Talented View : काला कोट vs ख़ाकी वर्दी

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बड़े-बुज़ुर्ग कहतें है कि थानों, कचहरी और अस्पतालों के चक्कर भगवान दुश्मन से भी न लगवाये। बात सही भी है। वकील, पुलिस और डॉक्टरों के फेर में एक बार जो पड़ गया उसका बाकी जीवन फिर इन्ही के साये में गुजरता है। ये तीनो पेशे इतने बदनाम है कि भला आदमी भगवान से प्रार्थना करता है कि जीवन मे इन लोगों से कभी भूले से भी वास्ता न पड़े। ऐसा क्यों है ये भगवान ही जाने लेकिन आज दिल्ली में हालात ऐसे हो गए है कि वकील और पुलिस एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन बैठे है।

Talented View : मैं सही तू गलत

पार्किंग के मामूली विवाद से शुरू घटनाक्रम इतना अधिक बढ़ जाएगा किसी ने सोचा नही था। देश बीते दो दिन से तरह-तरह के वीडियो देख रहा है जिसमे कभी पुलिस वकीलों को पीटती दिखाई दे रही है तो कभी वकील पुलिस को। विनोद के तौर पर सोचा जाए तो मामले में दिल्ली पुलिस ही कटघरे में खड़ी दिखाई देगी। पुलिस की चिर-परिचित लट्ठ कुटाई क्या इतनी कमजोर हो गयी है कि पुलिस को गोलियाँ चलानी पड़ गयी? दिल्ली पुलिस ने क्या डंडों में तैल पिलाना बंद कर रखा है?

 

बीसियों पुलिस वाले मिलकर वकीलों को पीट रहे है और वकील अपने पैरों से ही भाग रहे है। ऐसी होती है क्या पुलिसिया पिटाई? दिल्ली पुलिस द्वारा वकीलों की ठुकाई के बाद वकिलो में उनका खौफ होना चाहिए था। लेकिन वकीलों ने उल्टा थाने में घुसकर पुलिस की पिटाई कर दी। ऐसे कैसे चलेगा पुलिस वालों? दिल्ली पुलिस के लिए ये घटना शर्म से डूब मरने वाली है। निहत्थे वकील थाने में घुसकर उन्हें पीट रहे है तो पुलिस वाले चुपचाप मार खा रहे है? पुलिस क्या लट्ठ चलाना भी भूल गयी है?

इनसे ज्यादा हौसले तो वकीलों ने दिखाए है जो बिना किसी हिचक के पुलिस वालों को तोड़ रहे थे। हालांकि वकीलों को ऐसी ट्रेनिंग नही मिलती लेकीन उनके काम करने का तरीका “स्किल इंडिया” के अनुरूप था। गैर-पेशेवर काम को भी जिस पेशेवर अंदाज़ में वकीलों ने अंजाम दिया है काबिलेतारीफ है। दिल्ली पुलिस की तरह अगर वकीलों के हाथ मे भी लट्ठ होते तो इतना पक्का है कि पुलिस वाले अपने पैरों पर चलकर घर नही जा पाते। कुछ वकील तो इतने काबिल थे कि बिना किसी हथियार के भी मुक्के, लातों और कोहनियों द्वारा पुलिस को मजे से कूट रहे थे।

Talented View : सोशल डकैत

एक बार ये मामला ठंडा हो जाये उसके बाद वकीलों द्वारा दिल्ली पुलिस को एक ट्रेनिंग देने का कार्यक्रम रखवाना चाहिये। इसमें पुलिस को एकजुटता, आपसी लयबद्धता और ऊँचे हौसलों के साथ कार्यवाही को अंजाम देने के तरीके सिखाये जाने चाहिये। वकीलों ने आपसी खींचतान से ऊपर उठकर जिस तरह पुलिस के हौसले पस्त किये वो एक गज़ब का ‘टीमवर्क’ है। वकीलों की तमाम गलतियों को नज़रन्दाज़ करते हुए वरिष्ठ वकीलों और जजों ने जिस प्रकार उनका साथ दिया ये एक असाधारण नेतृत्व क्षमता का उदाहरण है।

जबकि पुलिस के आला अधिकारियों ने सब जानते-समझते भी कुछ पुलिस वालो को ही सस्पेंड कर दिया। दिल्ली के वकीलों ने देश को दिखा दिया है कि एकजुटता से सबकुछ सम्भव किया जा सकता है। पुलिस को वकीलों से बहुत-कुछ सीखने की जरूरत है। वकील न सिर्फ अपने हक के लिए जज्बे के साथ लड़े बल्कि अपने साथियों की पिटाई का बखूबी बदला भी लिया। और आज भी वकील लगातार प्रदर्शन कर रहे है, पुलिस से जरा भी नही डर रहे है।

अंदर की बात ये है कि जनता को न पुलिस की पिटाई से दुख हो रहा है और न वकीलों की कुटाई से। जनता तो इन दोनों से त्रस्त है। बस अब एक बार वकील और पुलिस मिलकर डॉक्टरों को भी कूट दें तो जनता की आत्मा को जीते जी मोक्ष की प्राप्ति हो जाये।

 Talented View : वकील या फाइटर

   – सचिन पौराणिक

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