Talented View : शिव नहीं बनी सेना

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सुबह चाय के साथ अखबार पढ़ने वाली जनता को आज टीवी देखने और न्यूज़ पोर्टल्स खंगालने पर मज़बूर होना पड़ गया। अखबार जहां उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनवा रहे थे वहीं टीवी देखने पर पता चला कि देवेंद्र फड़नवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चूके है। महाराष्ट्र के महानाटक का ऐसा पटाक्षेप होगा किसी ने कल्पना भी नही की थी। ये खबर कुछ ऐसी थी कि देखने-सुनने वाले हक्के-बक्के रह गए।

Talented View :  सत्ता के लिए साथ-साथ

सबसे पहले यही समझ आया कि ‘मोटा भाई’ अपना खेल दिखा चुकें है। इसके बाद प्रधानमंत्री के ट्वीट ने संकेत दे दिए कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के साथ बड़ा ‘खेल’ खेला जा चुका है। महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का सपना देखकर उठे उद्धव ठाकरे के लिये इस खबर पर विश्वास करना मुश्किल हो गया होगा। संजय राउत के मीडिया के सामने बस आंसू निकलने ही बाकी रह गए थे। शरद पवार खुद समझ नही पा रहे थे कि उनके साथ धोखा भतीजे ने कीया या फिर भाजपा ने?

Talented View : लाठी की आज़ादी

शिवसेना,कांग्रेस और एनसीपी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम ही बनाते रह गए और उधर सुबह-सवेरे शपथग्रहण भी सम्पन्न कर लिया गया। कांग्रेस और शिवसेना की स्थिति के बारे में तो क्या लिखा जाए ये भी समझ नही आ रहा है। विचारधारा से समझौता करके सत्ता के सपने संजोना कितना भारी पड़ सकता है ये आज दोनो दलों को समझ आ गया होगा। शरद पवार और उद्धव ठाकरे की साझा प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस का शामिल न होना ये संकेत है कि कांग्रेस को अपनी गलती समझ मे आ गयी है।

 

कांग्रेस अब दुबारा कभी एनसीपी पर भरोसा नही कर पायेगी। वैसे सूत्र ये बता रहे है कि एनसीपी में अजित पवार को अलग-थलग करने की कोशिशों का भाजपा ने फायदा उठाया है। उधर आज के प्रकरण के बाद शिवसेना का अपने विधायकों को टूट से बचाना बहुत मुश्किल रहने वाला है। कांग्रेस, एनसीपी जैसे विरोधी दलों के साथ सरकार बनाने की कवायद ने शिवसेना का काम तमाम कर दिया है। इससे पहले के आर्टिकल में ये साफ लिखा था कि ये सरकार बनेगी भी तो भी शिवसेना और कांग्रेस का नुकसान पक्का है।

 

लेकिन ये सब इतनी जल्दी होगा ये उम्मीद किसी को नही थी। सत्ता के चुम्बक के बिना अब शिवसेना और एनसीपी-कांग्रेस का गठबंधन जल्द ही चकनाचूर हो जाएगा। विधानसभा में बहुमत साबित करने में भाजपा को कोई दिक्कत नही आयेगी क्योंकि भाजपा वाले आजकल कच्ची हांडी पानी में नही तैराते। विधायकों की संख्या के पूरे गुणाभाग के बाद ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली गयी है। बल्कि बहुमत परीक्षण के वक्त एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना को पता चलेगा कि उनके कितने विधायक भाजपा से संपर्क में हैं।

Talented View : जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान

अमित शाह के महाराष्ट्र में खेले गए इस मास्टरस्ट्रोक को देखकर एक बार फिर ये सिद्ध हो गया है कि आधुनिक राजनीति के वो चाणक्य है। उनकी रणनीति से पार पाना विरोधियों के लिए असम्भव है। आज की तारीख महाराष्ट्र की राजनीति में सदा के लिए अंकित हो जाएगी। आज से शिवसेना और कांग्रेस की राज्य में उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। शिवसेना अब दुबारा हिंदुत्व पर लौटेगी तो भी उनकी राजनीति चमकने वाली नही। आज शिवसेना के लिए सिर्फ यही कहना है कि- “कौवा चला हंस की चाल, अपनी चाल भी भूल गया”

 – सचिन पौराणिक

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