर रहे हैं, लेकिन यह सभी समझ रहे हैं कि मुलायम के बयान ने समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष को असहज स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। मुलायम जैसे मंझे हुए राजनेता यदि मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं तो इस बात के मायने समझे जाने की ज़रूरत है।

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पहली बात यह हो सकती है कि माया के साथ हुए अखिलेश के गठबंधन से मुलायम खुश नहीं है इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री की तारीफ की है। अखिलेश न उनकी सुन रहे हैं न चाचा शिवपाल की इसलिए मुलायम ने मोदी को शुभकामनाएं देकर बेटे की अक्ल ठिकाने लगाने की कोशिश की है। मुलायम अखिलेश को शायद यही संदेश देना चाहते हैं कि बाप, बाप होता है। दूसरी बात यह हो सकती है कि जिस तरह लालू यादव जेल में अपने वसंत गुज़ार रहे हैं, उससे भी मुलायम चिंतित हैं। उन्हें समझ आ रहा है कि भाजपा फिर सत्ता में आएगी और मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे। किसी सरकारी जांच की आंच उन तक न पहुंचे इसलिए भी मोदी के प्रति उनका नज़रिया मुलायम हो चला है। बाकी सदन में वरिष्ठ नेता या अभिभावक के तौर पर या फिर दलगत राजनीति से परे हटकर मुलायम ने मोदी को शुभकामनाएं दी, ऐसा सोचने वालों की बात का कोई व्यवहारिक पक्ष नहीं है। ऐसी बातें कोरी बकवास है क्योंकि राजनीति के वर्तमान हालात ऐसे नहीं है कि कोई नेता दूसरी पार्टी के नेता को प्रधानमंत्री बनने का आशीष दे।

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मुलायम के कल के उद्बोधन के बाद प्रधानमंत्री ने भी मौके पर चौका लगाते हुए उन्हें तत्काल धन्यवाद प्रेषित किया। मोदी समझ गए कि मुलायम के बयान के बाद विपक्षी एकता की एक बार फिर धज्जियां उड़नी पक्की है। मुलायम के बयान के बाद अब ऐसा लगता है कि यूपी की लड़ाई में भाजपा बेहतर स्थिति में आ सकती है। यदि यूपी की हर सीट पर महागठबंधन और भाजपा के अलावा कांग्रेस और शिवपाल की पार्टी भी अपना उम्मीदवार उतार देती है तो इसका फायदा भाजपा को मिलना पक्का है। ऐसे हालातों में भाजपा 2014 वाला शानदार प्रदर्शन भी एक बार फिर दोहराने की उम्मीद पाल सकती है। मुलायम ने विपक्षी एकता और विशेषकर अपने बेटे को एक बहुत बड़ा झटका कल दिया है, जिससे उबरना आसान नहीं रहने वाला है।

-सचिन पौराणिक

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