Talented View : हिंदुस्तान हिंदुओं का ?

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दुनिया की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा ईसाई धर्म को मानता है। यूरोप, रशिया, अमेरिका में ईसाई बहुसंख्यक है। इसके अलावा अर्जेंटीना, इंग्लैंड, ग्रीस,डेनमार्क, वेटिकन, जॉर्जिया जैसे देशों का राज्य धर्म ही ईसाई है। ईसाइयों के बाद दुनिया मे सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिमों की है।  दुनिया की करीब 23%आबादी मुस्लिम है। इनके पास 50 से ज्यादा देश है जिनका राष्ट्र धर्म इस्लाम है। ईसाई और मुस्लिमो के अलावा बौद्ध भी एक बड़ा धर्म है। जापान, थाईलैंड, ताइवान, चीन और म्यांमार में बौद्ध बहुसंख्यक है।

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इनके अलावा यहूदी जैसे धर्म जिसके धर्मावलंबियों की संख्या अत्यंत कम है, उनके पास भी खुद का एक देश इजराइल है। दुनिया मे कहीं भी सताया गया यहूदी निश्चिंत होकर इजराइल पहुंच सकता है। उपरोक्त आंकड़े सिर्फ इसलिए खंगाले गए है कि सभी को ये समझ मे आ जाये कि हिंदुओं के पास खुद का एक देश भी नही है। भारत जहां हिन्दू बहुसंख्यक है वहां के लौग भी सेक्युलरिज़्म के झुनझुने को बजाने में इतने व्यस्त है कि वो हकीकत देख नही पा रहे है। हिन्दू सिकुड़ रहे है इसकी अनेक वजहें है जिन पर फिर कभी चर्चा करेंगे फिलहाल आज के मुद्दे पर लौटतें है।

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दक्षिण भारत के एक युवा संत है स्वामी नित्यानंद। नाम से साफ है ये हिन्दू है। भगवा वस्त्र पहनकर इन्होंने जनता को हिंदुत्व की तरफ आकर्षित किया और इलाके में हो रहे धर्म परवर्तन पर व्यापक स्तर पर रोक भी लगाई। स्वाभाविक तौर पर ऐसा करने के बाद वो मिशनरियों के निशाने पर आ गए। इस युवा संत पर एक के बाद एक बलात्कार के कई आरोप लगाए गए और उनके चरित्र हनन की कोशिशें की गई। ये कोशिशें सफल भी रही। आज ज्यादातर जनता नित्यानंद को एक बलात्कारी बाबा ही समझती है।

जबकि नित्यानंद पर एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है। यही नित्यानंद फिर सुर्ख़ियो में इसलिए आ गए है क्योंकि इन्होंने एक द्वीप खरीदकर अपना अलग देश बना लिया है। इसके बाद से वो फिर मीडिया और बुद्धिजीवियों के निशाने पर आ गए है। क्रिकेटर अश्विन से लेकर जनसामान्य तक सोशल मीडिया पर उनका मजाक बनाने में लगे हुए है। लेकिन कोई भी इस दिशा में सोचने को तैयार नही है कि क्या हिंदु इतना हक भी नही रखते की उनके पास खुद का एक देश हो? हमारी ऐसी विकृत मानसिकता ही कहीं हमारे सिकुड़ने की वजह तो नही है?

नित्यानंद ने एक द्वीप खरीदा और उसे हिन्दू देश घोषित किया तो इसमें किसी को भला क्या आपत्ति हो सकती है? उन्होंने दुसरो के देश मे घुसकर दर्जनों बच्चे पैदा करके या फिर महिलाओं के साथ बलात्कार करके उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश तो नही की। न ही वो घुसपैठियों की तरह बसकर दूसरे देशो पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है। सेवा के नाम पर दुसरो का धर्म परिवर्तन भी उन्होंने नही किया। न ही ये सब काम उन्होंने खुद किये और न ही अपने अनुयायियों को ऐसा करने को कहा।

फिर नित्यानंद का विरोध क्यों हो रहा है? क्या हम गलत प्रचार की वजह से तो उनका विरोध नही कर रहे? अगर नित्यानंद ने बलात्कार किया है तो उन्हें इसकी सज़ा मिले। लेकिन सिर्फ आरोपों के चलते हम एक भगवा सन्यासी का उपहास क्यों उड़ा रहे है? जिन धर्मो ने लगभग पूरी दुनिया को अपने रंग में रंग लिया है उनसे एक द्वीप भी हिन्दू राष्ट्र नही देखा जा रहा क्या? हिंदुओ को खुद भी सोचना चाहिए कि दुनिया मे किसी हिन्दू पर अत्याचार होगा तो वो भला कहाँ जाएगा?

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नागरिकता संसोधन बिल पर भी हंगामा किया जा रहा है और नित्यानंद के अलग देश बनाने पर भी। तो हम चाहते क्या है? हिन्दू दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो जाये और उसका खुद का देश एक धर्मशाला बना दी जाए क्या ये हमारी इच्छा है? अगर नही तो हमे इस दुष्प्रचार को समझना चाहिए और बिना सोचे-समझे हमारे साधु-सन्यासियों पर लगे आरोपो को सच नही मान लेना चाहिए। हम खुद अगर हिंदुत्व के लिए कुछ नही कर सकते यो कम से कम जो कर रहा है उसकी आलोचना न करके भी हम हिंदुत्व की बड़ी सेवा कर सकतें है। हमे ये भी नही भूलना चाहिए कि हिंदुत्व इस देश की आत्मा है। जिस दिन हिन्दू इस देश मे अल्पसंख्यक हो गया उस दिन इस देश की आत्मा भी मर जायेगी।

 

– सचिन पौराणिक

 

 

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