Talented View : होटल की राजनीति

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महाराष्ट्र की सत्ता का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। राज्य में सत्ता के समीकरण इतनी तेज़ी से बदल रहे है कि टीवी चेनलो पर चुनाव परिणाम वाले दिन जैसा माहौल बना हुआ है। राज्य के हालातों पर पल-पल की ब्रेकिंग न्यूज़ जनता को परोसी जा रही। इधर भाजपा और अजित पवार 5 साल की स्थायी सरकार देने का दावा कर रहे है तो उधर शिवसेना,कांग्रेस और शरद पवार बहुमत का आंकड़ा उनके पास होने का दम भर रहे है।

Talented View : शिव नहीं बनी सेना

लेकिन सबसे विचारणीय बात ये है कि सभी दलों ने अपने विधायको को किसी न किसी होटल में कैद करके रखा हुआ है। हर पार्टी को डर है कि उनका विधायक लालच में आकर बिक सकता है। कोई नेता अपने विधायकों पर भरोसा करने को तैयार नही है। ऐसे में सवाल है कि अगर विधायक ही बेइमान है तो ये सब मिलकर ईमानदार सरकार कैसे बना सकतें है? जिस सरकार की बुनियाद में ही बेईमानी हो उससे ईमानदारी की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है?

Talented View :  सत्ता के लिए साथ-साथ

इधर एनसीपी में पवार परिवार के चाचा-भतीजे दोनो अपने दांवपेंच चलने में मशगूल है। भतीजे ने उपमुख्यमंत्री बनकर जहां चाचा को झटका दे दिया है वहीं चाचा भी ये आश्वस्त करने में लगे है कि पार्टी में अब भी उनकी ही चलती है। उत्तरप्रदेश के यादव कुनबे के बाद महाराष्ट्र में भी चाचा-भतीजे आमने-सामने आ गए है। यूपी में अखिलेश ने चाचा शिवपाल को चारों खाने चित किया तो महाराष्ट्र में भी आसार यही दिखाई दे रहे है कि अजित अपने चाचा को पटखनी देने में कामयाब हो जायेंगे।

शिवसेना के संजय राउत शिवाजी महाराज की दुहाई देते हुए अजित पवार को कोस रहे थे। लेकिन अगर सेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनती तब भी शायद उपमुख्यमंत्री पद अजित पवार को ही मिलना था। लेकिन ये कैसी नैतिकता की हम उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाये तो सही, कोई दूसरा बनाये तो गलत? रही बात अजित पवार के भ्रष्टाचार की, तो सवाल ये है कि किस नेता और पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप नही है? जिस कांग्रेस और एनसीपी  के साथ मिलकर शिवसेना सरकार बना रही है उनके नेता क्या दूध के धुले है?

सीबीआई, ईडी से नेताओं पर दबाव बनाना ऐसा काम है जिसे हर केंद्र सरकार करती आयी है। समझ नही आता जब राजनीति में हर दल बेईमान है तो किसी दल-विशेष से ईमानदारी, शुचिता की उम्मीद लगायी ही क्यों जाती है? महाराष्ट्र में पूर्ण बहुमत किसी दल के पास नही है तो जोड़तोड़ के बिना क्या सरकार बन सकती है? राजनीति में जोड़तोड़ तो होना ही है। क्योंकि ये जोड़तोड़ राजनीति का ऐसा ‘कोढ़’ बन चुका है जिसका कोई इलाज़ है ही नही।

Talented View : जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान

कोर्ट ने महाराष्ट्र मामले पर फैसला कल तक के लिए टाल दिया है। यनेकी कल का दिन भी महाराष्ट्र की राजनीति के नाम ही रहने वाला है। इसका मतलब ये भी है कि विधायकों के पास बिकने का आज फिर से एक मौका है। अपनी सही कीमत पहचानने के लिए उन्हें 24 घंटे की मोहलत और मिल गयी है। ये तो साफ ही है कि विधायक बिकेंगे नही तो सरकार बनेगी नही। सारी परिस्थितियों को देख-समझकर जनता को भी नेताओ से ईमानदारी की उम्मीद छोड़ देना चाहिये। ईमानदारी और राजनीति आज के दौर में साथ नही चल सकती।

– सचिन पौराणिक

 

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