Talented View : ऊंट किस करवट बैठेगा

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महाराष्ट्र, हरियाणा की जनता का जनादेश आ चुका है। जनादेश ये साफ संकेत कर रहा है कि जनता सत्तारूढ़ दल से नाराज़ जरूर थी लेकिन विपक्ष भी उन्हें आकर्षक नही दिख रहा था। ‘विकल्पहीनता’ दोनो राज्यों के नतीज़ों का सबसे बड़ा फेक्टर बनकर सामने आया है। महाराष्ट्र में भाजपा-सेना के सामने कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन शुरुवात से ही कमज़ोर लग रहा था। एग्जिट पोल के रुझान भी तकरीबन यही दिखा रहे थे कि महाराष्ट्र में विपक्ष का सूपड़ा साफ है।

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लेकिन शरद पवार की एनसीपी का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर नज़र आ रहा है। अगर कांग्रेस भी आपसी सर-फुटव्वल से बच पाती और चुनाव को बेहतर ढंग से लड़ती तो तसवीर में बदलाव आ सकता था। महाराष्ट्र में भाजपा की पिछली बार से कम सीटों का असर सरकार चलाने के तरीक़े में दिखाई दे सकता है। शिवसेना उन्हें भीतर-भीतर परेशान कर सकती है। पिछली बार जब चारो दल अलग होकर महाराष्ट्र में चुनाव लड़े थे तब भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

उस वक्त एनसीपी ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने की बात करके शिवसेना के भाव कम कर दिए थे। इस बार भी एनसीपी जिस तरह से कांग्रेस पर हमलावर है उससे लगता है कि भाजपा को आफर देकर एनसीपी इस बार भी शिवसेना के अरमानों पर पानी फेर सकती है। उस स्थिति में शिवसेना कोई डिमांड या मौलभाव करने की स्थिति में नही होगी। भाजपा के लिए ये परिस्थिति फायदेमंद होगी।

इधर हरियाणा में जेजेपी यनेकी जननायक जनता पार्टी ने अपने प्रदर्शन से सबको चौंका दिया है। महज 10 महीने पहले बनी पार्टी के इस जुझारू प्रदर्शन के लिए दुष्यंत चौटाला बधाई के पात्र है। किन्तु सत्ता की चाभी अपने हाथ लगने का दावा करने वाली इस पार्टी का गणित बिगड़ भी सकता है। भाजपा अगर 40 सीटों से ऊपर निकल गयी तो फिर निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से सिंहासन तक खट्टर आसानी से पहुंच जाएंगे। लेकिन पल-पल बनते-बिगड़ते समीकरण भाजपा और कांग्रेस दोनो के लिए मंथन की आवश्यकता को इंगित कर रहे है।

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हरियाणा में राज्य के कई मंत्रियों समेत मौजूदा विधायक चुनाव हार रहे है। जनता का गुस्सा इससे दिखाई देता है। लेकिन रणदीप सुरजेवाला का चुनाव हारना भी तो कुछ दिखलाता है। जनता सरकार पर गुस्से के बावजूद कांग्रेस पर भरोसा जताने को तैयार नही है। भाजपा, कांग्रेस से इतर बड़ी संख्या में निर्दलीयों के जितने के भी गहरे मायने है।

महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व में फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। मध्यप्रदेश के झाबुआ उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया की जीत हो गयी है। इससे प्रदेश की सरकार को स्थिरता मिलेगी। कुलमिलाकर पेंच फंसा हुआ है हरियाणा में। भूपिंदर हुड्डा, मनोहरलाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला में से किसे सत्ता मिलेगी ये आंकड़ो, मैनेजमेंट और किस्मत पर तय होगा। विस्तृत आंकड़े आने में कुछ घंटे और है। लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की आशंका के बीच बड़े दलों ने जेजेपी और निर्दलीयों पर डोरे डालने अभी से शुरू कर दिए है।

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– सचिन पौराणिक

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