Talented View : दोहरी मानसिकता के लोगों की सच्चाई

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फटाखों पर हंगामे के बीच दिवाली देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए फटाखे छोड़ने पर कुछ पाबंदियां लगाई गई थी। ये बात दीगर है कि दिल्ली में प्रदूषण दिवाली से पहले ही बहुत बढ़ चुका था। प्रदूषण की असली वजह फटाखे नही बल्कि दूसरी है, लेकिन उसके बाद भी तमाम प्रतिबंध फटाखों पर ही लगा दिए जाते हैं। दिल्ली के ही पूर्व आप नेता और वर्तमान भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने फटाखों पर इस प्रतिबंध के विरोध में अपनी आवाज़ मुखर की थी।

Talented View : ऑफ-ऑन के बीच फंसा बाज़ार

कपिल मिश्रा ने एक परिवार के 8-10 बच्चों की एक तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि “प्रदूषण कम करना है तो ये वाले फटाखे कम करो, दीवाली के फटाखे नही” उनके इस ट्वीट के सामने आते ही तमाम बुद्धिजीवी, पत्रकार और टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य उन पर टूट पड़े। पत्रकार अभिसार शर्मा, स्वाति चतुर्वेदी, अभिनेता एज़ाज़ खान समेत कई हस्तियो ने कपिल को जैल भेजने की वकालत की। इसके जवाब में कपिल मिश्रा के समर्थकों ने ट्विटर पर आई स्टैंड विथ कपिल मिश्रा (#IStansWithKapilMishra) के नाम से ट्रेंड चलाकर उनके समर्थन में हजारों ट्वीट किये।

Talented View : जोड़-तोड़ की कुर्सी

पब्लिसिटी के भूखे एक तथाकथित एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण के लिए एफआईआर भी दर्ज करवा दी। कपिल मिश्रा का कहना है कि फटाखों पर प्रतिबंध के खिलाफ आवाज़ उठाने की वजह से ये लोग इन्हें निशाने पर ले रहे हैं, लेकिन इस विरोध के बीच असली प्रश्न जो उन्होंने उठाया था, वो कहीं खो गया। सवाल ये था कि बेतहाशा जनसंख्या को कंट्रोल करना जरूरी है या नही? देश के साधन सीमित है, ऐसे में जनसंख्या विस्फोट रोकना चाहिए या नही?

 

देश मे 1 या दो बच्चो की नीति सख्ती से लागू किये बिना ये काम कभी नही हो सकता। इस कानून में ये प्रावधान होने चाहिए कि अगर किसी को 2 से ज्यादा बच्चे पैदा करने है तो उसकी इनकम भी उस अनुपात में होना चाहिए। अगर इनकम ज्यादा नहीं तो बच्चे पैदा करने का अधिकार नही होना चाहिए। ऐसा अनन्तकाल तक नही चल सकता है। पंचर बनाने वाले 10-10 बच्चे पैदा करे और भारत को गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा की तरफ धकेलते रहे। अपने मजहब की संख्या बढ़ाने अथवा और जिहादी मानसिकता की वजह से बढ़ने वाली जनसंख्या पर लगाम लगाना आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Talented View : ऊंट किस करवट बैठेगा

लेकिन आजकल देश मे ये ट्रेंड चला हुआ है कि ऐसे सवाल उठाने वाले पर इतने हमले करो कि इससे असल सवाल ही कहीं गुम हो जाये। अब कपिल मिश्रा ने कुछ गलत कहा तो उस पर चर्चा हो, विमर्श हो, लेकिन मुद्दे की जगह व्यक्ति को विवादों में घसीटने का भला क्या तुक है? जनसंख्या नियंत्रण की बात करना कोई गुनाह है क्या? जनसंख्या नियंत्रण की जद में जब हर धर्म, मजहब को आना है, तो हंगामा सिर्फ एक के लिए क्यों मचाया जा रहा है? जनसंख्या पर लगाम लगे इसमें किसी को क्या आपत्ति होना चाहिये? लेकिन हर बात में मजहब को बीच में  घसीटकर हंगामा क्यों शुरु कर दिया जाता है?

आश्चर्य इस बात पर भी है कि जब हिन्दू आस्था पर उंगली उठाई जाती है तब ये लोग कभी एक शब्द नही कहते, लेकिन जब बात ‘वर्गविशेष’ पर आती है तो ये लोग तत्काल अपनी दुकानदारी सज़ा लेते हैं, एफआईआर करवा देते हैं और विरोध-विरोध खेलने लग जाते हैं। इन दोहरी मानसिकता के लोगों की सच्चाई जनता को समझना चाहिए। बाकी कपिल मिश्रा ने कुछ गलत नही कहा। बजाय हंगामा मचाने के उनकी कही बातों को सही अर्थ में देखने की जरूरत है।

 

  – सचिन पौराणिक

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