Talented View : बिन पेंदे का नेता

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राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ कह नही सकते। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे जब सामने आये तब ये लग रहा था कि महाराष्ट्र में आसानी से सरकार बन जाएगी और हरियाणा में पेंच फंसेगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। हरियाणा में गठबंधन सरकार बिना किसी रुकावट के बन गयी जबकि महाराष्ट्र में सत्ता का संघर्ष अब भी थमने का नाम नही ले रहा है। महाराष्ट्र में सत्ता के इस संघर्ष के बीच कई दलों मुखौटे उतर गए और उनका असली चेहरा जनता के सामने आ गया है।

Talented View : होटल की राजनीति

शिवसेना का हिंदुत्व का चोला उतर गया, कांग्रेस-एनसीपी का धर्म निरपेक्षता का चोला उतर गया तो भाजपा का नैतिकता वाला चोला भी उतर चुका है। महाराष्ट्र की जनता सत्ता का ये बेशर्म खेल झेलने पर मजबूर है। राज्य में चाहे ‘अघाड़ी’ की सरकार बने चाहे ‘पिछाड़ी’ की जनता की परवाह किसी को नही है। विधायकों को होटलों में घुमाया जा रहा है, उन पर नज़र रखी जा रही है, उन्हें किसी से मिलने नही दिया जा रहा है क्योंकि नेताओं को डर है कि माननीय कहीं ‘बिक’ न जाये।

Talented View : शिव नहीं बनी सेना

लेकिन माननीय भी कहाँ कम है? होटल के बाहर मौजूद उनके चेले उनकी तरफ से बराबर मौलभाव कर रहे है। आज कोर्ट ने विधानसभा में कल तक बहुमत परीक्षण कर लेने का निर्णय सुनाया है। इसका मतलब यही है कि आज विधायकों के पास बिकने का आखिरी मौका हैं। कल सदन में साफ हो जाएगा कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार अपनी सरकार बचा पायेंगे या नही? अगर एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन बहुमत परीक्षण में नाकाम रहता है तो इस गठबंधन के भविष्य पर ही प्रश्नचिन्ह लग जायेगा।

इससे पहले कल मुम्बई के एक महंगे होटल में हुई विधायको की परेड से भी कुछ दिलचस्प तस्वीरें देखने को मिली। रंगीन पेंट-शर्ट में शरद पवार की बगल में बैठे शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे सफेद कपड़े पहने नेताओं की भीड़ में अकेले दिखाई दे रहे थे। अपने घर ‘मातोश्री’ में बैठकर राज्य की सत्ता को दिशा देने वाले उद्धव मुख्यमंत्री बनने के लिए शरद पवार और सोनिया गांधी के साथ जा मिले है। इन्ही शरद पवार और सोनिया गांधी को बालासाहब ठाकरे पानी पी-पीकर कोसते थे। लेकिन सत्ता की चाह ने उद्धव को शरद पवार के बगल वाली कुर्सी तक पहुंचा दिया।

शिवसेना की नीतियों को कोसने वाली एनसीपी-कांग्रेस से भी सवाल पूछे जाने चाहिये। अजित पवार जैसे घोटालेबाज के साथ हाथ मिलाने वाली भाजपा भी सवालों से बच नही सकती। जनता की याददाश्त थोड़ी कमजोर होती है इसलिए याद दिला दूं कि ये अजित पवार वही है जिन्होंने 2013 में एक विवादित टिप्पणी की थी। सूखे से ग्रस्त महाराष्ट्र के किसानो और सूखे पड़े बांध के सवाल पर अजित पवार ने कहा था कि- “बांध में पानी नही तो मैं क्या उनमें पेशाब करूँ?”

Talented View :  सत्ता के लिए साथ-साथ

तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के इस बयान का सबसे ज्यादा विरोध भाजपा ने ही किया था। लेकिन बदले हालातों में आज शिवसेना उसी एनसीपी के साथ है तो भाजपा ने अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली है। आज हालात ऐसे हो गए है कि किसी नेता की बात पर यकीन करना मुश्किल हो चला है। एक शेर है-

राजा बोला रात है, रानी बोली रात है

मंत्री बोला रात है, संतरी बोला रात है

ये सुबह-सुबह की बात है..!

        – सचिन पौराणिक

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