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Talented View : जितना दीदी का नुकसान, उतना भाजपा का फायदा

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क्रिकेट में जब बल्लेबाज़ पूरी तरह एकाग्र होकर बल्लेबाज़ी करने लगता है तो उसे आउट करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गेंदबाज के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए कई गेंदबाज ‘स्लेजिंग’ का सहारा लेते हैं। स्लेजिंग मतलब गाली-गलौज करने की प्रवृत्ति। गेंदबाज या फील्डर बल्लेबाज का ध्यान भंग करने के लिए और उसे उकसाने के लिए गाली-गलौज का सहारा लेते हैं। बल्लेबाज़ इन टिप्पणियों से विचलित हो जाते हैं और एकाग्रता खो बैठते हैं। एकाग्रता जाते ही बल्लेबाज़ गलती करते हैं और आउट हो जाते हैं।

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वैसे तो कई टीमें इस हथियार का सहारा लेती हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम स्लेजिंग के लिए विश्व में सबसे ज्यादा बदनाम है। ऐसा ही कुछ राजनीति में भी होता है। नेताओं के खिलाफ गाली का इस्तेमाल भी स्लेजिंग की तरह ही है। प्रधानमंत्री मोदी इन गाली-गलौज के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं, लेकिन मोदी इतने परिपक्व बल्लेबाज़ हैं, जिन पर इसका अंश मात्र भी प्रभाव नहीं पड़ता है। मोदी स्लेजिंग से निपटने में महारथ हासिल कर चुके हैं, लेकिन बाकी नेताओं के साथ ऐसा नहीं है।

वर्तमान हालातों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्लेजिंग की सबसे आसान शिकार दिखाई देती हैं। उन्हें उकसाने के लिए गाली की भी ज़रूरत नहीं पड़ती, वे सिर्फ ‘जय श्रीराम’ के नारे मात्र से भी उकसा जाती हैं। उनके एकाग्रता खोते ही भाजपा तुरन्त उन पर हावी हो जाती है। ममता दीदी ऐसी गलतियां लगातार कर रही हैं और शायद इसीलिए वे आपे से बाहर हो चुकी हैं। इस चिड़चिड़ेपन में ममता को कुछ ख्याल ही नहीं है कि वे क्या कर रही हैं और क्या कह रही हैं। कभी वे भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले करवाती हैं तो कभी प्रधानमंत्री मोदी के गाल पर थप्पड़ मारने की बात करती हैं।  कल अमित शाह के रोड शो में टीएमसी की छात्र विंग ने हमला कर दिया।

कहा जा रहा है कि शाह को मिल रहे जनसमर्थन की बौखलाहट में यह हमला किया गया है। इस हिंसा में कई भाजपा और टीएमसी वाले घायल हुए हैं। ऐसी हिंसक घटनाओं से ममता के प्रति जनता का “परसेप्शन” बिगड़ता जा रहा है। लोगों को लग रहा है कि संभावित हार की बौखलाहट में ये हमले अंजाम दिए जा रहे हैं। ऊपर से ममता की तुनकमिजाजी भी इन बातों की पुष्टि कर रही है। ऐसा लगने लगा है कि अपनी ज़मीन खिसकती देख टीएमसी कार्यकर्ता हिंसा पर उतर आए हैं।  ममता के साथ दिक्कत यह है कि उनके ये हथकंडे लेफ्ट और कांग्रेस के खिलाफ काम कर जाते हैं, लेकिन भाजपा के पास ऐसे हथकंडों का वैसा ही जवाब है। कैलाश विजयवर्गीय को बंगाल का प्रभारी इसीलिए बनाया गया है।

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कैलाश की छवि एक ऐसे नेता की है, जो अपने विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना जानते हैं। ममता के हर वार पर वे पलटवार कर रहे हैं और इसीलिए दीदी बहुत गुस्से में हैं। अमित शाह ने भी कैलाश को “फ्रीहैण्ड” दिया हुआ है। कैलाश के साथ बड़ी संख्या में देशभर से आए हुए भाजपा कार्यकर्ता भी बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। ममता के गुंडों को उन्हीं की भाषा में जवाब भी दिया जा रहा है, लेकिन बदनामी का ठीकरा सिर्फ टीएमसी के सिर फूट रहा है। लड़ाई और मारपीट में दोनों पक्षों को ही नुकसान होता है। 10-20 हजार के समूह पर कोई हमला करता है तो उसकी प्रतिक्रिया भी ज़रूर होती है। कल अमित शाह के रोड शो में इतना बवाल होने के बाद भी रोड शो तय जगह पर जाकर ही खत्म हुआ।

इससे भी साफ होता है कि बंगाल जीतने के लिए भाजपा कितनी दृढ़ संकल्पित है। दीदी ने बंगाल में हिंसा का तांडव मचा रखा है, लेकिन उसके बाद भी भाजपा मजबूती से किला लड़ा रही है। कैलाश विजयवर्गीय अपनी ‘स्लेजिंग’ द्वारा बंगाल में दीदी को उकसाने में पूरी तरह कामयाब हो रहे हैं। दीदी की एकाग्रता भंग हो चुकी है और वो उलजुलूल हरकतें करने लगी हैं। दीदी का विकेट गिराने के लिए जो रणनीति भाजपा ने बनाई थी उनमें वो सफल हो रहे हैं। राजनीति के इस क्रिकेट मैच में दीदी ‘स्लेजिंग’ की शिकार बन चुकी है। अब बस यह देखना बाकी है कि दीदी अपने नुकसान की कितनी भरपाई कर पाती है? दीदी का नुकसान जितना ज्यादा होगा भाजपा बंगाल में उतनी ही मजबूत हो जाएगी।

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