Talented View : शिव अब नहीं रही सेना

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(Cartoon On Maharashtra Politics) गठबंधन धर्म की मजबूरियां अपने आप मे एक शक्ति भी है। ये शक्ति गीदड़ को शेर और शेर को गीदड़ बनाने की क्षमता रखती है। दो-तीन दलों वाले गठबंधन में ही जब नेताओं की ज़ुबान पर लगाम लग जाती है और पंख कतर दिए जातें है तब समझ आता है कि अटल बिहारी वाजपेयी को 13 दलों के सहयोग से सरकार चलाने में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा होगा। इसके बाद भी उन्होंने न सिर्फ महंगाई की गर्दन पकड़कर रखी बल्कि परमाणु परीक्षण कर भारत को महाशक्ति भी बना दिया।

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(Cartoon On Maharashtra Politics)  तब से हालात बहुत बदल चुके है लेकिन नही बदला तो गठबंधन की मजबूरियां। सत्ता का लालच जिसे राज्य के विकास का नाम दिया जाता है, शेर को न सिर्फ पिंजरे में खींच लाता है बल्कि बिल्ली की तरह मिमियाने पर भी मज़बूर कर देता है। शिवसेना के बड़बोले नेता संजय राउत ने स्वभाववश एक बयान दे दिया कि इंदिरा गांधी अंडरवर्ल्ड के डॉन करीम लाला से मिलने जाती थी। लेकिन महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की कुर्सी सम्हाल रही कांग्रेस ने इस पर मुखर विरोध दर्ज कराया। शिवसेना अपनी शेर वाली अकड़ में थी लेकिन कांग्रेस ने उन्हें तुरंत अपनी हैसियत दिखाते हुए समझा दिया की मुख्यमंत्री बने रहना है तो इस तरह की बतोलेबाज़ी नही चलेगी।

कांग्रेस (Cartoon On Maharashtra Politics) ने शिवसेना को और शिवसेना प्रमुख ने संजय राउत को समझाया तो राउत ने स्वामिभक्ति दिखाते हुए तुरन्त अपने बयान से पलटी मार ली। राउत बोले मेरा बयान गलत तरीके से पेश किया गया, मेरे बयान से किसी को दुख पहुंचाना या भावना आहत करना मेरा उद्देश्य नही था। राउत ने इस मामले को रफादफा करके स्वामी की कुर्सी बचानी चाही लेकिन तब तक रायता फैल चुका था। करीम लाला के साथ इंदिरा गांधी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगी और कई तरीक़े की बातें कही जाने लगी।

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(Cartoon On Maharashtra Politics) लेकिन कांग्रेस ने जहां करीम लाला पर शिवसेना से माफी मंगवा कर ही दम लिया वहीं सावरकर पर शिवसेना कांग्रेस के सामने आवाज़ भी ऊंची नही कर पायी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की कीमत उद्धव ठाकरे के साथ पूरी शिवसेना चुका रही है। सावरकर को कांग्रेस निरन्तर अपशब्दों से तौल रही है लेकिन शिवसेना में इतना आत्मसम्मान नही बचा की वो कांग्रेस से इस पर विरोध भी दर्ज करा सके। सत्ता के लालच में शेर का गीदड़ बन जाना ऐसा ही होता है।

मुख्यमंत्री पद की तृष्णा में उद्धव ये समझ ही नही पा रहें है कि कांग्रेस उनकी विचारधारा के साथ ही उनके वोटबैंक पर भी प्रहार कर रही है। शिवसेना सब कुछ सहने को इसलिये मज़बूर है क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए कांग्रेस का सहारा चाहिये। महाराष्ट्र सरकार गिरती है तो कांग्रेस को इससे ज्यादा फर्क नही पड़ेगा लेकिन शिवसेना का सबकुछ लूट जायेगा। इसी डर की वजह से एकतरफा समझौते शिवसेना को करने पड़ रहे है। (Cartoon On Maharashtra Politics)

(Cartoon On Maharashtra Politics)  ये समझौता सरकार शिवसेना के लिए घुटन भरी होती जा रहा है। कहतें है एकतरफा प्यार ज्यादा दिन नही टिकता लेकिन अब देखना ये है कि ये एकतरफा समझौते शिवसेना कितने दिन तक कर और सह पाती है? महाराष्ट्र में सरकार बनाना शिवसेना के लिए सांप-छछूंदर वाली स्थिति बन चुकी है। इसे उन्हें अब न निगलते बन रहा है और न ही उगलते।

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-सचिन पौराणिक

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