Talented View : विश्वयुद्ध का आगाज़

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जिस बात का डर था आखिर वही हुआ। ईरान ने अमेरिका (Cartoon On Iran America War) के तीन सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर दिया। हमले में अमरीकी बेस को कितना नुकसान हुआ इसका आकलन अभी नही हो पाया है लेकिन इतना तय है कि अब मध्य-पूर्व समेत पूरी दुनिया में अस्थिरता बढ़ने वाली है। अगर परिस्थितियों में तनाव घुलता है तो भारत के लिए ये खतरे की घंटी है। तेल के भाव बढ़ने से कई ज्यादा नुकसान इस जंग का भारत को झेलना पड़ सकता है।

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ईरान (Cartoon On Iran America War) एक छोटा देश जरूर है लेकिन अपने शीर्ष कमांडर की मौत का बदला लेने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है। अमेरिका (America) के सामने ईरान की बहुत ज्यादा हैसियत नही है लेकिन वो अमेरिका को बड़ा नुकसान जरूर पहुंचा सकता है। सीधे जंग का खतरा अमेरिका के साथ ही इजराइल और इंग्लैंड पर भी मंडरा रहा है। ईरान अमेरिकी ठिकानों के साथ मित्र देशो और दुनिया भर में अमेरिकियों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस हमले के साथ ही ईरान ने अपने इरादे साफ कर दिए है कि वो चुप नही बैठने वाला।

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यूएई (UPI) और सऊदी अमेरिका (Saudi America)के साथ है इसलिए ईरान (Cartoon On Iran America War) इन्हें भी निशाना बना सकता है। और ऐसा होता है तो मध्य पूर्व के हालात ऐसे बन जाएंगे कि अप्रवासी भारतीयों को वहां से निकलना होगा। एक अनुमान के मुताबिक भारत के करीब 80 लाख लोग खड़ी देशो में नौकरी, व्यापार करतें है। ये लौग भारत मे विदेशी पैसा पहुंचाते हैं और भारत की इकॉनोमी को मजबूत करतें है। ये लौग अगर भारत लौटतें है तो न सिर्फ भारत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा बल्कि इनके लिए रोजगार उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती बन जाएगी।

(Cartoon On Iran America War) भारत से ज्यादातर कामगार सऊदी (Saudi) , यूएई (UAE), ओमान (Oman), कुवैत (Kuwait) जैसे खाड़ी देशों में काम के लिए जातें है। हर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन युद्ध के हालात में इन्हें वहां से निकालना भी बड़ी चुनौती बन जायेगा। इतनी बड़ी संख्या को एयरलिफ्ट करना भी आसान नही होगा। दुनिया की भलाई इसी में है कि युद्ध के बादल जल्दी ही छंट जाए और शांति कायम हो। क्योंकि जिन देशों का युद्ध से कोई लेना-देना नही है उन्हें भी इसके दुष्परिणाम झेलने ही होंगे।

अंतरराष्ट्रीय (Cartoon On Iran America War) मामलों के जानकार बता रहे हैं कि ट्रंप का ईरान पर हमले का दांव उल्टा भी पड़ सकता है। और ऐसा होता है तो ट्रंप के लिए अगला चुनाव जीतना मुश्किल हो सकता है। ईरान बदले के लिए किस हद तक आगे आता है इससे अमेरिका के चुनाव की दिशा तय होगी। लेकिन अगर ईरान बदले कि कार्यवाही में तीव्रता नही दिखाता तो अमेरिका का दांव काम कर जायेगा और ट्रंप की राह आसान हो जाएगी।

कल राष्ट्रपति ट्रंप (Trump) का राष्ट्र के नाम संबोधन है। (Cartoon On Iran America War) इस संबोधन से काफी हद तक साफ हो जाएगा कि दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ कदम बढ़ा रही है या नही? ईरान से जंग अमेरिका के लिए इतनी आसान भी नही है। इसलिए ट्रम्प से परिपक्वता भरे कदम की उम्मीद लगाई जा सकती है। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल को मन में उठ रहा है वो ये है कि सुलेमानी की ही तरह हाफिज सईद, मसूद अजहर जैसे आतंकियों को हम क्यों नही मार सकते? सुलेमानी दुनिया के लिए खतरा था तो ये दोनों भी कोई संत तो है नही। भारत को इस मामले में अमेरिका से सीख ले लेना चाहिए।

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– सचिन पौराणिक

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