राजनीति के इस हमाम में सभी नग्न

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एक किस्सा सुना था मैंने कि एक पत्नी ने शादी की 25वीं वर्षगांठ मनाने के अगले दिन ही अपने पति से तलाक की अर्जी लगा दी। शादी के पच्चीस साल बाद तलाक की अर्जी से जज साहब भी हैरान थे। जज ने पूछा महिला से कि ये इतने सालों बाद अचानक तलाक की बात आपके मन में कैसे आ गई? महिला ने कहा कि मेरे पति बेवफा है। जज ने पूछा, 25 साल बाद आपको कैसे इल्म हो गया कि आपके पति बेवफा हैं? क्योंकि कल तक आप लोग साथ में मजे से रह रहे थे।  तब महिला ने बताया कि शादी की सालगिरह मनाने अगले दिन जब मैं पुराना एल्बम देख रही थी तो मुझे एहसास हुआ कि हमारे पांचों बच्चों में से एक भी इनके जैसा नहीं दिखता। सब बच्चों में से किसी की आदतें भी इनसे मेल नहीं खाती। इसका मतलब साफ है कि ये बेवफा हैं। ये आज तक मेरे साथ बेवफाई करते आ रहे थे। जज साहब, वकील, वहां उपस्थित लोग और पति इस दलील को सुनकर हैरान-परेशान हो गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि महिला की दलीलों को सुनकर हंसा जाए या रोया जाए?  दूसरों पर बेवफाई का इल्ज़ाम लगाने वाले ज्यादातर लोग इन मोहतरमा की तरह ही खुद को आईने में देखना भूल जाते हैं।

कल से कांग्रेस नेता कमलनाथ का एक वीडियो फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे मुस्लिम बूथों पर 90%वोटिंग करवाने की बात कर रहे हैं। कमलनाथ का कहना था कि यदि मुस्लिम मोहल्लों में भी सिर्फ 60% ही मतदान हुआ तो इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। इसके पहले भी कमलनाथ का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे हिन्दू-मुस्लिम करते दिखाई दे रहे थे। मध्यप्रदेश में मतदान से करीब हफ्ता भर पहले सामने आए इस वीडियो से राजनीतिक खलबली तेज़ हो गई है। भाजपा ने कमलनाथ के वीडियो को मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़ते हुए तुरंत मजहब की राजनीति करने का आरोप मढ़ दिया, लेकिन इस वीडियो से यह सवाल खड़े हो गए हैं कि बार-बार कमलनाथ के वीडियो लीक होने का क्या मतलब है? किसी साजिश के तहत ये वीडियो लीक हो रहे हैं या यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का गिरता स्तर है,  लेकिन भाजपा ने जिस तरह आक्रामक अंदाज़ में कांग्रेस पर हमला बोला है, उससे कांग्रेस एक बार फिर ‘बैकफूट’ पर आ गयी है।

असली सवाल यह है कि कांग्रेस को मुस्लिमों के वोट चाहिए तो क्या भाजपा हिन्दू वोटों की राजनीति नहीं करती? ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ कहने वाले किस धर्म के वोटों को ध्यान में रखकर ऐसा कहते हों? कितनी हास्यास्पद बात है कि माथे पर त्रिपुंड लगाकर संबित पात्रा प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कांग्रेस पर धर्म की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं? जनता भी जानना चाहती है कि जब चुनाव ‘हिन्दू-मुसलमान’ पर ही लड़ना है तो विकास का ढोल बजाने का क्या मतलब है? भाजपा को कांग्रेस पर धर्म की आड़ में वोट मांगने का आरोप लगाते देखकर अनायास ही ये किस्सा याद आ गया, जिसमें महिला अपने पति पर बेवफाई का आरोप लगा रही थी। कांग्रेस को मुस्लिमों के वोट चाहिए और आपको हिंदुओं के चाहिए, दोनों में बुनियादी फर्क क्या हुआ? जनता भी यह समझ रही है कि राजनीति के इस हमाम में सभी नग्न हैं। बेवफा दोनों ही हैं, लेकिन दूसरे पर आरोप लगाने से पहले खुद की सूरत कोई देखने को तैयार ही नहीं है।

-सचिन पौराणिक

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