Talented View : राजनीति में नहीं चलती ईमानदारी

0

भारत की राजनीति में नैतिकता, ईमानदारी, सुचिता और गठबंधन धर्म निभाने की उम्मीद हर दल से की जाती है, लेकिन एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि ईमानदारी से चलने वालों को सत्ता कभी नसीब नही होती। सत्ता उसी दल को हासिल होती है, जो साम, दाम,  दंड,  भेद की राजनीति से परहेज़ नही करता। हालिया महाराष्ट्र के मामले में ये साफ समझ आ रहा है कि जोड़तोड़ अगर न होती तो कोई दल सरकार बनाने की स्थिति में नही होता और राज्य में राष्ट्रपति शासन ही लगाना पड़ता।

Talented View : बिन पेंदे का नेता

शिवसेना या उद्धव ठाकरे कभी मुख्यमंत्री पद तक नही पहुंच पाते, अगर वो पुरानी दोस्ती ही निभाते रहते। वो मुख्यमंत्री नही बन पाते अगर वो अपनी विचारधारा से समझौता न करते और वो मुख्यमंत्री हरगिज़ नही बन पाते अगर वो “मातो श्री” से बाहर नही निकलते। उद्धव अगर ‘वर्षा’ में पहुंच पा रहे हैं तो मातोश्री से कदम बाहर निकालने की वजह से ही। ठीक है उनके पिताजी बालासाहब इन दलों से दुश्मनी रखते थे। लेकिन जेल की चक्की पीसिंग एंड पीसिंग के साथ भाजपा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती है तो बाकी दल भी ऐसा कर ही सकतें है।

Talented View : होटल की राजनीति

सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी सत्ता से बाहर रहने पर महाराष्ट्र की जनता के मन मे भाजपा के प्रति सहानुभूति थी। जनता को ये अन्याय समझ आ रहा था कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में बैठने को मजबूर है। लेकिन अजित पवार से हाथ मिलाने पर अब जनता के मन मे किसी दल के प्रति कोई सहानुभूति नही बची है। अजित पवार जैसे पलटू नेता पर भरोसा भाजपा को महंगा पड़ा। लेकिन सत्ता के इस खेल में किसी को तो मात मिलना ही थी।

अब महाराष्ट्र की सरकार बनने में कोई समस्या नही है। लेकिन उद्धव मुख्यमंत्री रहते भी कोई कठोर कदम नही उठा पाएंगे। राजस्व, वित्त, लोकनिर्माण जैसे मलाईदार विभाग सहयोगी ले जाएंगे। एनसीपी और कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री होने के बाद भी उद्धव की नही बल्की अपने नेताओं के कहे अनुसार चलेंगे। उद्धव सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री होंगे। असली मुख्यमंत्री शरद पवार और पृथ्वीराज चव्हाण जैसे नेता होंगे।

भाजपा जिस प्रकार आक्रामक राजनीति कर रही है, उससे इस सरकार को छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है। केंद्र की मजबूत सरकार एजेंसियों के सहारे भी इस गठबंधन को कमजोर करने की पुरजोर कोशिश करेगी। अजित पवार को भ्रष्टाचार के मामले में मिली क्लीन चिट वापस हो सकती है। अजित पवार ने केंद्र से सीधे पंगा लेकर बड़ी मुसीबतों को न्यौता दे दिया है। मोदी-शाह की जोड़ी की हिटलिस्ट में अजित पवार आ चुके हैं। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

Talented View : शिव नहीं बनी सेना

बहरहाल, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन रहे हैं, इन्हें बधाई दी जानी चाहिये। एनसीपी, कांग्रेस भी बधाई की हकदार है। राह में भले ही मुश्किलें आएंगी, शुरुवात तो शानदार हो ही चुकी है। आज के दौर की भाजपा को पटखनी देना कोई आसान काम नही था। अब बस तीनो दलों को मिलकर साथ रहने की कोशिश करना होगी। तीन खंबों पर खड़ी सरकार को एक चौथे आपसी भरोसे के खंभे की सख्त जरूरत है। इसके अभाव में तीन खंबे कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं।

   – सचिन पौराणिक

Share.