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Talented View : भारत धर्म या शरिया से चलने वाला इस्लामिक देश?

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आखिर कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari) जिबह कर ही दिए गए। पैगम्बर मोहम्मद को लेकर 2015 में उनके द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के बाद से वो मजहबी उन्मादियों के निशाने पर थे। कई मौलानाओं ने उनका सर काटकर लाने वाले को 50 लाख का इनाम देने की घोषणा की थी। आईएसएस के आतंकवादी तक कमलेश तिवारी की जान के दुश्मन बन बैठे थे। उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही थी, उनके खिलाफ फतवे जारी किए जा रहे थे।

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कल आखिरकार शैतानो को मौका मिला और उन्होने कमलेश का गला काटकर, उसके बाद गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी। पिस्तौल होते हुए भी गला रेतकर हत्या करने से स्पष्ट हो जाता है कि ये हत्या साधारण हत्या नही बल्कि उसके पीछे मजहबी तकरीरे और फतवे जिम्मेदार है। कमलेश (Cartoon On Kamlesh Tiwari) का कसूर ये था कि उन्होंने गलत टिप्पणी की। इसके लिए उन पर केस दर्ज है और जेल में रहकर आये है। कानून अपना काम अब भी कर रहा था। लेकिन ये कौन लोग है, जिन्हें न कानून पर भरोसा है और न ही संविधान पर?

आपत्तिजनक टिप्पणी की बात करें, तो अनगिनत लोगों ने भगवान राम और हिन्दू देवी-देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणियां की है। उन पर धार्मिक भावना भड़काने के केस भी दर्ज़ हुए हैं। लेकिन उनकी हत्या नही की गई। वो आज भी आज़ाद घूम रहे हैं। लेकिन मजहब विशेष के ऊपर टिप्पणी करने पर इतनी असहिष्णुता क्यों फैल जाती है? क्यों तब कानून और विश्वास रखने की बजाय सिर कलम करने के फतवे जारी किये जातें है? भारत धर्म निरपेक्ष देश है या शरिया से चलने वाला इस्लामिक देश?

इसके अलावा इस विषय पर सबसे बड़ा दोगलापन खान मार्केट गैंग, बुद्धिजीवी गैंग, मोमबत्ती ब्रिगेड, अवार्ड वापसी गिरोह और कलाकारों का सामने आया है। मजहब विशेष पर मात्र एक टिप्पणी करने पर देश मे हत्याएं की जा रही है और अब देश मे किसी को असहिष्णुता नज़र नही आ रही है। मरने वाला कमलेश तिवारी है इसलिए कोई आवाज़ उठाने को तैयार नही है। अखलाक, तबरेज़ की मौत पर आसमान सिर पर उठाने वाले कमलेश की मौत पर शातिराना चुप्पी साधे हुए है।

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पहले बंगाल में एक संघ कार्यकर्ता की गर्भवती पत्नी के साथ बच्चे की गला काटकर हत्या और अब लखनऊ में दिनदहाड़े कमलेश का गला काटकर हत्या करने के बाद अगला नंबर किसका है? क्या हम सुरक्षित है? क्या सरकारें और पुलिस हमारी सुरक्षा करने में सक्षम है? कानून-व्यवस्था इतनी लचर क्यों है कि किसी का सिर काटकर लाने की धमकी देने वाले मौलाना खुलेआम घुमतें हैं? उन पर कोई कार्यवाही नही होती जबकि छोटे-मोटे झगड़ो में पुलिस आम आदमी को थाने पर बैठा लेती है?

कमलेश की हत्या यूपी में हुई है इसलिए सरकार इसकी जिम्मेदारी से भाग नही सकती। योगी महाराज की पुलिस आखिर क्या कर रही है? योगीराज़ में हिन्दू सुरक्षित नही होंगे तो फिर कहाँ होंगे? अली-बजरंगबली, श्मशान-कब्रिस्तान क्या सिर्फ चुनाव जीतने तक ही सीमित थे? सत्ता आते ही धर्म-निरपेक्षता का झूठा आवरण क्यों ओढ़ लिया जाता है? जहर फैलाने वाले मौलानाओं को तुरन्त गिरफ्तार क्यों नही किया जाता? देश कानून से चलेगा कि फतवों से?

धर्म-मजहब के नाम पर किसी की हत्या कतई जायज़ नही ठहराई जा सकती। अगर कोई किसी धर्म-मजहब पर गलत टिप्पणी कर भी दे तो उसके लिए कानून है। फतवे, धमकी हत्या किसी समस्या का समाधान नही है। अब योगी सरकार को हत्यारो को शीघ्र गिरफ्तार करके ऐसी सज़ा देनी चाहिए जिससे बाकी अपराधियों को संदेश मिल सके। बाकी कमलेश तिवारी के लिए चुप्पी और तबरेज़ की मौत को तमाशा बनाने वालों की शक्लें जनता याद रखे। इन लोगों के दोहरे रवैये को भी जनता याद रखे। ये भी जनता जान ले कि इन लोगों की बातें नौटंकी से ज्यादा कुछ नही है।

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            – सचिन पौराणिक

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