Talented View : उल्टा असर भी डाल सकता है जमावड़ा

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बाज़ार में आपकी बाइक से कोई साइकिल वाला टकरा जाए तो वहां मौजूद लोगों की सहानुभूति किसकी तरफ रहेगी? स्वाभाविक तौर पर साइकिल वाले की तरफ। बिना यह जाने की गलती किसकी है जनता बाइक वाले को दोषी मानकर चलती है। ऐसे ही कभी आपकी बाइक की कार से टक्कर हो जाए, तब यही जनता कार वाले को दोषी मानकर चलती है, लेकिन इसी कार की टक्कर यदि किसी ट्रक से हो जाए तो जनता ट्रक वाले की गलती मानती है। ऐसे ही जब कुछ लोगों की भीड़ मिलकर किसी एक व्यक्ति को मारने लगती है, तब जनता क्या सोचती है?  जनता यही सोचती है कि बेचारे को ये घेरकर मार रहे हैं, कितने ज़ालिम हैं ये लोग। जनता का मनोविज्ञान यही है कि यदि किसी व्यक्ति को घेरा जा रहा है तो उनकी सहानुभूति उसके साथ हो जाती है।

ऐसे ही चुनाव में भी होता है। यदि किसी प्रत्याशी को रोकने या हराने के लिए सभी प्रतिद्वंद्वी साथ आ जाते हैं तो जनता की सहानुभूति भी अकेले पड़ चुके शख्स के साथ हो जाती है। ऐसे में जनता जाने-अनजाने उस शख्स को ही जिताने में लग जाती है। शनिवार को कोलकाता में हुए महागठबंधन के जमावड़े से यही संदेश देश में गया है कि एक अकेले शख्स को रोकने के लिए इतने दल जमा हो गए हैं। इस महागठबंधन का न कोई प्रधानमंत्री प्रत्याशी है, न कोई स्पष्ट नीतियां हैं, न कोई वैचारिक तालमेल है। न इन दलों प्रयास ईमानदार है और न ही गठबंधन का कोई नैतिक आधार।

देश को किस राह पर आगे ले जाना है, इसका भी कोई जवाब इनके पास नहीं है। इनका एकमात्र उद्देश्य है नरेंद्र मोदी को दोबारा भारत का प्रधानमंत्री बनने से रोकना। 2014  से पहले तक ये दल एक-दूसरे के खून के प्यासे थे। इनका आपस में कभी गठजोड़ होगा, यह सोचा भी नहीं जा सकता था। आपस में ये दल एक-दूसरे पर इतने साल तक आरोप-प्रत्यारोप कर चुके हैं कि इनकी वह आदत भी छूट नहीं पा रही है। इसकी बानगी भी महागठबंधन के मंच से देखने को मिल गई।

शरद यादव रफाल की जगह मंच से बार-बार बोफोर्स घोटाला बोलते नज़र आए। ममता ने फिर एक नेता को भेजकर यादव को संदेश भिजवाया कि बोफोर्स नहीं रफाल घोटाला बोलना है। अब शरद यादव की भी इसमें भला क्या गलती?  दशकों बीत गए उन्हें बोफोर्स घोटाला कहते-कहते, अब यह आदत इतनी आसानी से भला कैसे जा सकती है?  इसी बात से अंदाज़ लगाया जा सकता है कि यह महागठबंधन किस दिशा में जाएगा?

महागठबंधन के नेता एक मनोवैज्ञानिक भूल जो करते आ रहे हैं, वह भी यही है कि वे अपनी सारी ऊर्जा एक शख्स को रोकने पर लगा रहे हैं। देश की जनता यह देख रही है कि ये तमाम दल एक व्यक्ति विशेष को रोकने के लिए एकजुट हो रहे हैं। ऐसे में महागठबंधन को यह बात ख्याल में ले लेना चाहिए कि इससे कहीं उल्टे मोदीजी का ही फायदा न हो जाए ! इस देश की जनता बेहद भावुक है और ऐसे में यह जमावड़ा उल्टा असर भी डाल सकता है।

-सचिन पौराणिक

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