Talented View : अर्थव्यवस्था सुधारने वाले स्वामी

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डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर अपनी तरकश से निकालकर ऐसा तीर चलाया है (Cartoon On Indian Economic Crisis) जो लगता है रास्ता भटक गया है। स्वामी ने कहा कि भारतीय मुद्रा पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाने से हो सकता है भारतीय मुद्रा की स्थिति में सुधार आये। उनकी इस सलाह के सामने आते ही विरोधियों ने उन्हें निशाने पर ले लिया और सोशल मीडिया पर वो ट्रोल होने लगे। हालांकि कुछ लोग उनके समर्थन में भी सामने आए लेकिन तथ्यों के अभाव में जो ज्यादा कुछ कह नही सके।

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Cartoon On indian Economic Crisis | Political Toon

ये एक विचारणीय प्रश्न है कि भारत (Cartoon On Indian Economic Crisis) की मुद्रा पर क्या अंकित होना चाहिए या किसका चित्र होना चाहिये? इतिहास की बात करें तो सिक्को पर भगवान राम की तस्वीरों वाले कई सिक्के संग्रहालयों में मिल जाएंगे। लेकिन अगर कहा जाए कि अकबर और मोहम्मद गौरी ने भी राम और लक्ष्मी वाले सिक्के चलाये थे तो ज्यादातर लोग इस पर भरोसा नही करेंगे। किन्तु ये एक ऐतिहासिक तथ्य और सत्य है। अकबर ने सियाराम का तो मोहम्मद गोरी ने लक्ष्मी जी का सिक्का चलवाया था।

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लोकविश्वास को अगर मुद्रा पर उतारा जाता है (Cartoon On Indian Economic Crisis) तो इसमें कुछ गलत नही है। लेकिन ये बयान स्वामी की तरफ से आया है इसलिए हंगामा मच गया है। क्योंकि विपक्ष पूछ रहा है जब लक्ष्मी जी (निर्मला सीतारमण) को वित्त मंत्री बनाने से भी जब अर्थव्यवस्था नही सुधर रही तो लक्ष्मी जी को नोट पर छापने से भला क्या हो जायेगा? आरबीआई के दरवाजे पर निम्बू-मिर्ची टांगने से लेकर नोटों की नज़र उतारने के सुझाव अब जनता द्वारा सोशल मिडिया पर दिए जा रहे है।

 

किन्तु इस बहस से इतर ये समझ आ रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था सही नही चल रही है। (Cartoon On Indian Economic Crisis) बाजारों में जो रौनक थी वो समानांतर अर्थव्यवस्था से आ रही थी जिसे नोटबंदी ने ध्वस्त करके रख दिया और रही सही कसर जीएसटी ने पूरी कर दी। अब बाज़ार बेज़ार है और दुकानदार हैरान। भारतीय मुद्रा की साख गिरती जा रही है और महंगाई काबू से बाहर हो चली है। ऐसे वक्त में नोट पर लक्ष्मी जी का फ़ोटो छापने जैसे बयान सिर्फ जनता के गुस्से को भड़काते ही है। नोटों पर लक्ष्मी छापो चाहो गांधी, लेकिन उनकी आम आदमी की जेबों पर डकैती तो न डालो।

 

जिस आदमी (Cartoon On Indian Economic Crisis) की जेब में नोट टिक नही पा रहे, खर्चों से जो तालमेल बैठा नही पा रहा है उसके गुस्से में पेट्रोल छिड़कने का काम ये बेवजह की चर्चा कर रही है। चर्चा होना चाहिए कि अब क्या कदम उठाए जाएं जिससे हालात बेहतर बने। लेकिन चर्चा ये चल पड़ी है कि नोटों पर तस्वीर किसकी लगे? खैर, जनता को कोई मतलब नही नोट पर लक्ष्मी जी हो चाहे गांधी जी, उसकी जेब भरी रहे इसके अलावा उसे कोई परवाह नही। लेकिन राजनीति इसी का नाम है कि काम के मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय ऐसे बेवजह के मुद्दों को ही भड़काया जाए और जनता को अंधेरे में रखा जाए।

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सचिन पौराणिक

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