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Talented View : सांसें रोककर इंतज़ार कीजिए 23 मई का

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कल शाम 2019 के आम चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया। इसी के साथ अलग-अलग एजेंसियों के एग्जिट पोल सत्ता के नए समीकरण बनाने में लग गए। एग्जिट पोल की ये आंकड़ेबाजी असल नतीजे आने तक रुकने वाली नहीं है। वैसे एग्जिट पोल के गलत होने का भी अपना एक इतिहास रहा है, लेकिन फिर भी जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वे विपक्ष के लिए बेहद चिंताजनक हैं। लगभग हर पोल केंद्र में दोबारा एनडीए की सरकार बनते दिखा रहा है। भाजपा के साथ एनडीए के दलों को भी फायदा मिलता दिख रहा है।

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Today Cartoon On Exit Poll Result 2019, PM Narendra Modi, BJP

जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनमें चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा के साथ ही कांग्रेस की सीटें भी बढ़ने की उम्मीद है। कांग्रेस की सीटें शायद इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि उन्होंने सीटों का निम्नतम स्तर छू लिया है, लेकिन भाजपा की सीटें बढ़ती है तो इसका सीधा मतलब यह है कि देश की जनता का प्रधानमंत्री पर भरोसा कायम है। मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस हाल ही सत्ता में लौटी है, वहां भी जनता ने भाजपा पर पूर्ण विश्वास जताया है। लगता है मध्यप्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत से जनता बहुत जल्दी ही ऊब गई है। एक वजह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की कमजोरी भी मानी जा सकती है।

भाजपा को मोटे तौर पर यूपी में नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह नुकसान कितना होगा, यह समय बताएगा, लेकिन इस नुकसान की भरपाई भाजपा ने कर ली है। बंगाल, उड़ीसा और पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने जा रही है। तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी भाजपा संतोषजनक स्थिति में आ सकती है। कांग्रेस के लिए खुशखबर सिर्फ केरल से आ रही है। वहां उनकी सीटें बढ़ेंगी यह तय है। बिहार और बंगाल जैसे बड़े राज्यों में कांग्रेस का खाता खुलेगा भी या नहीं, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यदि एग्जिट पोल के आंकड़े सच होते हैं तो इसका मतलब यह होगा कि ‘प्रियंका वाड्रा’  का जादू भी कांग्रेस की डूबती नैया को नहीं बचा पाया है। “बंद मुट्ठी लाख की, खुल गई तो खाक की” की तर्ज़ पर कांग्रेस ने अपने आखिरी हथियार को भी खाक कर दिया है। प्रियंका गांधी के धुआंधार प्रचार के बाद भी यदि कांग्रेस वहीं की वहीं है तो मतलब साफ है कि प्रियंका पर जनता विश्वास नहीं कर रही है। हर पोल यूपी में कांग्रेस को इस बार भी 2 ही सीटें दे रहा है। उसमें भी अमेठी का पेंच फंसा हुआ है। अमेठी में हार-जीत का अंतर इस बार कुछ हजार में ही रहने वाला है। आजमगढ़ की रिपोर्ट अखिलेश यादव की बेचैनी बढ़ा सकती है।

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सुनने में आ रहा है कि निरहुआ ने यादव कुनबे में खलबली मचा दी है। आजमगढ़ का रण भी कुछेक हजार वोट से ही जीता या हारा जाएगा, ऐसी संभावना है। लखनऊ से कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णन हारेंगे यह पक्का है। भोपाल में दिग्गी राजा को भी साध्वी पटखनी देने के लिए तैयार है। बेगूसराय में कन्हैया कुमार पर गिरिराज की विजय हो सकती है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी कांग्रेस से दूसरे नंबर की लड़ाई लड़ती नज़र आ रही है। बिहार में लालू-कांग्रेस गठबंधन का सूपड़ा साफ होता दिखाई दे रहा है। यूपी में महागठबंधन ज़रूर कुछ सीटें जीतने में कामयाब होगा। सपा-बसपा दोनों 2014 से बेहतर स्थिति में इस बार होंगे, इसका अनुमान है।

कहा जा सकता है कि हाथी कम से कम इस बार तो अंडा नहीं ही देगा। वामदलों और केज़रीवाल के लिए कहीं से कोई अच्छी खबर नहीं है। 2019  के बाद ये दोनों दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर हो जाएंगे। ममता दीदी की टीएमसी और पटनायक बाबू की बीजद की सीटों पर भाजपा ने बड़ी सेंधमारी कर ली है। लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच देश के 4 राज्यों उड़ीसा, आंध्र, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा के लिए भी वोट गिरे हैं ।

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इन 4 महत्वपूर्ण राज्यो पर ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई है। कुल मिलाकर एग्जिट पोल की माने तो “अब की बार, फिर मोदी सरकार” पक्की है। राहुल के “चौकीदार चोर है” के नारे और “न्याय” पर जनता बिल्कुल भरोसा नहीं कर रही है। ये आंकड़े हकीकत में तब्दील हो गए तो फिर न विपक्ष बचेगा और न ही विपक्षी एकता। देश की राजनीति की एक अद्भुत घटना 2019 के ये चुनाव बनने जा रहे हैं। इस विश्लेषण पर अंतिम मोहर के लिए 2 दिन इंतज़ार करना मुनासिब होगा। दिल थामकर और सांसें रोककर इंतज़ार कीजिए 23 मई का। नतीज़े चाहे जो रहे लेकिन 23 मई की तारीख इतिहास में दर्ज होगी ये पक्का है।

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