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शराब है ख़राब – भाग 2 : नशामुक्ति अभियान चलाएं

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बात चल रही थी शराब की। सरकार जितना पैसा शराब बेचकर नहीं कमाती, उससे कहीं ज्यादा पैसा स्वास्थ्य सुविधाओं और कैंसर से लड़ने में खर्च हो जाता है। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार को नई आबकारी नीति नहीं बनानी चाहिए ? शराब खुल्लमखुल्ला हर गली-मोहल्ले में बेचने से बेहतर है कि हर शहर में एक जगह तय कर दी जाए, जहां सभी लोग इकट्ठा होकर शराब पी सकें। यहां सुविधाओं और दाम के हिसाब से अलग जगह तय कर दी जाए, जिससे अमीर, गरीब, मध्यमवर्गीय हर शख्स अपने खर्च के हिसाब से यहां महफ़िल सजा सके।  इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों पर सख्ती से रोक लगाई जाए, जिससे शराब पीकर तमाशा करने वालों को सबक सिखाया जा सके।

शराब है ख़राब – भाग 1 : किस काम का ऐसा रेवेन्यू?

हकीक़त में शराब इतनी बुरी नहीं होती, जितना पीने वालों ने उसे बदनाम कर रखा है। शराब विदेशों में भी पी जाती है, लेकिन उसके बाद भी वे सभ्य इंसान बने रहते हैं। यहां भारत में दो पैग लगाने के बाद इंसान जानवर बन जाता है, सड़कों पर लौटने लगता है और बेवजह झगड़े करने लगता है। असल में इन्हीं लोगों ने शराब को बदनाम कर रखा है। कुछ बदलाव अगर ये कर दिए जाएं तो समाज के लिए यह बेहद शुभ होगा। पुलिस को भी शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई के लिए पूरे शहर में घूमना नहीं पड़ेगा। इस ज़ोन के बाहर पुलिस तैनात कर दी जाए, जो हर जाते हुए वाहन चालक का ‘ब्रीदिंग टेस्ट’ कर ले।

Talented View : जनता समझ रही पर्दे के पीछे का खेल

इसके अलावा होटल्स और बार को भी शराब परोसने के लाइसेंस दिए जाएं, लेकिन वहां भी कानून सख्त बनाया जाए, जिससे शराब पीकर वाहन न चलाए जाएं। इसके अलावा शराब पीकर सार्वजनिक जगहों पर हंगामा करने वालों के लिए कठोर कानूनी प्रावधान होने चाहिए। शराब पीने वाले के मन में यह खौफ होना चाहिए कि उसकी जरा सी गलती उसे सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है। शराब में मिलावट करने वालों और इसे बेचने वालों पर भी लगाम ज़रूरी है। हमेशा गरीब आदमी ही मिलावटी शराब पीकर मरता है। अमीर के लिए हमेशा कच्ची क्वालिटी की शराब उपलब्ध होती है।

कच्ची शराब अवैध रूप से बनाने और बेचने वाले सरकार को हजारों करोड़ के टैक्स की चपत लगा रहे हैं। सस्ते के चक्कर में गरीब आदमी इसे पीता है और मरता है। इन गरीबों की चिंता आज तक किसी ने नहीं की है। कच्ची, अवैध और मिलावटी शराब पर भी सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए। ये कुछ कदम यदि सरकार उठा ले तो इससे रेवेन्यू भी बढ़ेगा और समाज को भी राहत मिलेगी। बिना पूर्ण शराबबंदी किए भी हालात संभाले जा सकते हैं, लेकिन सरकार इस तरफ विचार करे तब न..! सरकार की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि वह दो कदम आगे बढ़ती है, उसके बाद दो कदम पीछे आ जाती है।

जनता को लगता है कि सरकार ‘कुछ’ कर रही है, लेकिन असल हालात जस के तस हैं। सरकार को शराब से पैसे कमाने और नैतिकता के बीच का रास्ता निकालना बंद कर देना चाहिए। दो नावों की सवारी नुकसान ही करती है| जिसे शराब पीना है, वह पीएगा ही चाहे बोतल पर कुछ भी लिखा हो इसलिए सरकार का स्टैंड साफ होना चाहिए कि यदि किसी को शराब पीना है तो ये कायदे-कानून हैं, जिनका पालन करना ज़रूरी है। सार्वजनिक स्थलों और अंधेरी गलियों में यदि कोई शराब पीता पाया जाए तो उस पर कठोर कार्रवाई कर भारी जुर्माना भी लगाया जाए। शराब निजी मनोरंजन, टाइमपास, पार्टी, गम भुलाने के लिए कोई पीना चाहता है तो बेशक पीए, कोई ऐतराज नहीं, लेकिन इससे जनता को तकलीफ होती है तो शराबियों को सबक सिखाया जाना चाहिए।

शराब से रेवेन्यू कमाना सरकार का काम है, लेकिन शराब से टूटते परिवारों को बचाना भी किसी की जिम्मेदारी तो होनी ही चाहिए। व्यापक पैमाने पर नशामुक्ति अभियान चलाकर इस बुरी आदत में फंस चुके लोगों को बचाया जा सकता है। समाजसेवी संगठनों के साथ मिलकर सरकार को इस तरफ भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि कई लोग शराब छोड़ना भी चाहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि ये कैसे हो सकता है? ऐसे लोगों का थोड़ा मनोबल बढ़ा दिया जाए और थोड़ी मदद की जाए तो ये भी इस लत से छुटकारा पाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं। सरकार को बोतल पर चेतावनी लिखने जैसे बचकाने उपायों को छोड़कर इन कारगर उपायों की तरफ ध्यान देना चाहिए। नशामुक्त समाज देश की आवश्यकता है और देशहित में हमें इस बुराई से लड़ना पड़ेगा।

Talented View : आजकल मनुष्य को हारना स्वीकार नहीं

-सचिन पौराणिक

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