धोखेबाज़ों को कठोर सज़ा मिलनी चाहिए

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सभी जानते हैं कि सुपरस्टार दिलीप कुमार का असली नाम यूसुफ खान था। उस समय शायद वह दौर ही ऐसा था, जहां शायद मुस्लिम नाम से उन्हें असफलता का डर था इसलिए उन्होंने दिलीप कुमार नाम रखकर अपना फ़िल्मी सफर शुरू किया और बुलंदियों को छुआ, लेकिन उसके बाद भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का ट्रेंड बदला और सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान जैसे नए सुपरस्टार देश को मिले, जिन्होंने अपने असली नाम से देश में पहचान बनाई। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और इरफ़ान खान जैसे अदाकार भी अपनी शानदार अदाकारी की वजह से देशवासियों के दिलों पर छा गए। देश ने इनमें से किसी फिल्मस्टार की सिर्फ अदाकारी देखी न कि उनका मज़हब। उस्ताद जाकिर हुसैन का तबला वादन भी जनता को उतना ही प्रिय है, जितना रविशंकर की सितार धुनें।

यह भारत की जनता का धर्मनिरपेक्ष चरित्र ही है, जो प्रतिभा और काबिलियत में कभी धर्म-मज़हब नहीं देखती, लेकिन कल एक खबर आई, जिसने भारत की जनता की इस धर्मनिरपेक्ष भावना का शोषण किया। एक साईकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले शख्स ने दिल्ली आकर ज्योतिष की दुकान खोली। लोगों को आसानी से बेवकूफ बनते देख उसने अपने धंधे को फैलाना शुरू किया और टीवी चैनलों के माध्यम से लोगों को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद अपना नाम ‘आशु भाई महाराज’ रखकर इस ढोंगी ने बड़े पैमाने पर लोगों को ठगना शुरू किया। आशु महाराज यहां भी नहीं रुका और उसने दिल्ली में अपना आश्रम खोलकर महिलाओं का यौन शोषण करना शुरू कर दिया। एक नाबालिग बच्ची और उसकी मां के साथ इस ढोंगी ने इलाज के बहाने सालों दुष्कर्म किया। बच्ची ने हिम्मत करके पुलिस थाने जाकर अपने साथ हुई ज्यादतियों की शिकायत दर्ज कराई, तब जाकर इस फर्जी बाबा के काले कारनामों का खुलासा हुआ।

पुलिस जांच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह निकला कि यह आशु बाबा असल में ‘आसिफ खान’ है। हिन्दू नाम इसने सिर्फ महिलाओं का शोषण करने के लिए रखा हुआ था। इस घटना से सभी हैरान हैं कि कैसे एक शख्स अपना असल मज़हब छिपाकर इतने सालों तक महिलाओं का शोषण कर रहा था और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं थी। सवाल है कि ‘लव जिहाद’ की तरह ये भी कोई नए तरह का जिहाद है, जिसमें महिलाओं और बच्चियों से धर्म की आड़ में दुष्कर्म किया जा रहा है? आसिफ खान जैसे लोगों की मानसिकता का क्या इलाज है? महिलाओं का शोषण, करोड़ों की संपत्ति और कई आश्रम उसने इस गोरखधंधे से खोल लिए और किसी को खबर भी नहीं लगी कि आशु महाराज असल में आसिफ खान है?

लव जिहाद से बचने के लिए जिस तरह आजकल बच्चियों को सिखाया जाने लगा है कि अपने प्रेमी को दिल देने से पहले उसका आधार कार्ड जरूर देख लें क्योंकि आपका सनी, राजू और गोलू असल में क्या है, यह समय रहते पता चल जाए। ठीक उसी प्रकार अब महिलाओं को यह भी समझाना पड़ेगा कि जिस बाबा, संत, फ़क़ीर के दर पर वे अपना माथा टेकने आई हैं, वे दरअसल कोई ‘आसिफ खान’ जैसा बलात्कारी न निकल जाए? महिलाओं को जागरूक होना ही पड़ेगा क्योंकि यहां चारों तरफ उनकी आबरू लूटने को तैयार शैतान बैठे है, लेकिन सवाल सरकार, प्रशासन से भी कई है। क्यों नहीं प्रशासन अपने स्तर पर सभी बाबाओं के ठिकानों पर छापे मारकर उनकी सत्यता का पता कर लेता है? क्यों प्रशासन की सुस्ती की कीमत किसी मासूम को अपनी इज्जत गंवाकर चुकानी पड़ती है? आखिर क्यों पुलिस शिकायत मिलने तक सोई रहती है? प्रशासन का खुफिया तन्त्र आखिर किस काम का है?

यदि ऐसे हालात जारी रहते हैं तो देश की जनता के लिए अपनी धर्मनिरपेक्ष सोच को जारी रख पाना संभव नहीं होगा। आसिफ खान कैसे ढोंगी देश के आपसी सौहार्द को बिगाड़ रहे हैं और हम चुपचाप ऐसा होते देख रहे हैं। फरेब और कपट की ऐसी घटनाओं से हिन्दू-मुसलमानों के बीच की खाई और बढ़ेगी। आसिफ खान जैसे धोखेबाज़ों को इतनी कठोर सज़ा मिलनी चाहिए, जिससे दोबारा कोई धर्म-मज़हब के नाम पर महिलाओं की अस्मिता से खेलने से पहले सौ बार सोचें।

-सचिन पौराणिक

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