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Talented View : लाठी की आज़ादी

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के आज़ादी मांगने वाले छात्रों ने देश की संसद की तरफ मार्च निकाला। स्वाभाविक तौर पर पुलिस ने उन्हें संसद पहुंचने से रोकने के लिए जगह-जगह बेरिकेडिंग लगाई। लेकिन आज़ादी गैंग के छात्र दूसरे रास्तों से संसद की तरफ पहुंचने लगे। पुलिस द्वारा उन्हें रोकने की कोशिशें लगातार की जाती रही लेकिन उसके बाद भी छात्र संसद की तरफ बढ़ने की ज़िद पर अड़े रहे।

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इससे पहले जब छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिली तो पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने यूनिवर्सिटी की घेराबंदी करके छात्रों को रोकने की कोशिश की। लेकिन छात्र पुलिस को छकाते हुए अलग-अलग समूहों में संसद की तरफ बढ़ने लगे। छात्रों की मांग थी कि बड़ी हुई फीस और होस्टल का किराया वापस लिया जाये। छात्रों को फिर से 10 रुपये महीने में होस्टल का कमरा चाहिए था। अपनी इस मांग के लिए उन्होंने संसद पहुँचकर विरोध करने की सोची।

लेकिन जब पुलिस द्वारा बार-बार आगाह करने के बाद भी छात्र नही माने और बेरिकेड कूदकर आगे बढ़ने लगें तब मजबूरन पुलिस ने छात्रों को आज़ादी बांटना शुरू कर दी। पुलिस के लाठीचार्ज से जेएनयू के छात्रों में अफरातफरी मच गयी। पुलिस ने भी छात्रों की सारी मुग़ालते दूर करते हुए जमकर आज़ादी बांटी। लाठी-डंडों से जेएनयू छात्रों की कुटाई का देश ने भरपूर आनंद लिया। छात्रों की पुलिस द्वारा पिटाई के वीडियो सोशल मीडिया पर छाये रहे।

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ज्यादातर जनता पुलिस के लाठीचार्ज से सहमत दिखाई दी। कुछ विघ्नसंतोषी नेताओं ने जरूर पुलिस की कार्यवाही का विरोध किया लेकिन कई लोगों को ये भी महसूस हुआ कि पुलिस ने कम लाठीचार्ज किया। देश से आज़ादी और टुकड़े-टुकड़े के नारे लगाने वालों की इतनी पिटाई बहुत कम है। सभी समझ रहे थे कि छात्रों की  मांगे बिल्कुल अव्यवहारिक है। 10 रुपये महीने में कमरे के लिए संसद का घेराव करने वाले छात्रों की ताबड़तोड़ कुटाई की जानी चाहिये थी।

जेएनयू छात्रों को समझना होगा कि केम्पस के बाहर भी एक दुनिया है। केम्पस में अपनी मनमानी करने वाले छात्र अगर सड़को पर अराजकता फैलाएंगे तो ऐसे ही कूटे जाएंगे। पुलिस को भी अब एक कदम आगे बढ़कर यूनिवर्सिटी केम्पस के अंदर घुसकर भी छात्रों को आज़ादी देना शुरू कर देना चाहिए। सही मायनों में विद्यार्थी सिर्फ अपनी पढ़ाई से मतलब रखतें है। लेकिन जेएनयू के ये छात्र देश की सम्प्रुभता को खुली चुनौती दे रहे है। इनका पक्का इलाज़ किया जाना चाहिए।

कुलमिलाकर जेएनयू के छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज से देशभक्तों के कलेजे को ठंडक पहुंची है। दिल्ली पुलिस को इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम हर महीने करने चाहिये। एक बार पुलिस को अपने तरीक़े से जेएनयू छात्रों को आज़ादी बांटने की छूट मिल जाएगी तो इसके बाद जेएनयू से कभी देशद्रोही नारे सुनाई नही देंगे। हम लौग पुलिस की ताकत को हमेशा कम करके आंकते है। जबकि हक़ीक़त में पुलिस को खुली छूट मिल जाये तो अपराधी घरों से बाहर निकलने में भी कांपने लगेंगे। दिल्ली पुलिस जेएनयू के टुकड़े-टुकड़े वालो का भी इलाज़ करने में सक्षम है। पुलिस को यूनिवर्सिटी में कार्यवाही की छूट देने भर की देर है। जिस दिन पुलिस को ये छूट मिल गयी उस दिन से जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े गैंग की उल्टी गिनती शुरू हो जायेगी।

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 – सचिन पौराणिक

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