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मोदीजी को इस तरफ गौर ज़रूर करना चाहिए

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एक मैसेज सोशल मीडिया में कहीं पढ़ा था कि गरीबी में एक अलग ही तरह का जादू होता है। गरीब जिंदगीभर गरीब ही रहता है, लेकिन उसके नाम से लड़ाई लड़ने वाले जाने कैसे पैसे वाले बन जाते हैं ? बात बिल्कुल सही है। गरीबों, वंचितों, पिछड़ों, दलितों की लड़ाई लड़ने वाले किसी भी नेता को याद कर लीजिए और अनुमान लगाइये कि इस फ़र्ज़ी लड़ाई में इन्होंने कितना पैसा कमाया होगा? गाहे-बगाहे होने वाली ईडी, इनकम टैक्स और लोकायुक्त की कार्रवाई में इन नेताओं की संपत्ति की मात्र एक झलक देखने को मिलती है।

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असलियत यह है कि पिछड़ों की बात करने वाले लालू यादव, वंचितों की बात करने वाले मुलायम, दलितों की बात करने वाली मायावती और गरीबों की बात करने वाले नेताओं के पास इतनी दौलत है, जिसका कोई हिसाब ही नहीं है। नेता चाहे सवर्ण हो, दलित हो, पिछड़ा हो, अनुसूचित जाति का हो, लेकिन सिर्फ नेतागीरी से वे अकूत संपत्ति कैसे बना लेते हैं, यह बात किसी को समझ नहीं आती है। हजारों करोड़ की संपत्ति बनाने का फॉर्मूला सिर्फ इस कथित ‘जनता की लड़ाई’ में छुपा हुआ है।

यह एक बड़ी वजह है कि आजकल के लड़के नेतागीरी में अच्छा स्कोप देखने लगे हैं ।  गरीबों की यह कहानी आज इसलिए याद आ गई क्योंकि नोएडा के पास मायावती के भाई के एकमात्र 400 करोड़ के प्लॉट को आयकर विभाग ने जब्त किया है। 400 करोड़ का प्लॉट उस नेत्री के भाई का है, जो दलितों के नाम पर राजनीति करती है। बताया जाता है कि मायावती के पास भी अकूत दौलत है। कई बार उनके विरोधी भी उन्हें दलित की बजाय “दौलत की बेटी” कहते हैं। मायावती पर विधानसभा और लोकसभा के टिकट भी करोड़ों में बेचने का आरोप लगता रहता है। लखनऊ में यह भी चर्चा होती है कि बहनजी से मिलने का समाय लेने के भी लाखों रुपए लगते हैं। वैसे मायावती अकेली ऐसी नेत्री नहीं है, जिन पर काली कमाई का आरोप है।

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भारत की हर राजनीतिक पार्टी में ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्होंने राजनीति में आने के बाद अरबों रुपए कमाए। एक पार्षद भी जब लाखों रुपए की ऊपरी कमाई कर लेता है तो विधायक, महापौर, सांसद, मंत्रियों के कहने ही क्या ?  मोदीजी के नेतृत्व में हमें एक ईमानदार प्रधानमंत्री ज़रूर मिल गया है, लेकिन उनके मंत्रिमंडल में सभी ईमानदार है, ऐसा कतई नहीं है। निचले लेवल पर होने वाला भ्रष्टाचार आज भी जस का तस है। मायावती को अपने भाई की संपत्ति पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, लेकिन बजाय इसके वह केंद्र पर ही दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का आरोप लगा रही है। सवालों के जवाब देने के बजाय उलटे सवाल पूछना आजकल राजनीति में फैशन बन गया है।

अपनी एक गलती पर विरोधी की 10 गलतियां गिनाने से नेताओं को लगता है कि उनके ऊपर लगे दाग हल्के हो जाएंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। इससे सिर्फ नेता कितना बेशर्म है ये पता चलता है। जनता मन ही मन समझ जाती है कि नेताजी की चमड़ी बहुत मोटी है। प्रधानमंत्रीजी को विदेश और आम आदमी से काला धन निकलवाने के प्रयासों के बजाय थोड़ा प्रयास इन नेताओं के पास जमा काले धन को बाहर निकलवाने के लिए भी करना चाहिए।

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यहां कम प्रयासों में ज्यादा सफलता की उम्मीद है। नेताओं के पास इतनी दौलत है कि उन पर शिकंजा कसने पर देश के हाथ कुबेर का खजाना लग सकता है। माल्या, मोदी जैसे भगोड़ों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन इन सफेदपोशों पर कार्रवाई की रफ्तार बहुत सुस्त है। विकास की रफ्तार को थोड़ा ‘ब्रेक’ देकर भी यदि नेताओं पर कार्रवाई की जाए तो ये मुनाफे का ही सौदा है। मोदीजी पक्के व्यापारी है इसलिए उन्हें इस तरफ गौर जरूर करना चाहिये।

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