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Talented View : ये संत पूरे संत समाज के माथे पर एक कलंक

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मुल्ले-मौलवियों के साथ ही साधु-संत भी आजकल राजनीति से कोई परहेज़ नहीं कर रहे। अध्यात्म, शांति, सद्भाव और प्रेम का संदेश देने की जिन पर जिम्मेदारी है, वे लोग आजकल अपनी राजनीतिक दुकानदारी चलाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ऐसे ही एक तथाकथित संत, जिन्होंने भोपाल में दिग्विजयसिंह की जीत के लिए हवन किया था, वे आजकल सुर्खियों में छाए हुए हैं।

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वैराग्यानंद नाम के ये संत खुद को ‘महामंडलेश्वर’ बताते हैं। इन्होंने साढ़े पांच क्विंटल मिर्ची से एक यज्ञ किया था। इन संत का दावा था कि यदि दिग्विजयसिंह भोपाल से नहीं जीते तो ये उसी यज्ञकुंड में समाधि ले लेंगे, लेकिन चुनाव के नतीजे आए तो दिग्गी राजा की 3 लाख से ज्यादा वोटों से करारी हार हुई। तब लोगों ने इन संत को भी बहुत याद किया, लेकिन तब ये धूर्त अंडरग्राउंड हो गया।

इस बीच एक ऑडियो भी वायरल हुआ हुआ, जिसमें कथित तौर पर ये संत अपनी बात से साफ मुकर रहे थे। चारों तरफ अपनी बेइज़्ज़ती होती देख इस संत ने अब एक नया पैंतरा खेला है। अपने वकील के माध्यम से इस संत ने अब कलेक्टर से ‘जलसमाधि’ लेने की अनुमति मांगी है। यह कह रहा है कि जो प्रण किया है, उसे पूरा करूंगा, लेकिन अपने आप को सच्चा संत घोषित करने की कवायद में ये फ़र्ज़ी संत यह भूल गए कि प्रण इसने यज्ञकुंड में समाधि लेने का किया था न कि जल में।

इस पाखंडी संत के इस पब्लिसिटी स्टंट को बहुत बारीकी से समझने की ज़रूरत है। दरअसल, ये ढोंगी जानता है कि कलेक्टर कभी जल समाधि की अनुमति देने वाले नहीं है। इसलिए ये अपने आप को ‘पाक साफ’ दिखलाने की कोशिश कर रहा है। इस परिस्थिति का दूसरा पक्ष भी समझने की ज़रूरत है। अगर गलती से भी दिग्विजय भोपाल से जीत जाते तो ये पाखंडी देशभर में घूम-घूमकर नेताओं के लिए ‘मिर्ची यज्ञ’ करता और बदले में लाखों रुपए वसूलता। ये मार्केटिंग की असल में वह घटिया ट्रिक है, जिसकी सफलता दर 50% होती है।

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कुछ सालों पहले उज्जैन में ऐसे ही एक अघोरी ने हिलेरी क्लिंटन के चुनाव जीतने और ऐसी ही 1-2 अन्य भविष्यवाणियों के साथ धूनी रमा ली थी। भविष्यवाणी गलत साबित हुई और बाबा जाने कहां गायब हो गए, लेकिन तब भी अगर दुर्भाग्यवश उनकी बात सही निकल जाती तो उनकी दुकानदारी चलना पक्की थी।  ऐसे ही ये वैराग्यानंद भी घटिया पब्लिसिटी की चालें चल रहा है। ये संत के वेश में छिपा भेड़िया है।

असली संत कभी नेताओं की हार-जीत में नहीं पड़ते बल्कि सत्य, प्रेम और करुणा के सिद्धांतों पर ही अपना जीवन जीते हैं। ये संत भगवा पहनकर ऐसी हरकतें कर रहा है, जिससे सनातन धर्म की भी बदनामी हो रही है। अखाड़ा परिषद और संत-समाज को तुरन्त इन ढोंगी पर कार्रवाई करना चाहिए अन्यथा सनातन पर अंगुली उठाने वालों को इसके बहाने धर्म पर आक्षेप लगाने का एक मौका और मिल जाएगा।

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वैराग्यानंद जैसे लोगों को ‘पवित्र’ भगवा भी नहीं पहनने देना चाहिए। अपनी हरकतों से यह भगवा को भी कलंकित कर रहा है। जलसमाधि लेने का यह नाटक सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट है। यदि सच में  ही वैराग्यानंद को समाधि लेना है तो चुपचाप जाकर जल में डूब जाए। इसके लिए मजमा लगाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है।

साढ़े पांच क्विंटल मिर्ची से यज्ञ करने से पहले क्या इसने कलेक्टर से अनुमति ली थी, जो जलसमाधि के लिए अनुमति की नौटंकी कर रहा है? इसके जैसे संत पूरे संत समाज के माथे पर एक कलंक हैं। वैराग्यानंद जैसे फ़र्ज़ी संतों का भंडाफोड़ ज़रूरी हो गया है।

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