Talented India : बच्चें मरते हैं, तो मरने दो

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योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) जब नये-नये मुख्यमंत्री बने थे तब उनके नगर गोरखपुर (Cartoon On Gorakhpur Tragedy) के अस्पताल में लगातार बच्चों की मौत हुई थी। सन्यासी का मुख्यमंत्री बनना एक ‘गिरोह’ को पसन्द नही आ रहा था इसलिए गोरखपुर की घटना के लिये सीधे सीधे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया गया, उनका त्यागपत्र मांग लिया गया और उन्हें लानतें भेजी गई। उस समय मुख्यमंत्री ने धैर्य के साथ काम लिया और समस्या के मूल में पहुंचे और वहां काम किया।

Cartoon On Gorakhpur Tragedy

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Cartoon On Gorakhpur Tragedy

इसका सुखद परिणाम ये निकलकर आया कि गोरखपुर (Cartoon On Gorakhpur Tragedy) में हर साल इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) से मरने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी आयी। तब से लेकर अब तक गोरखपुर का वो अस्पताल दुबारा सुर्ख़ियो में नही आया। लेकिन इसी तरह की समस्या अब राजस्थान के कोटा से सामने आ रही है। 100 से ज्यादा बच्चे बीते दिनों में उस अस्पताल में मारे जा चुके है लेकिन राज्य सरकार ‘बेशर्म’ बनी हुई है। मुख्यमंत्री गहलोत कह रहे है ये नई बात नही है तो स्वास्थ्य मंत्री इसे सीएए से ध्यान भटकाने की साजिश बता रहे है।

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अशोक गेहलोत (Ashok Gehlot) को सोचना चाहिए कि ये बच्चे जो मर रहे है वो भाजपा या कांग्रेस (Congress) के बच्चे नही है, ये देश के बच्चे है। राजनीति अपनी जगह लेकिन इन बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।  अगर कोई घटना हर साल होती है तो ये उनके लिए शर्म की बात होना चाहिये राजनीति की नही। बच्चों को सही इलाज मिलेगा, उनकी बीमारी का ठीक से उपचार होगा तो भला बच्चा कैसे मरेगा? अपने गिरेबान में झांककर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की बजाय दूसरों पर राजनीति करने का आरोप लगाना बहुत आसान होता है।

 

गोरखपुर (Cartoon On Gorakhpur Tragedy) में मीडिया ने जो हंगामा किया था उसका 10 प्रतिशत में कोटा की घटना का प्रचार नही हुआ है। लेकिन उतने प्रचार से भी गहलोत सरकार झल्ला चुकी है। उनके स्वास्थ्य मंत्री का बयान सुनकर लगता ही नही की वो कोई जिम्मेदारी लेने को भी तैयार है। गली-नुक्कड़ छाप राजनीतिक शैली की उनकी बयानबाजी संवेदना और मानवता के बुनियादी सिध्दांतों के खिलाफ है। लेकिन अगर मुख्यमंत्री खुद ही घटना को ‘हल्के’ में लेंगे तो मातहत मंत्री दो कदम आगे बढ़कर बयान देंगे ही।

 

सवाल ये है कि गोरखपुर की घटना के लिए योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) जिम्मेदार थे तो कोटा के लिए अशोक गहलोत क्यों नहीं? 100 से ज्यादा बच्चे मर चुकें है लेकिन सियासत के सुरमा दंगे में मरने वाले दंगाइयों के घर जाकर सहानुभूति प्रकट कर रहे है लेकिन कोटा की घटना पर चुप्पी साध ली गयी है। कोटा के मासूम बच्चों के परिजनों से मिलने कोई नेता आखिर क्यों नही जा रहा? कांग्रेस सरकार में बच्चे मर रहे है तो राहुल-प्रियंका (Rahul-Priyanka) के मुह से इस पर एक शब्द नही निकल रहा है। यही घटना अगर यूपी या गुजरात मे होती तब भी ये ऐसे ही चुप रहते?

 

(Cartoon On Gorakhpur Tragedy) राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि बच्चों की मौत पर आंसू भी राज्य सरकार को देखकर बहाये जाते है। कोई ये नही समझ रहा कि ये बच्चे इस देश के है, हम सबके है। राजस्थान सरकार में थोड़ी शर्म बची है तो इस मामले पर दूरगामी कदम उठाए जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। और हर मामले को राजनीतिक चश्मे से न देखे। हर बच्चा हमारे लिए जरूरी है चाहे वो राजस्थान का हो या गुजरात का। देश के भविष्य को इस तरह मरते हुए अब और नही देखा जा सकता।

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