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Talented View :  सत्ता के लिए साथ-साथ

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इतने दिनों के घमासान के बाद अब जाकर लगने लगा है कि महाराष्ट्र में सेना-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार मूर्त रूप ले लेगी। कांग्रेस-एनसीपी ने एक मैराथन मीटिंग के बाद सरकार बनाने के पक्ष में मूड बना लिया है।

लेकिन शरद पवार जैसे राजनीतिक चतुर और शिवसेना जैसी धूर्त पार्टी किस समय अपना पाला बदल लें इस बारे में अब भी कुछ कह नही सकते। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखकर लगता है इतना तो लगभग तय हो ही गया है की अपनी विचारधारा को बाजु में रखकर तीनो दल साथ चलने को राजी हो गए है।

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ये तीनो मिलकर कितने समय तक साथ चलेंगे ये वक्त बतायेगा। लेकिन इस अविश्वसनीय घटना का महाराष्ट्र की राजनीति में असर लंबे समय तक देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री पद पर अपना हक जताने वाली शिवसेना को अभी सबकुछ अपने हक में और अच्छा लग रहा है जैसे सावन को अंधे को हरा ही नज़र आता है। लेकिन सरकार जैसे जैसे आगे बढ़ेगी तब उन्हें पता चलेगा कि वो कितनी बड़ी मुसीबत में फंस चुके है।

राज्य की सबसे बड़ी और मजबूत पार्टी भाजपा जब विपक्ष में बैठकर दांव चलायेगी तो बैसाखियों के सहारे चल रही ये सरकार लड़खड़ाने पर मजबूर हो जायेगी। तब कांग्रेस और शिवसेना का वोटर उनसे पूछेगा की सत्ता के लिए आपने विचारधारा ही त्याग दी? तब इन नेताओं का कोई तर्क जनता के गुस्से को दबा नहीं पायेगा। कांग्रेस भले ही सरकार को बाहर से समर्थन करें, लेकिन इससे उनकी जवाबदेही कम नही हो जायेगी। जनता के ये चुभते सवाल दोनो दलों को परेशान करेंगे।

जब तक सत्ता रहेगी तब तक बेशक ज़मीनी हालातों का इन्हें पता न चले। लेकिन अगले चुनाव में, जो कि जल्द ही होंगे, ये दल जनता के सामने आने से घबराएंगे। हिंदुत्व और मराठी मानुष वाली शिवसेना अभी भले ही मुख्यमंत्री पद लेकर खुश हो जाए लेकिन इस कदम से उनकी पार्टी के अस्तित्व पर ही संकट आ सकता है। शिवसेना का कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने का दांव उल्टा पड़ने के 99% चांस है। लंबे अरसे में इस “महाशिव अघाड़ी” सरकार का सबसे ज्यादा नुकसान शिवसेना को ही होगा।

इस गठबंधन से शिवसेना के बाद दूसरे नंबर पर नुकसान में कांग्रेस रहेगी। कांग्रेस के बड़े नेता अभी से समझ रहे है कि ये गठबंधन कांग्रेस को कमजोर ही करेगा। इसीलिए गठबंधन में शामिल होने को लेकर कांग्रेस असमंजस में थी। लेकिन अब चूंकि वो सरकार बनवा रहे है इसलिए देशभर में इसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। मुस्लिमों की कई संस्थाओं ने पहले ही सोनिया गांधी को पत्र लिखकर शिवसेना के साथ न जाने की चेतावनी जारी कर दी है। कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम वोटबैंक पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

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एनसीपी को इस गठबंधन से फायदा नही तो कम से कम नुकसान भी नही होने वाला है। शरद पवार राजनीति के ऐसे ‘घाघ’ है जो शिवसेना, कांग्रेस दोनो को पानी पिला देंगे। उनके राजनीतिक अनुभव के चलते ही वो किसी नुकसान में नही रहने वाले है बल्कि जितने दिन तक ये सरकार चलेगी उसका सबसे ज्यादा फायदा शरद पवार ही उठायेंगे। गठबंधन के नुकसान की बात हम कर चुके। लेकिन इस गठबंधन से दीर्घकालिक फायदा सिर्फ भाजपा को होने वाला है।

शिवसेना के नेपथ्य में जाते ही राज्य में एकमात्र हिंदूवादी पार्टी भाजपा बचने वाली है। वोटों के ध्रुवीकरण में पीएचडी कर चुके भाजपा नेता अभी सरकार से बाहर जरूर है लेकिन वर्तमान हालातों का जबरदस्त फायदा उठाने की पटकथा उनके नेताओं द्वारा लिखी जा चुकी है। आने वाले समय मे भाजपा का महाराष्ट्र में निर्विवाद रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनना तय है। बालासाहब ठाकरे के जीवन पर बनी फ़िल्म ‘सरकार’ में सुभाष (बालासाहब) कहते है- “पास के फायदे से पहले दूर का नुकसान देखना चाहिए” काश ये फ़िल्म उद्धव और आदित्य ठाकरे ने देखी होती..!

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      – सचिन पौराणिक

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