Talented View : डॉक्टर मतलब – डिमांड एंड सप्लाई

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भारतीय समाज मे सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि वो सच्चाई न देख सकता है, (Cartoon On Indian Medical Association) न सुन सकता है और न ही सहन कर सकता है। कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश के एक मंत्री ने कह दिया था कि सब पटवारी भ्रष्ट होतें हैं। इस सच्चाई पर पटवारी भड़क गए और हड़ताल पर चले गए। चूंकि पटवारी वाक़ई भ्रष्ट होतें हैं इसलिए उन्हें जनता से कोई सहानुभूति नही मिली। पटवारी भी जनता के रुझान को समझ गए और काम पर लौट आए।

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ऐसी ही एक सच्चाई बयान करने की खबर आ रही है प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से। आईएमए (Cartoon On Indian Medical Association) ने मंगलवार को एक मीडिया विज्ञप्ति जारी करके यह मांग की है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) उन आरोपों को साबित करें या माफ़ी मांगें, जिसमें उन्होंने कहा था कि शीर्ष फ़ार्मा कंपनियों ने डॉक्टरों को रिश्वत के तौर पर लड़कियां उपलब्ध कराईं। देशभर में मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों में इस कथित बयान पर असंतोष और गुस्सा नज़र आ रहा है।

अब मोदी (Modi government) ने ये कहा या नही कहा ये दीगर है लेकिन मेरा सवाल है कि, क्या एमआर (Cartoon On Indian Medical Association) लॉबी डॉक्टरों को रिश्वत नही देती? डॉक्टरों को कार जैसे महंगे तोहफों से लेकर विदेश यात्रा तक के खर्च फार्मा कंपनियां स्पॉन्सर करती हैं या नही? डॉक्टरों को मोटे प्रलोभन फार्मा कंपनियों की तरफ से दिए जातें है या नही? एमआर, डॉक्टरों के क्लिनिक के बाहर लाइन लगाकर क्यों खड़े होतें है? आपके शहर के कितने ही डॉक्टरों के किस्से आप तक नही पहुंचे की फलां डॉक्टर को फलां कंपनी ने बीसियों लाख की कार गिफ्ट की?

डॉक्टरों को लड़कियां सप्लाय करना बहुत छोटा आरोप है, असलियत में फार्मा कंपनियां इससे भी नीचे गिरकर ऐसे-ऐसे कारनामे करती हैं कि उन्हें यहां लिखा भी नही जा सकता। ये लॉबी इतनी ताकतवर और पैसे वाली होती है कि कोई इनसे नही उलझ सकता। प्रधानमंत्री ने भी अगर सच मे ये कहा है तो इसका मतलब यही है कि उन्होंने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। क्योंकि इस लॉबी की ताकत के आगे सरकारों को भी झुकना पड़ता है।

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लेकिन दबाव और ताकत अपनी जगह और सच्चाई अपनी जगह। फार्मा कंपनियां दरअसल खड़ी ही रिश्वत और प्रलोभन की बुनियाद पर है। (Cartoon On Indian Medical Association) डॉक्टरों का सोचना होता है कि मरीज़ को कोई दवाई तो लिखना ही है तो क्यों न किसी विशेष कंपनी के दवाई मोटे कमीशन पर ही लिख दी जाए। लेकिन इसके अलावा भी डॉक्टरों के काले कारनामें सब जानतें है। सभी डॉक्टर बुरे नही होते सच है, लेकिन ज्यादातर ने अपनी आत्मा फार्मा कंपनियों को बेच दी है ये भी सच्चाई है।

प्रधानमंत्री ने लड़कियां सप्लाय करने की बात कही हो या न कही हो, लेकिन आईएमए को इस पर ज्यादा नौटंकी मचाने की जरूरत नही है। आईएमए (Cartoon On Indian Medical Association) को ज्यादा फिक्र इसकी करना चाहिए कि उनके सेवा का पेशा लूट, डकैती में कैसे और क्यों तब्दील हो चुका है? प्रधानमंत्री ने अगर ऐसा नही कहा तो उनकी प्रशंसा लेकिन अगर ऐसा कहा है तो उनका कोटि-कोटि धन्यवाद। सच सड़वा होता है और उसे नग्न ही कह देने की हिम्मत कम लोग ही कर पातें है। मेडिकल लूट का शिकार हुआ हर शख्स समझता है प्रधानमंत्री ने बिल्कुल ठीक कहा है। अगर फार्मा लॉबी ने इस पर ज्यादा हंगामा किया तो ये उड़ता तीर कहीं भी पहुंच सकता है।

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– सचिन पौराणिक

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