Talented View : पढ़ने नहीं लड़ने का गुरुकुल

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जिस किसी कॉलेज में छात्र संघ की राजनीति (Cartoon On JNU Violence) होती है वहां छात्रों में आपस में झड़प होती ही है। छात्र राजनीति एक ऐसा नशा है जो आसानी से उतरता नही। इसीलिए देश की ज्यादातर शिक्षण संस्थाओं में छात्र राजनीति को कभी पनपने नही दिया जाता। राजनीति के अभाव में सभी अपना ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर लगातें है और अपने भविष्य पर ही केंद्रित रहतें है। लेकिन जिन संस्थाओं में राजनीति होती है उनका हाल फिर जेएनयू जैसा हो जाता है।

Talented View : महागठबंधन की विडंबना…

Cartoon On JNU Violence | Latest News Updates On Talented India

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Cartoon On JNU Violence) कल रात से फिर सुर्खियों में है। इस बार सुर्खियों की वजह भारत की बर्बादी के नारे नही बल्कि छात्रों का आपसी खूनी विवाद है।लेकिन इस विवाद में कोसा केंद्र सरकार को जा रहा है और लानतें ग्रह मंत्रालय को भेजी जा रही है। मामला कुछ यूं था कि कल रात कुछ नकाबपोश जेएनयू में दाखिल होतें है और लाठी-डंडों से छात्र-छात्राओं पर हमला कर देतें है। इस हमले में छात्रों के अलावा कुछ फैकल्टीज को भी चोट पहुंचती है।

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लेकिन जो बात संदेहास्पद है (Cartoon On JNU Violence) वो ये की इस घटना के तुरंत बाद कैसे राजनीति शुरू हो जाती है? घटना के मिनटों बाद ही योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) वहां कैसे पहुंच जातें है? कैसे ट्विटर पर लगातार फिल्मी हस्तियों के ट्वीट आने शुरू हो जातें है और कैसे स्वरा भास्कर जैसे एजेंडा कलाकार इस घटना पर आंसू बहाते हुए वीडियो जारी कर देते है? समझ नही आता कि घटना के लिए तत्काल, बिना किसी जांच के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को दोषी कैसे करार दे दिया जाता है? सब कुछ इतनी जल्दबाजी में कैसे हो सकता है?

अलका लांबा रात को ही जेएनयू पहुंच जाती है, प्रियंका वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) तुरंत अस्पताल जाकर घायल छात्रों से मिल आती है और इस घटना को केंद्र की छात्रों के प्रति दमनकारी नीति दिखला दिया जाता है? आखिर ये प्रचार क्या सिद्ध करता है? आनन-फानन में रविवार रात हुए इस घटनाक्रम की व्यापक समीक्षा और जांच की जरूरत है। ये कोई सामान्य घटना नही है क्योंकि जिस तरह नकाबपोश यूनिवर्सिटी में दाखिल हुए उसे देखकर समझ आता है कि ये घटना प्लानिंग के साथ अंजाम दी गयी है।

लेकिन सवाल वही है कि ऐसी सारी घटनाएं जामिया, एएमयू (AMU) और जेएनयू (Cartoon On JNU Violence) में ही क्यों होती है? बाकी यूनिवर्सिटी में क्या छात्र नही पढ़ते? या फिर ये यूनिवर्सिटी इस तरह के प्रदर्शन का अड्डा बन गयी है? केजरीवाल से लेकर ममता तक जिस तरह पूरा विपक्ष इस घटना पर सरकार को घेरने में लगा है वो अपने आप मे एक प्रश्नचिन्ह है। छात्रो की हिंसा, लड़ाई में राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े चेहरों का भला क्या काम है? इस मामले को तूल दिए जाने के पीछे कुछ साजिश तो जरूर है जिसका जांच के बाद खुलासा होना चाहिये।

बहरहाल, ये घटना निंदनीय है इसमें कोई संशय नही है (Cartoon On JNU Violence)। इस तरह की हिंसा का कोई भी समर्थन नही कर सकता। लेकिन जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। ये मामला इतना सीधा है नही जितना दिखाई दे रहा है। इसलिए अभी नेताओं को थोड़े संयम के साथ काम लेना चाहिये। उन्हें छात्रों को भड़काने की बजाय उन्हें समझाने का काम करना चाहिए। जेएनयू प्रशासन को भी अपने छात्रों को राजनीतिक मोहरा बनने से बचाना होगा। इस तरह के आपराधिक कृत्यों में शामिल होकर छात्र सबसे ज्यादा खुद का ही नुकसान कर रहे है।

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– सचिन पौराणिक

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