Talented View : भारतीय न्याय प्रणाली पर सवाल

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कश्मीर (Kashmir) में इंटरनेट बंदी और धारा 144 (Section 144) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (supreme court) में आज सुनवाई हुई। जज साहब इंटरनेट (Cartoon On Indian Justice System) बंदी और धारा 144 को लेकर बहुत नाराज दिखे। उन्होंने कहा अनंतकाल तक ऐसा नही चल सकता। इधर कल नागरिकता संसोधन मामले पर भी मीलोर्ड ने कहा कि देश कठिन दौर से गुज़र रहा है। शांति स्थापित होने के बाद ही इन याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां ऐसे ऊपर से देखने पर हिम्मत से भरी लगती है लेकिन क्या ऐसा वाकई है?

Talented View : विश्वयुद्ध का आगाज़

कोर्ट (Cartoon On Indian Justice System) को देश में अभी देश के हालात तनावपूर्ण दिखाई दे रहे है लेकिन जनता की नज़र से देखें तो हालात तब चिंताजनक बने थे जब एक आतंकवादी को बचाने के लिए देश की सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुलवाई गयी थी। कभी कोर्ट ने अपने दरवाजे किसी रेप पीड़िता या भ्रष्टाचार के मामले में आधी रात को नही खोले। इन्हें अगली तारीख देने में कोर्ट एक क्षण नही सोचती लेकिन आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति भला क्यों दिखाई गई थी?

Talented View : भारत किसके साथ?

कुछ दिन पहले निर्भया पर फैसला आया। निर्भया के दोषियो में सबसे खूंखार नाबालिग था इसलिए बच गया। बाकियों को फांसी की सज़ा दी गई है। लेकिन उसमें कोर्ट ने 7 साल ज़ाया कर दिए। 7 मिनट में किये गये अपराध की सज़ा देने में अगर 7 साल लग रहे है तो कोर्ट को आत्मावलोकन की जरूरत है या नही? बंद दरवाज़ों में भारी सुरक्षा के बीच कुछ भी फैसले दे देना आसान होता है लेकिन धरातल पर स्थितियों का सामना करना इतना आसान नही है।


कोर्ट (Cartoon On Indian Justice System) तो कह देगी की कश्मीर (Kashmir) से धारा 144 हटा लो और इंटरनेट चालू कर दो। लेकिन ऐसा करने के बाद अगर आतंकी हमले होतें है तो इसकी जिम्मेदारी क्या कोर्ट लेने को तैयार है? क्या कोर्ट ये नही सोच सकता कि मोबाइल में नेट होने से शरीर मे जान होना ज्यादा जरूरी है? लाशों के ढेर पर बैठकर इंटरनेट चलाना क्या जरूरी है? कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद से अभूतपूर्व शांति का वातावरण है क्योंकि केंद्र ने सख्ती कर रखी है। इसमें ढील मिलने पर आतंकी फिर से सर उठा सकतें है ये संभावना बरकरार है।

कोर्ट कह रही है अनंतकाल तक ऐसा नही चल सकता। सही बात है मीलोर्ड (Cartoon On Indian Justice System)। अनंतकाल तक कश्मीर में ऐसा नही चल सकता लेकिन अनंतकाल तक करोड़ो मुकदमे भी तो नही लटकाये जा सकते। कश्मीर में इंटरनेट की फिक्र करने वाली कोर्ट करोड़ो लंबित मामलों पर भी तो एक नज़र घुमा ले। इंसाफ की आस में अनंतकाल तक टकटकी लगाये रखने वालों पर भी तो कुछ मेहरबानी कीजिये जनाब। बहुत संभावना है कि कश्मीर पर सरकार से जवाब मांगने वाले जज कभी कश्मीर गए भी न हो। वहां के हालातों के बारे में भी कुछ न जानते हो। लेकिन न्याय प्रणाली का दुर्भाग्य है कि ऐसे जज सरकार से जवाब तलब कर सकतें है और फटकार भी लगा सकतें है।

सरकार (Cartoon On Indian Justice System) से लोग नाराज़ है ये बात सही है। सरकार से लोग अक्सर नाराज़ रहतें भी है। लेकिन हर पांच साल में जनता के पास मौका आता है जिससे वो सरकार पलट सकतें है। लेकिन जज साहब ये बताएं की न्याय प्रणाली से दुखी जनता कहाँ जाए? चरमरा चुकी न्याय व्यवस्था को झेलने के अलावा जनता के पास क्या विकल्प बचता है? सरकार के काम मे अड़चने डालने से पहले कोर्ट को खुद की कार्यप्रणाली से दुखी जनता के इस सवाल पर भी सोचना चाहिए। सरकार तो फिर भी बदल जाएगी लेकिन ये सड़ चुकी न्याय व्यवस्था को जनता अनंतकाल तक कैसे सहेगी?

Talented View : पढ़ने नहीं लड़ने का गुरुकुल

– सचिन पौराणिक

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