Talented View : तय हो नेताओं का रिटायरमेंट

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(Cartoon On MiG 27) लड़ाकू विमान मिग 27 (MIG-27) आज आखिरी उड़ान भर रहे है। 1985 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए इस विमान ने कारगिल युद्ध मे अपनी महती भूमिका निभाई थी। दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले इस योद्धा ने आज जोधपुर बेसकेम्प से आखिरी उड़ान भरी। इस उड़ान को देखने बड़ी संख्या में आम नागरिक और सेना के अफसर शामिल रहे। मिग विमानों ने लंबे समय तक भारतीय वायुसेना को मजबूत किया लेकिन अब बदलते वक्त के साथ इन्हें रिटायर करना पड़ रहा है। अब रफाल जैसे अत्याधुनिक विमान वायुसेना को मिलने जा रहे है और इसलिए मिग 27 को आज भावभीनी विदाई दे दी गयी है।

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इस (Cartoon On MiG 27) खबर को देखकर यकायक मन मे आया कि मिग 27 की तरह ‘आउटडेटेड’ हो चुके वृद्ध राजनेता इस तरह सम्मानपूर्वक राजनीति से सन्यास क्यों नही ले लेते? बेशक बुज़ुर्ग नेता अपनी पार्टी में मार्गदर्शक की भूमिका में बने रहें लेकिन चुनावी राजनीति को कम से कम उन्हें विदा कर देना चाहिए। नेताओ की रिटायरमेंट उम्र तय करने का हालांकि कोई तुक नही है। क्योंकि उम्र का फिटनेस से कोई सम्बन्ध रह नही गया है। कोई 70 की उम्र में भी फिट रहता है तो कई 45 तक पहुंचने से पहले ही ‘अनफिट’ हो जातें है।

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नेताओ को खुद ये सोचना चाहिए कि उन्हें आखिर कब तक सार्वजनिक जीवन मे रहना है? एक उम्र के बाद, एक मकसद हासिल हों जाने के बाद कार्यक्षेत्र से विदा लेना साहस और सम्मान का सूचक है। लेकिन आमतौर पर नेता अपने बाद अपने बेटे, संबंधियों को टिकट दिलाने, सरकारी ठेके दिलाने के लालच से सक्रिय राजनीति नही छोड़ पाते। लेकिन अगर वृद्ध नेता चुनावी राजनीति से बाहर निकल आये तभी उनके अनुभवों का असली लाभ लोकतंत्र को मिल सकता है। (Cartoon On MiG 27)

 

कल आरिफ मोहम्मद खान का एक इंटरव्यू देखा। वो चुनावी राजनीति एक अरसे से छोड़ चुकें है। उन्होंने जिस बेबाक अंदाज़ में अपनी बात रखी वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। कोई भी सक्रिय राजनीति में रहने वाला नेता इस तरह से अपनी बात नही रख सकता। उनका इंटरव्यू लेने वाली अरफ़ा खानम ने हर बार अपनी कट्टर विचारधारा को खान साहब पर लादने की कोशिश की लेकिन उन्होंने बड़ी साफगोई से अपनी बात रखी और अरफ़ा को हर बार अपने तर्कों से खामोश किया।

 

आरिफ मोहम्मद खान जैसे समझदार लोगों के विचार जिहाद और आतंकी विचारधारा का समूल नाश करने में सक्षम है। उनकी हर बात अनुभवजन्य और तथ्यपरक थी। अपनी बात स्पष्ट शब्दों में वो इसलिए रख सके क्योंकि उन्हें अब कोई चुनाव नही लड़ना है और न राजनीति करना है। देवबंद जैसे कट्टर मजहबी प्रतिष्ठानों पर उन्होंने करारे वार किए और साथ ही मुस्लिमो की बुनियादी समस्या पर भी प्रकाश डाला। भारत हर धर्म-मजहब को मानने वाले लोगों के लिए स्वर्ग है ये भी उन्होंने कहा। (Cartoon On MiG 27)

 

बहरहाल, मिग 27 से सम्मानजनक विदाई लेना भारत के नेताओं को सीखना है। अपने राजनीतिक, सामाजिक अनुभव का सही निचोड़ वो तभी जनता तक पहुंचा पाएंगे जब वो व्यक्तिगत हानि-लाभ से ऊपर उठ सकें। कार्यक्षेत्र का मोह छोड़ना आसान नही होता लेकिन खान साहब की तरह बेबाक बातें वही कर सकता है जो राजनीतिक नफे-नुकसान से ऊपर उठकर सोचने लगता है। व्यक्तिगत हानि-लाभ से ऊपर उठकर बात करने वालों की इस समय देश को बहुत जरूरत है।

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– सचिन पौराणिक

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