Talented View : एक नई क्रांति- फिट इंडिया मूवमेंट

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2011 में जब अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे तब देश की जनता का अभूतपूर्व समर्थन उन्हें मिला। इसकी वजह ये थी कि भ्रष्टाचार से हर कोई दुखी था। हर आदमी भ्रष्टाचार से मुक्ति पाना चाहता था इसलिए अन्ना आंदोलन में उसे आशा की किरण दिखाई दी। उस दौर में हज़ारों युवाओं ने अपनी नौकरी छोड़कर अन्ना आंदोलन में हिस्सा लिया। कहने का मतलब है कि भ्रष्टाचार का मुद्दा इतना प्रभावी था कि इससे हर कोई जुड़ना चाहता था और यही अन्ना आंदोलन की सफ़लता का राज़ था।

Talented View :  सद्भावना की मिसाल या दिखावा ?

अन्ना आंदोलन को सफल या असफल कहने के अपने मायने, अपने तर्क है, लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद आज देश के सामने एक ऐसा अवसर आया है जो जनता को व्यापक पैमानें पर प्रभावित करता है। देश की जनता को स्वस्थ बनाने के लिये आज सरकार ने “फीट इंडिया मूवमेंट” शुरू किया है। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर मेज़र ध्यानचंद को भी प्रधानमंत्री ने याद किया। प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में जिक्र किया कि हमारे पूर्वज अच्छे स्वास्थ्य को लंबी आयु और शक्ति का स्रोत मानते थे।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को अपनी सेहत पर ध्यान देने के लिए संकल्प लेने का रास्ता सुझाया। संकल्पशक्ति स्वास्थ्य के अलावा भी हर समस्या का समाधान है। आज के दौर में जब हर घर मे कोई न कोई किसी बीमारी से ग्रसित है, तब उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की इस मुहिम को जनता हाथोहाथ लेगी। इस बात से सभी को सहमत होना ही पड़ेगा कि बीमारियों ने देश को बुरी तरह जकड़ रखा है। पहले जो बीमारियां बुढ़ापे में आती थी वो आजकल कच्ची उम्र में भी होने लगी है। 25-30 साल के लड़कों की मौत ‘कार्डियक अरेस्ट’ से होने लगी है।

Talented View : जो गरजते हैं वो बरसते नहीं

5-6 साल के बच्चों को मधुमेह, मिर्गी, पथरी जैसी बीमारियां हो रही है। बड़ी बीमारियों को छोड़ भी दें तो डायबिटीज और रक्तचाप जैसी बीमारियों की पहुंच हर घर तक हो चुकी है। कच्ची उम्र में हो रही बीमारियों की वजह से जवानी को स्वास्थ्य का पर्याय भी नही माना जा रहा है। लाइफस्टाइल जनित रोगों ने लगभग हर परिवार को जकड़ लिया है। खाद्य पदार्थों में मिलावट के बाद हमारी लाइफस्टाइल ही इन रोगों की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आयी है।

सोने के टाइम पर हम खाना खाते है, ब्रह्म मुहूर्त में जागने की जगह हम नींद में सोए रहतें है, जब हमें दोपहर का भोजन लेना होता है उस समय हम नींद से जागतें है। पूरा दिन मोबाइल, लेपटॉप में दिन गुज़ारने के बाद हम यही क्रिया दोहरातें है। इस लाइफस्टाइल में रोग होना नही बल्कि न होना आश्चर्य का विषय बन जाता है। प्रधानमंत्री ने आज इस विषय को बहुत अच्छे से उठाया है। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों के उपयोग और मोबाइल की जगह मैदान में खेल खेलने जैसी छोटी बातें हमारे स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकती है।

युवाशक्ति स्वयं और देश को आगे ले जाने की बजाय बीमारियों में उलझ कर रह गयी है। इस परिस्थिति को बदलने के लिए एक शानदार शुरुआत सरकार ने की है। इसलिए बीमारियों से बचना और निरोगी रहना आज एक ‘राष्ट्रीय जिम्मेदारी’ बन गयी है। प्रधानमंत्री स्फिटनेस के एक स्वयम्भू उदाहरण है। उनकी कही बातें तर्कसम्मत है और हर भारतवासी को व्यवहार में उतारने लायक है। हमे खुद को और परिवार को स्वस्थ रखने के लिए कुछ कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

Talented View : नमो की धाक-पाकिस्तान ख़ाक

“फिट इंडिया मूवमेंट” को घर-घर तक पहुंचाए जाने की जरूरत है। अन्ना आंदोलन से भी बड़ी क्रांति इस मूवमेंट को बनना होगा। “पहला सुख निरोगी काया” की उक्ति हमें ध्यान में रखकर अविलंब इस मुहिम से जुड़ जाना चाहिये। स्वस्थ और तंदुरुस्त युवा ही देश की असली धरोहर है। खुद के साथ ही परिवार, समाज और देश की उन्नति के लिये हमें ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ को सफल बनाने में जुट जाना होगा। ये एक ऐसा आंदोलन है जिसकी सफलता से पूरा देश सेहतमंद बन जायेगा। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस आंदोलन में जुड़ना देशहित की बात होगी। देशहित में हमे सेहत का ध्यान अब रखना ही होगा।

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