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Talented View :   मोदी सर्वमान्य वैश्विक नेता

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डिस्कवरी चैनल के चर्चित शो  ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ में कल का प्रसारण यादगार बन गया। बेयर ग्रिल्स के साथ प्रधानमंत्री मोदी की जुगलबंदी जिसने भी देखी वाहवाह कर उठा। ये शो उत्तराखंड के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों के बीच, घने जंगल मे शूट किया गया था। हेलीकॉप्टर से उतरते वक्त ही बेयर ग्रिल्स ने घोषणा कर दी थी कि जंगल की पगडंडी पर उन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिलने वाले हैं। वहां करीब 2 घन्टे इंतज़ार करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे और इसके बाद उनका जंगल का सफर शुरू हुआ।

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जंगल के खतरनाक माहौल में भी प्रधानमंत्री मोदी बेहद सहज नज़र आये। बेयर के साथ चर्चा में उन्होंने अपने पुराने दिनों की कई घटनाओं को याद किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि उनका बचपन अभावों में जरूर बीता लेकिन प्रकृति के साथ उनकी लयबद्धता हमेशा बनी रही। नमक लगी मिट्टी को इकट्ठा करके उससे कपड़ो को धोना, मगरमच्छ के बच्चे को नदी से उठाकर ले आना जैसी घटनाओं का जिक्र मोदी ने किया।

इस चर्चा में हिमालय में बिताए गए प्रधानमंत्री मोदी के जीवन के सबसे रहस्यमयी वर्षों की भी एक झलक दिखाई दी। मोदी ने बताया कि जब वो घर छोड़कर हिमालय में रहने आ गए थे तब उनकी मुलाकात कुछ दिव्य संतो से हुई थी। वो उन्ही के साथ रहते थे और उनकी ही तरह जीवन जीते थे। उन संतों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री की आंखों में एक अलग ही चमक दिखाई दे रही थी। उन्होंने स्वीकार किया कि संतो के सानिध्य में मिली ऊर्जा आज भी उनके तन-मन में बसी हुई है।

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भारत की जनता प्रकृति के साथ कैसे तारतम्य से रहती है इसके कुछ उदाहरण भी उन्होंने दिये। लकड़ी का व्यवसाय करने को लेकर उनकी दादी की सोच, पहली बरसात में सब रिश्तेदारों को पोस्टकार्ड लिखने की पिताजी की आदत और तुलसी विवाह जैसी परम्परा को भी उन्होंने विस्तार से समझाया। जंगल को खतरनाक बताने की बेयर की बात पर भी मोदी ने असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ अगर चला जाये तो प्रकृति हमारा संरक्षण करती है। प्रकृति के साथ संघर्ष हमारा स्वभाव ही नही है।

प्रकृति को मोदी ने  ‘मदर नेचर’ अर्थात प्रकृति माँ कहकर संबोधित किया। मतलब साफ था कि पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण हमारे स्वभाव में है। मोदी और बेयर के बीच कई बार हल्का-फुल्का मज़ाक भी हुआ। शो खत्म होने से पहले बेयर ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लिए एक प्रार्थना की। इसके जवाब में मोदी ने उन्हें बताया कि हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को मानने वाले लोग हैं। पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है, हम किसी को अपने से अलग नही मानते हैं।

ये बात सच है कि एसपीजी की पूरी टीम इस शो के दौरान प्रधानमंत्री के आसपास थी। हाथ से बनी डोंगी से नदी पार करने को लेकर भी एसपीजी सशंकित थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें समझाया। जंगल के बीच भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त कर रखा था। एक शो के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा को दांव पर नही लगाया जा सकता था, इसलिये ये लाज़िमी भी था। लेकिन हमे प्रधानमंत्री की तारीफ़ करनी होगी ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच के लिए।

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प्रधानमंत्री जो सोचते हैं और कार्यान्वित करते है वो किसी अन्य नेता के बस का नही है। प्रकृति के प्रति उनकी सोच वाकई अनुकरणीय है। प्रकृति, पर्यावरण और सहअस्तित्व की उनकी भावना विश्वभर के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। विरोधी मोदी के इस शो को पब्लिसिटी स्टंट कह सकते हैं,  लेकिन निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने से उनके इस आरोप में कोई दम नही रह जाता है। बेयर भी इस शो के बाद प्रधानमंत्री मोदी की सोच से प्रभावित दिखे। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि भारत को एक बेहद ऊर्जावान, नई सोच, नए विचार और दृढ़ संकल्प वाला प्रधानमंत्री मिला है। भारत के आगे अब मोदी सर्वमान्य वैश्विक नेता बनने की तरफ अग्रसर हो चुके हैं।

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