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Talented View : जनता समझ रही पर्दे के पीछे का खेल

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पुरानी फिल्मों में कुछ दृश्य आम थे। जैसे, जब भी हीरो विलेन पर भारी पड़ने लगता, तब अचानक हीरो की मां, बहन या फिर प्रेमिका विलेन के कब्जे में आ जाती थी। उनके सिर पर बंदूक लगाकर विलेन हीरो को अपनी बात मानने पर मजबूर कर देता था। यह दृश्य उस दौर की लगभग हर फिल्म में दोहराया जाता था, लेकिन बदलते वक्त के साथ दर्शक इस तरह के दृश्य से ऊब गए। इसके बाद नए तरीकों से फिल्मों में हीरो को ब्लैकमेल किया जाने लगा।

Talented View : केंद्र-राज्य में तकरार,लोकतंत्र तार-तार

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ये दावे किए जाते थे कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा। भ्रष्टाचारियों को नाम ले-लेकर कोसा जाता था। उन नामों में सबसे प्रमुखता से कोई नाम लिया जाता था तो वह था रॉबर्ट वाड्रा का। हरियाणा और राजस्थान के ज़मीन घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर काले धन के आरोप वाड्रा पर लगाए गए। ऐसा माहौल बनाया गया था कि राजस्थान और हरियाणा में भाजपा के जीतते ही सबसे पहले जो काम किया जाएगा, वह होगा रॉबर्ट वाड्रा को जेल में डालना।

खैर, राजस्थान में भाजपा की सरकार 5 साल चलकर विदा भी हो गई, हरियाणा में भी वाड्रा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन अगले आमचुनाव की दस्तक के बीच कल ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने 6 घंटे से ज्यादा समय तक वाड्रा से पूछताछ की। आज भी वाड्रा को एजेंसी के सामने पेश होना है। दुबई में गैर-कानूनी ढंग से खरीदी गयी कई संपत्तियों और काले धन को लेकर वाड्रा एक बार फिर एजेंसियों के निशाने पर है। सैद्धांतिक तौर पर देखा जाए तो वाड्रा हो, माल्या हो या फिर अन्य कोई अपराधी हो, कानून का शिकंजा सभी पर कसा जाना चाहिए, लेकिन किसी की भी गिरफ्तारी या जांच राजनीतिक कारणों से नहीं होनी चाहिए।

वाड्रा यदि दोषी है तो उन पर कार्रवाई बिल्कुल जायज़ है और बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में प्रवेश के बाद से ही यदि उनके खिलाफ जांच में तेज़ी लाई गई है तो यह सरासर गलत है। वाड्रा दोषी है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए, लेकिन उनका राजनीतिक इस्तेमाल आखिर क्यों किया जा रहा है? केंद्र सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में वाड्रा से पूछताछ सिर्फ चुनाव के कुछ महीनों पहले क्यों शुरू की जा रही है? 2014 का चुनाव मुद्दा भी वाड्रा को जेल में डालना था और 2019 में भी ऐसी ही तैयारी लग रही है।

Talented View : लोकतंत्र का रखवाला कौन ?

सवाल है कि अब अपराधियों पर कार्रवाई भी क्या चुनाव की तारीख देखकर की जाएगी ? वाड्रा दोषी है तो उन्हें जेल में डालिये, लेकिन यह नौटंकी क्या जनता को समझ नहीं आ रही? प्रियंका के सक्रिय राजनीति के कदम को फुस्स करने के लिए ‘जीजाजी’ को मोहरा तो नहीं बनाया जा रहा है? भाजपा और सरकार के रणनीतिकार पुरानी फिल्मों से ज्यादा प्रभावित तो नहीं हो गए हैं? प्रियंका के प्रभाव को कम करने के लिए जमाईजी को हथकड़ी पहनाने की तैयारी तो सरकार ने नहीं कर ली है?

पहले फिल्मों में हीरो को रोकने के लिए जो पैंतरे अपनाए जाते थे वही दाव-पेंच लगता है अब सरकार अपना रही है, लेकिन सरकार को समझना चाहिए कि ऐसे पैंतरों से जनता अब फिल्मों के साथ ही राजनीति में भी ऊब चुकी है। इन घिसे-पिटे हथकंडों को त्यागकर सरकार को भी ब्लैकमेलिंग के नए तरीके खोजना चाहिए। जनता को वाड्रा से कोई सहानुभूति नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे का यह खेल भी जनता अच्छे से समझ रही है।

-सचिन पौराणिक

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