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Talented View : जनता की समस्याओं की जगह परिवार विशेष पर फोकस

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ससुरालवालों पर इम्प्रेशन झाड़ने के लिए लोग क्या कुछ नहीं  कर जाते? जैसी इंसान की औकात होती है, उस हिसाब से वह ससुरालवालों पर प्रभाव डालने की कोशिश करता है। ससुराल वालों को इम्प्रेस करने वालों में प्रधानमंत्री तक शामिल हो जाते हैं। कल मोदीजी ने दिल्ली में बताया कि कैसे राजीव गांधी ने अपने ससुरालवालों को इम्प्रेस करने के लिए सेना के युद्धपोत को ही टैक्सी बना लिया। नौसेना के जवानों से ससुरालवालों की खातिरदारी करवाई और सेना के हेलीकॉप्टर से ही सैर-सपाटा किया।  28 साल पहले राजीव गांधी की हत्या हो चुकी है। 35 साल पहले इंदिरा गांधी की हत्या हो गई थी। नेहरूजी को गए 55 साल बीत गए। देश को आज़ादी मिले 7 दशक से ज्यादा बीत गए, लेकिन आज भी देश के आम चुनावों का मुद्दा आम जनता की समस्याओं की जगह राजीव गांधी की पिकनिक पार्टी ही बना हुआ है। कब्र खोद-खोदकर जिस प्रकार मुद्दे उखाड़े जा रहे हैं, उससे यही संदेश जा रहा है कि चुनाव सिर्फ जनता को मूर्ख बनाने के लिए लड़े जा रहे हैं।

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Today Cartoon On PM Modi Speech 2019

असलियत में जनता की फिक्र किसी को नहीं है क्यूंकि जनता के मुद्दों की कोई बात ही करने को तैयार नहीं है। अब राजीव गांधी ने विराट से सैर-सपाटा किया या फिर नेहरू ने एडविना के साथ क्या किया, उससे 2019 के चुनावों का क्या सम्बन्ध है? 1984 के दंगे हो, बोफोर्स हो, आईएनएस विराट हो या फिर 1971 का युद्ध हो, आज के युवाओं को इन बातों से आखिर क्या मतलब है? आज युवाओं के हाथ में काम है या नहीं , महिलाओं को सुरक्षा है या नहीं , मध्यम वर्ग की बचत हो रही है या नहीं  जैसे जनता के मुद्दों पर कोई राजनीतिक दल एक शब्द कहने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री खुद राजीव गांधी और नेहरू से आगे कुछ सोच नहीं पा रहे है।

निःसंदेह मोदीजी (PM Narendra Modi) एक बेहतरीन वक्ता हैं, लेकिन अपनी भाषण शैली का इस्तेमाल वे अपने 5 साल का रिपोर्ट कार्ड देने से ज्यादा गड़े मुर्दे उखाड़ने में कर रहे हैं। राजीव का सैर-सपाटा उन्हें याद है, लेकिन अच्छे दिन के वादे को वे भूल चूके हैं| नेहरू की गलतियां उन्हें मौखिक याद है, लेकिन जीएसटी की खामियों की उन्हें फिक्र नहीं है| 1984 का दंगा उन्हें याद है, लेकिन राम मंदिर निर्माण की प्रतिबद्धता वो भूल चुके हैं| 1971 का “गरीबी हटाओ” वाला नारा उन्हें आज याद है, लेकिन धारा 370 हटाने को वो भूल चुके हैं।

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भाजपा (BJP) नेताओं के भाषणों को गौर से सुना जाए तो पाकिस्तान, राष्ट्रवाद, कश्मीर, हिंदुत्व, गौमाता, सेना, राजीव गांधी, पप्पू, इटली का उनमें अनिवार्य रूप से जिक्र होता है, लेकिन नोटबन्दी, जीएसटी, राममंदिर, युवाओं को नौकरी, अच्छे दिन, काला धन जैसे शब्द सुनने को कान तरस जाएंगे। सत्ता पक्ष के नेताओं के भाषण सुनकर एक पल को लगने लगता है मानो ये आज भी विपक्ष में ही हैं क्योंकि आरोपों के अलावा इनके भाषण में आज भी कोई नई बात सुनने को नहीं मिल रही है, लेकिन फिर भी जनता इन नेताओं को सुनने उमड़ रही है तो इसके लिए कांग्रेस का नकारापन भी जिम्मेदार है।

कांग्रेस की तरफ एक छोटी सी गलती होने पर भी जहां भाजपा तुरन्त उन्हें ‘बैकफुट’ पर धकेल देती है जबकि भाजपा गलती पर गलती करती है| तब भी कांग्रेस के नेता इन्हें घेरने में पूरी तरह नाकाम साबित होते हैं। कांग्रेस फुलटॉस गेंद फेंकती है तो मोदी तुरन्त उस पर छक्का जड़ देते हैं जबकि भाजपा की फुलटॉस पर भी कांग्रेस नेता ‘क्लीन बोल्ड’ हो जाते हैं। कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं (जिंदा और मृत) की मोदी बखिया उधेड़ रहे हैं और कांग्रेस लाचारों की तरह चुपचाप ये देखे जा रही है। मोदी को अपने पिताजी के ससुराल की धज्जियां उड़ाते देखते राहुल शायद सोच रहे होंगे कि शुक्र है मैंने अब तक शादी नहीं कि अन्यथा मोदी राहुल के ससुरालवालों पर भी एकाध रैलियां कर डालते।

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